Madhya Pradesh

सेवा-सम्मान और संस्कार का संगम बना ‘मातृ-पितृ भक्ति दिवस’, मंत्री विश्वास सारंग की पहल युवाओं को दे रही बड़ा संदेश

आज के आधुनिक और डिजिटल दौर में जहां युवा पीढ़ी तेजी से पाश्चात्य पद्धति, सोशल मीडिया की वर्चुअल दुनिया और भौतिकवादी सोच की ओर आकर्षित हो रही है, वहीं पारिवारिक संस्कारों और नैतिक मूल्यों के क्षरण को लेकर समाज में गंभीर चिंता व्यक्त की जा रही है. ऐसे समय में मध्य प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने अपने मातापिता की स्मृति को जनसेवा, संस्कार और सामाजिक चेतना के अभियान में बदलकर एक प्रेरणादायी उदाहरण पेश किया है.

सेवा-सम्मान और संस्कार का संगम बना ‘मातृ-पितृ भक्ति दिवस’, मंत्री विश्वास सारंग की पहल युवाओं को दे रही बड़ा संदेश
सेवा-सम्मान और संस्कार का संगम बना ‘मातृ-पितृ भक्ति दिवस’, मंत्री विश्वास सारंग की पहल युवाओं को दे रही बड़ा संदेश

मंत्री विश्वास कैलाश सारंग द्वारा शुरू किया गया “मातृपितृ भक्ति दिवस” अब केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि विशेष रूप से युवाओं को भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और सेवा भाव से जोड़ने वाला राष्ट्रीय जनअभियान बनता जा रहा है. भाजपा के संस्थापक सदस्य, पूर्व सांसद स्व. कैलाश नारायण सारंग की जयंती पर 2 जून को देशभर में मातृपितृ भक्ति दिवस श्रद्धा, सम्मान और सेवा भाव के साथ मनाया गया. इस मौके पर सोशल मीडिया पर सारंग_मातृ_पितृ_भक्ति_दिवस कई घंटों तक ट्रेंड करता रहा. हजारों युवाओं ने अपने मातापिता एवं क्षेत्र के बुजुर्गों का सम्मान कर उनकी तस्वीरें और वीडियो साझा किए.

सेवा, सम्मान और संस्कार का अद्भुत संगम

मंत्री सारंग के आह्वान पर युवाओं ने लगातार तीन दिनों तक सेवा कार्यों में बढ़चढ़कर भागीदारी की. प्रदेश सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों में बुजुर्गों का सम्मान, राहगीरों को शरबत वितरण, रक्तदान शिविर, निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर तथा पौधारोपण जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए. खुद मंत्री ने वृद्धजनों के चरण पखारकर, उनकी आरती उतारकर एवं सम्मान कर भारतीय संस्कृति में निहित सेवा और श्रद्धा की परंपरा को जीवंत किया. बुजुर्गों ने इस सम्मान से अभिभूत होकर उन्हें आशीर्वाद दिया.

एक पेड़ मां के नाम से दी श्रद्धांजलि

इस अवसर पर एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत बड़े स्तर पर पौधारोपण किया गया. विभिन्न सेवा प्रकल्पों के माध्यम से कैलाश सारंग को श्रद्धांजलि अर्पित की गई. कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में युवाओं, सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों की सहभागिता देखने को मिली.

युवाओं को संस्कारों से जोड़ने की कोशिश

आज की युवा पीढ़ी तकनीक और आधुनिकता के साथ आगे बढ़ रही है लेकिन इसके साथ ही नैतिक मूल्यों, पारिवारिक जुड़ाव और सामाजिक जिम्मेदारियों से दूरी भी बढ़ती दिखाई दे रही है. ऐसे समय में मंत्री विश्वास सारंग का यह अभियान युवाओं को यह संदेश दे रहा है कि आधुनिकता के साथ संस्कारों का संतुलन ही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी शक्ति है.

यह अभियान युवाओं को यह सीख दे रहा है कि सफलता केवल कॅरियर या आर्थिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि मातापिता के सम्मान, बुजुर्गों की सेवा और समाज के प्रति संवेदनशीलता से भी मापी जाती है. मंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में मातापिता को देवतुल्य माना गया है. भगवान श्रीराम ने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए वनगमन स्वीकार किया. श्रवण कुमार ने अपने मातापिता की सेवा को जीवन का उद्देश्य बनाया और भगवान श्रीगणेश ने मातापिता की परिक्रमा को संपूर्ण पृथ्वी की परिक्रमा के समान बताया. ये सभी प्रसंग हमें यही शिक्षा देते हैं कि मातापिता ही जीवन के प्रथम गुरु और पूजनीय हैं.

सारंग ने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि युवा पीढ़ी मोबाइल और सोशल मीडिया की आभासी दुनिया से निकलकर अपने परिवार और समाज के प्रति भी जिम्मेदारी समझे. मातापिता की सेवा से बढ़कर कोई धर्म, कोई तप और कोई पुण्य नहीं है. अगर युवा अपने मातापिता के प्रति सम्मान और सेवा का भाव अपनाएं तो समाज में संस्कार, संवेदनशीलता और पारिवारिक एकता स्वतः मजबूत होगी.

बन गया एक प्रेरक आंदोलन

मंत्री विश्वास सारंग का यह प्रयास केवल अपने मातापिता के प्रति श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि समाज में संस्कार, सेवा, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों को पुनर्जीवित करने वाला एक प्रेरक आंदोलन बन चुका है. उनका यह अभियान आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति की जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है और युवाओं को यह संदेश दे रहा है कि आधुनिकता के इस दौर में भी संस्कार ही व्यक्ति और समाज की सबसे बड़ी ताकत हैं.

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