
मथुरा, अमृत विचार। श्रीकृष्ण जन्मभूमिशाही ईदगाह मस्जिद विवाद में समझौते की कोशिश एक बार फिर बेनतीजा रही। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार यादव की विशेष लोक अदालत में मध्यस्थता प्रक्रिया का तीसरा प्रयास किया गया, लेकिन मुस्लिम पक्ष के उपस्थित नहीं होने से वार्ता आगे नहीं बढ़ सकी।
इसके बाद अदालत ने समझौता वार्ता से संबंधित पत्रावली निस्तारित कर दी।मध्यस्थता प्रक्रिया खत्म होने के बाद हिंदू पक्ष ने मुस्लिम पक्ष की गैरहाजिरी पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि मामले को जानबूझकर लंबा खींचने का प्रयास किया जा रहा है।
ढाई एकड़ जमीन को लेकर है विवाद
हिंदू पक्षकार एवं अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि विवादित करीब ढाई एकड़ भूमि को हिंदू पक्ष भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मानता है। उनका कहना है कि जन्मभूमि की जमीन के बदले किसी दूसरे स्थान पर भूमि स्वीकार करने का कोई सवाल नहीं है।
उन्होंने शाही ईदगाह मस्जिद को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने से जुड़े प्रस्तावों को भी स्वीकार करने से इनकार किया। हिंदू पक्ष का कहना है कि जिस भूमि को वह श्रीकृष्ण जन्मभूमि मानता है, उसके बदले दूसरी जगह जमीन देना विवाद का समाधान नहीं हो सकता।
मुस्लिम पक्ष की गैरहाजिरी पर उठे सवाल
मंगलवार को मध्यस्थता प्रक्रिया के दौरान मुस्लिम पक्ष के मौजूद नहीं रहने पर हिंदू पक्ष ने आपत्ति जताई। हिंदू पक्षकारों का आरोप है कि इस तरह की गैरहाजिरी से विवाद के समाधान की प्रक्रिया लंबी खिंच रही है। मध्यस्थता प्रक्रिया के निस्तारित होने के बाद अब मामले की आगे की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट में होने की संभावना है। हिंदू पक्ष के अनुसार अगली सुनवाई या समझौता वार्ता के लिए 21, 22 या 23 अगस्त की तारीखें प्रस्तावित हैं।
हिंदू पक्ष ने रखा ऐतिहासिक घटनाक्रम का दावा
हिंदू पक्ष ने विवाद के ऐतिहासिक घटनाक्रम का भी उल्लेख किया। उनका दावा है कि वर्ष 1670 में औरंगजेब के शासनकाल में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर को क्षति पहुंचाई गई और वहां ईदगाह का निर्माण कराया गया था। हालांकि, ये हिंदू पक्ष के दावे हैं और विवाद का अंतिम न्यायिक निर्धारण संबंधित अदालतों की कार्यवाही में होगा।
अदालत परिसर में मौजूद रहे हिंदू पक्षकार
मंगलवार को अदालत परिसर में महेंद्र प्रताप सिंह के अलावा दिनेश शर्मा, अजय प्रताप सिंह, दिनेश फलाहारी, महेश खंडेलवाल समेत कई हिंदू पक्षकार और अधिवक्ता मौजूद रहे।
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