
राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में पुलिस की फर्द बरामदगी में एक नया खेल उभर आया है। इसे उसकी नासमझी या कुछ बड़ों को बचाने की साजिश भी माना जा रहा है। फर्द के अनुसार आरोपी अविनाश शुक्ला ने बताया कि उसने चढ़ावे की गणना के दौरान नकदी की हेराफेरी की, इसमें वापस बची रकम को ट्रस्ट को वापस कर दी थी।
पुलिस ने उसकी निशानदेही पर 26 जून को ट्रस्टी व वादी मुकदमा कृष्ण मोहन के लॉकर से नकदी, जेवरात और विदेशी मुद्रा (डॉलर) की बरामदगी की थी। इसको लेकर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब वादी को यह मालूम था तो उसने पुलिस को दी तहरीर में इसका जिक्र क्यों नहीं किया।
अविनाश की गिरफ्तार पांच जून को ही हो गई थी, इसका सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था। जिसमें कुछ वर्दी में तो कुछ सादी वर्दी में पुलिसकर्मी उसे कौशलपुरी स्थित एक योग केंद्र से गिरफ्तार कर एक गाड़ी में बैठाकर ले जाती दिखती है। इस दौरान एक कर्मी के हाथ में काला बैग भी दिख रहा है, जिसमें नकदी होने की संभावना जताई जा रही है।
यहां एक और तथ्य महत्वपूर्ण है कि तब तक ट्रस्टी कृष्ण मोहन की एंट्री अयोध्या में नहीं हुई थी, उस समय ट्रस्ट महासचिव चंपत राय, सदस्य डॉ. अनिल मिश्र व विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव ही व्यवस्था संभाल रहे थे। वहीं, फर्द के मुताबिक आरोपी अविनाश ने खुद ही रकम वापस की थी। जो ट्रस्टी कृष्ण मोहन के लॉकर में रखी हुई है।
पुलिस ने उसकी निशानदेही पर मुकदमा वादी समेत चार गवाहों की मौजूदगी में कृष्ण मोहन के लॉकर से 20.39 लाख नकद, 1121 अमेरिकी डॉलर व 11.58 ग्राम सोने की चेन व अंगूठी व करीब 159.54 ग्राम चांदी का जेवरात बरामद किया। यहां एक सवाल और खड़ा होता है कि जब चोरी की गई नकदी आदि की बरामदगी की गई तो उसे ट्रस्ट के लॉकर में क्यों रखा गया, इसे पुलिस को क्यों नहीं सौंपा गया।
वहीं, एक यक्ष प्रश्न और भी है कि जब ट्रस्टी कृष्ण मोहन के लॉकर में रुपये आदि रखे थे तो उन्होंने पुलिस की दी तहरीर में इसका जिक्र क्यों नहीं किया। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आपराधिक कृत्य में आता है। फिलहाल आरोपी अविनाश को पुलिस ने गुरुवार को रिमांड पर लिया है। अब उससे पूछताछ की जाएगी। इससे कई बड़े खुलासे भी हो सकते हैं। लोगों की नजर अब पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी है।



