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Microplastics: जन्म से पहले ही शरीर में पहुंच रहे प्लास्टिक के कण! असलियत जान आप भी रह जाएंगे दंग

How microplastics affect human health: प्लास्टिक का इस्तेमाल अब केवल हमारे पर्यावरण को ही नुकसान नहीं पहुंचा रहा है बल्कि यह हमारी सेहत के लिए भी गंभार और बहुत बड़ी चुनौती बन गया है।

Microplastics: जन्म से पहले ही शरीर में पहुंच रहे प्लास्टिक के कण! असलियत जान आप भी रह जाएंगे दंग

एक नई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में दावा किया गया है कि माइक्रोप्लास्टिक्स हमारे जीवन के लगभग हर हिस्से में मौजूद हैं। माइक्रोप्लास्टिक और इंसान जन्म से पहले ही एकदूसरे के संपर्क में आ जाते हैं।

क्या कहती है रिपोर्ट्स

रिपोर्ट के अनुसार, माइक्रोप्लास्टिक्स इतने सूक्ष्म होते हैं कि हम उन्हें खुली आंखों से देख भी नहीं सकते हैं। इसलिए आज ये हमारे भोजन, हवा, पानी, घर के सामान और यहां तक कि अस्पताल में इस्तेमाल होने वाले मेडिकल उपकरणों के जरिए भी शरीर में प्रवेश कर सकते हैं।

माइक्रोप्लास्टिक्स के पांच प्रमुख सोर्स

  • भोजन और खाने की वस्तुओं की पैकेजिंग
  • घर के अंदर का वातावरण
  • बाहरी वातावरण और मनोरंजन गतिविधियां
  • बच्चों के खिलौने और अन्य उत्पाद
  • पर्सनल केयर
  • स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े उत्पाद

विशेषज्ञ मानते हैं कि प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण को अब केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं, बल्कि एक सिस्टमेटिक हेल्थ क्राइसिस के रूप में देखा जाना चाहिए।

अस्पताल भी बन सकते हैं माइक्रोप्लास्टिक्स का स्रोत

अस्पतालों में इलाज के दौरान भी मरीज के शरीर में माइक्रोप्लास्टिक्स पहुंच सकते हैं। कार्डियक कैथेटर, सिलिकॉन ब्रेस्ट इम्प्लांट, ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट और इंट्रावेनस फ्लूइड जैसी ट्रीटमेंट के जरिए प्लास्टिक के सूक्ष्म कण शरीर में प्रवेश कर सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, आपको जानकर हैरानी होगी कि ऑपरेशन थिएटर में एक शिफ्ट के दौरान प्रति वर्ग मीटर 9,258 तक माइक्रोप्लास्टिक के कण पाए गए हैं।

नवजात शिशु भी नहीं हैं सुरक्षित

कई बार नियोनेटल आईसीयू में प्रीमेच्योर बच्चों को रखना पड़ता है। इस दौरान उनकी नसों के जरिए पोषण पहुंचाया जाता है। IV Feeding पाने वाले  समय से पहले जन्मे बच्चों के शरीर में महज 72 घंटे के दौरान 115 तक माइक्रोप्लास्टिक कण पहुंच सकते हैं।

बच्चों के खिलौने और पेंट भी हैं खतरा

बच्चों के प्लास्टिक निर्मित खिलौने, बिल्डिंग ब्लॉक्स, प्ले मैट और घरों में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक आधारित पेंट को भी माइक्रोप्लास्टिक्स का बड़ा स्रोत बताया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, समय के साथ पेंट घिसने या उसे हटाने के दौरान भी हवा में फैलते हैं, जो श्वास नली के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं।

माइक्रोप्लास्टिक से होने वाले नुकसान

वैज्ञानिकों का कहना है कि के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले सभी प्रभाव अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन यह विषय चिंता का जरूर है।

  • हार्मोनल असंतुलन पैदा कर सकते हैं।
  • डीएनए को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • हानिकारक रसायनों और बैक्टीरिया को शरीर तक पहुंचा सकते हैं।

माइक्रोप्लास्टिक्स से बचने के लिए क्या करें?

  • प्लास्टिक का उपयोग जितना हो सके कम करें।
  • कपड़े या जूट के बैग इस्तेमाल करें।
  • प्लास्टिक की जगह कांच और स्टील के बर्तनों को प्राथमिकता दें।
  • बच्चों के लिए नॉनप्लास्टिक खिलौने चुनें।
  • घर में पेंट करवाते समय नेचिरल पेंट का इस्तेमाल करें।
  • सिंथेटिक कपड़ों की जगह नेचुरल फाइबर वाले कपड़े पहनें।

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