आजकल सुबह आंख खुलने से लेकर रात को सोने तक, मोबाइल हमारे हाथ से नहीं छूटता. ऑफिस का काम हो या रील्स देखना, हमारा स्क्रीन टाइम लगातार बढ़ रहा है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मोबाइल की यह लत आपकी आँखों की प्राकृतिक नमी को छीन रही है? आजकल ओपीडी में ड्राई आई सिंड्रोम के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह हमारा स्मार्टफोन ही है. बड़े हो या बच्चे हर किसी की सुबह मोबाइल से होती है और रात में सोने से पहले काफी देर तक लोग स्क्रीनिंग में लगे रहते हैं. बच्चों की बात करें तो ये मोबाइल को देखे बिना खाना नहीं खाते हैं.

कई रिसर्च में सामने आया है कि मोबाइल देखते हुए खाना खाने वाले बच्चों का पाचन तंत्र बिगड़ा रहता है. इस वजह से उनकी ग्रोथ भी ठीक से नहीं हो पाती है. यहां हम इससे बढ़ने वाले ड्राई आई सिंड्रोम के बारे में आपको बताने जा रहे हैं.
कैसे बढ़ती है ड्राई आई सिंड्रोम की समस्या
बीएलके मैक्स हॉस्पिटल में ऑप्थेमेलॉजी विभाग में एचओडी डॉ विवेक गर्ग बताते हैं कि दरअसल, हमारी आँखों को सेहतमंद रखने के लिए आंसुओं की एक परत जरूरी होती है. सामान्य तौर पर हम एक मिनट में करीब 15 से 20 बार पलकें झपकाते हैं, जिससे आँखों में नमी बनी रहती है. डॉक्टरों के मुताबिक, जब हम मोबाइल स्क्रीन पर कोई दिलचस्प वीडियो या काम देख रहे होते हैं, तो हमारा ध्यान इतना केंद्रित हो जाता है कि हम पलक झपकना ही भूल जाते हैं.
ऐसे में पलक झपकने की दर घटकर सिर्फ 5 से 7 बार रह जाती है. नतीजा यह होता है कि आँखों का पानी तेजी से सूखने लगता है. इसके कुछ मुख्य लक्षण हैं जैसे आँखों में लगातार चुभन, जलन या सूखापन रहना, आँखें लाल होना, भारीपन लगना और स्क्रीन देखते समय अचानक धुंधलापन आ जाना.
202020 का फॉर्मूला
अगर आपका काम मोबाइल या लैपटॉप के बिना नहीं चल सकता, तो डॉक्टर 202020 का फॉर्मूला अपनाने की सलाह देते हैं. इसके तहत हर 20 मिनट के काम के बाद 20 सेकंड का एक छोटा सा ब्रेक लें और अपनी स्क्रीन से नजर हटाकर कम से कम 20 फीट दूर किसी चीज़ को देखें. इसके अलावा, स्क्रीन देखते समय जानबूझकर पलकें झपकाते रहें.
रात को कमरे की लाइट बंद करके मोबाइल बिल्कुल न चलाएं, क्योंकि अंधेरे में स्क्रीन की लाइट आँखों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है. दिक्कत ज्यादा हो तो बिना देरी किए आई स्पेशलिस्ट को दिखाएं.



