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मूंग, मसूर या उड़द? इन 7 दालों में किसमें सबसे ज्यादा प्रोटीन, जानें कौन सी दाल किसके लिए है फायदेमंद..​​​​​​

भारतीय खाने की थाली में दाल की अपनी खास जगह है। रोटी हो या चावल, दाल के बिना खाना अधूरा-सा लगता है। खासकर शाकाहारी लोगों के लिए दालें प्रोटीन हासिल करने का एक महत्वपूर्ण जरिया हैं। मूंग, मसूर, उड़द, अरहर, चना, राजमा और लोबिया जैसी दालें स्वाद के साथ शरीर को प्रोटीन, फाइबर, आयरन और फोलेट जैसे कई पोषक तत्व भी देती हैं।

लेकिन सभी दालों की न्यूट्रिशनल वैल्यू एक जैसी नहीं होती। किसी में प्रोटीन थोड़ा ज्यादा होता है तो कोई आसानी से पच जाती है। अगर आप मसल्स बढ़ाना चाहते हैं, वजन कंट्रोल करना चाहते हैं या रोज की डाइट को ज्यादा पौष्टिक बनाना चाहते हैं, तो यह जानना जरूरी है कि किस दाल में क्या खास है।

ध्यान रखें कि नीचे बताई गई प्रोटीन मात्रा 100 ग्राम कच्ची दाल के अनुमान पर आधारित है। दाल पकने के बाद पानी सोखती है, इसलिए 100 ग्राम पकी हुई दाल में प्रोटीन की मात्रा अलग दिखाई देती है।

1. उड़द दाल में कितना प्रोटीन होता है?

उड़द दाल को प्रोटीन के अच्छे स्रोतों में गिना जाता है। करीब 100 ग्राम कच्ची उड़द दाल में लगभग 25 ग्राम प्रोटीन मिल सकता है। पकने के बाद पानी की मात्रा बढ़ने के कारण प्रति 100 ग्राम प्रोटीन लगभग 8-9 ग्राम के आसपास रह सकता है।

उड़द में प्रोटीन के साथ आयरन, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। इसका इस्तेमाल दाल के अलावा इडली, डोसा और वड़ा जैसी चीजों में भी किया जाता है।

हालांकि कुछ लोगों को उड़द दूसरी हल्की दालों की तुलना में भारी लग सकती है। इसलिए पाचन की समस्या होने पर मात्रा और पकाने के तरीके का ध्यान रखना चाहिए।

2. मूंग दाल क्यों मानी जाती है हल्की?

मूंग दाल भारतीय घरों में सबसे लोकप्रिय दालों में से एक है। 100 ग्राम कच्ची मूंग दाल में करीब 24 ग्राम प्रोटीन पाया जा सकता है। पकने के बाद पानी सोखने की वजह से इसकी प्रति 100 ग्राम प्रोटीन मात्रा करीब 7-9 ग्राम रह सकती है।

मूंग दाल को आमतौर पर हल्की और आसानी से पचने वाली दाल माना जाता है। यही वजह है कि बीमारी के बाद या हल्का भोजन करने के दौरान भी कई लोग मूंग दाल की खिचड़ी या मूंग दाल का सूप पसंद करते हैं।

अंकुरित मूंग भी डाइट में शामिल की जा सकती है और इससे भोजन में प्रोटीन और फाइबर की मात्रा बढ़ाने में मदद मिलती है।

3. मसूर दाल में भी भरपूर प्रोटीन

मसूर दाल भी प्रोटीन का अच्छा शाकाहारी स्रोत है। करीब 100 ग्राम कच्ची मसूर दाल में लगभग 24 ग्राम प्रोटीन हो सकता है। पकाने के बाद प्रति 100 ग्राम इसमें करीब 8-9 ग्राम प्रोटीन मिल सकता है।

मसूर दाल जल्दी पक जाती है और इसे तैयार करने के लिए आमतौर पर दूसरी कई दालों की तुलना में कम समय लगता है। इसे दाल के अलावा सूप और कई तरह के व्यंजनों में इस्तेमाल किया जाता है।

इसके साथ इसमें फाइबर और अन्य जरूरी पोषक तत्व भी मिलते हैं, इसलिए संतुलित डाइट में इसे आसानी से शामिल किया जा सकता है।

4. चना दाल क्यों है खास?

चना दाल सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं बल्कि प्रोटीन और फाइबर के कारण भी उपयोगी मानी जाती है। यह पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकती है।

अगर कोई व्यक्ति वजन नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है तो चना दाल को संतुलित मात्रा में डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। हालांकि वजन घटाने के लिए केवल चना दाल खाना पर्याप्त नहीं है। पूरी डाइट, कैलोरी और शारीरिक गतिविधि का संतुलन जरूरी है।

5. अरहर या तूर दाल

अरहर दाल भारतीय घरों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली दालों में शामिल है। इसे तूर दाल भी कहा जाता है। दाल-चावल से लेकर कई पारंपरिक व्यंजनों में इसका इस्तेमाल होता है।

इसमें प्रोटीन के साथ फाइबर और कई दूसरे पोषक तत्व पाए जाते हैं। रोजाना की संतुलित डाइट में अरहर दाल को शामिल किया जा सकता है।

हालांकि इसकी वास्तविक न्यूट्रिशनल वैल्यू किस्म, गुणवत्ता और पकाने के तरीके के अनुसार बदल सकती है।

6. राजमा भी है प्रोटीन का अच्छा स्रोत

राजमा को अक्सर दालों और फलियों की श्रेणी में शामिल किया जाता है। इसमें प्रोटीन और फाइबर दोनों अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं।

राजमा खाने से भोजन ज्यादा संतोषजनक बन सकता है, लेकिन इसे अच्छी तरह भिगोकर और पूरी तरह पकाकर खाना जरूरी है। अधपका राजमा पाचन संबंधी परेशानी पैदा कर सकता है।

राजमा को चावल के साथ खाना भारतीय भोजन की लोकप्रिय जोड़ियों में से एक है।

7. लोबिया को भी डाइट में करें शामिल

लोबिया भी प्रोटीन और फाइबर प्रदान करने वाली फलियों में शामिल है। इसे सब्जी, करी या सलाद के रूप में डाइट में शामिल किया जा सकता है।

अगर आप शाकाहारी हैं और अलग-अलग स्रोतों से प्रोटीन लेना चाहते हैं तो मूंग, मसूर, उड़द के साथ लोबिया और अन्य फलियों को भी बदल-बदलकर खाना अच्छा विकल्प हो सकता है।

आखिर सबसे ज्यादा प्रोटीन किसमें?

बताई गई अनुमानित मात्रा के हिसाब से उड़द दाल में करीब 25 ग्राम प्रोटीन प्रति 100 ग्राम कच्ची दाल हो सकता है, जबकि मूंग और मसूर में यह मात्रा करीब 24 ग्राम के आसपास बताई जाती है।

लेकिन सिर्फ प्रोटीन की मात्रा देखकर किसी एक दाल को सबसे अच्छा कहना सही नहीं होगा। आपकी जरूरत के हिसाब से अलग-अलग दालों को डाइट में शामिल करना ज्यादा बेहतर तरीका है।

क्या दाल खाने से शरीर को पूरा प्रोटीन मिलता है?

अधिकांश दालों को अकेले संपूर्ण प्रोटीन का स्रोत नहीं माना जाता, क्योंकि इनमें कुछ आवश्यक अमीनो एसिड सीमित मात्रा में हो सकते हैं।

यही वजह है कि दाल को चावल, रोटी, गेहूं या बाजरे जैसे अनाज के साथ खाना पारंपरिक रूप से उपयोगी माना जाता है। दाल-चावल या दाल-रोटी जैसे कॉम्बिनेशन से अलग-अलग अमीनो एसिड का बेहतर संतुलन मिल सकता है।

मसल्स बढ़ाने वालों के लिए कौन सी दाल बेहतर?

मसल्स बनाने के लिए केवल एक खास दाल पर निर्भर रहने के बजाय पूरे दिन की कुल प्रोटीन जरूरत पूरी करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

मूंग, मसूर, उड़द, चना और अन्य फलियों के साथ दूध-दही, सोया, पनीर, नट्स और सीड्स जैसे दूसरे प्रोटीन स्रोत भी डाइट में शामिल किए जा सकते हैं।

अगर आप नियमित एक्सरसाइज या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करते हैं तो आपकी प्रोटीन जरूरत सामान्य व्यक्ति से अलग हो सकती है।

वजन कम करने वालों के लिए कौन सी दाल अच्छी?

दालों में प्रोटीन और फाइबर दोनों पाए जाते हैं। ये दोनों पोषक तत्व भोजन को ज्यादा संतोषजनक बनाने में मदद कर सकते हैं।

मूंग, मसूर और चना दाल को संतुलित डाइट में शामिल किया जा सकता है। लेकिन वजन घटाने के लिए केवल किसी एक दाल को खाने से फायदा नहीं होगा। कुल कैलोरी, भोजन की गुणवत्ता, पर्याप्त प्रोटीन, फाइबर और रोजाना की शारीरिक गतिविधि पर ध्यान देना जरूरी है।

दाल भिगोने से क्या प्रोटीन बढ़ जाता है?

नहीं। दाल को भिगोने से उसमें प्रोटीन की वास्तविक मात्रा बढ़ नहीं जाती। हालांकि भिगोने से दाल जल्दी पक सकती है और कुछ लोगों के लिए इसे पचाना आसान हो सकता है।

दाल को सही तरीके से भिगोना, धोना और अच्छी तरह पकाना पाचन और भोजन की गुणवत्ता के लिए उपयोगी हो सकता है।

रोज कितनी दाल खानी चाहिए?

हर व्यक्ति के लिए दाल की एक ही मात्रा तय नहीं की जा सकती। उम्र, शरीर का वजन, शारीरिक गतिविधि और पूरी डाइट के आधार पर प्रोटीन की जरूरत बदलती रहती है।

कई लोगों के लिए रोजाना एक से दो कप पकी हुई दाल उनकी कुल प्रोटीन जरूरत में अच्छा योगदान दे सकती है, लेकिन इसे व्यक्तिगत जरूरत के हिसाब से तय करना बेहतर है।

निष्कर्ष

दाल सिर्फ भारतीय भोजन का स्वाद बढ़ाने वाली चीज नहीं है, बल्कि यह प्रोटीन, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत भी हो सकती है। उड़द में प्रोटीन की मात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकती है, जबकि मूंग और मसूर जैसी दालें भी प्रोटीन के साथ आसानी से डाइट में शामिल की जा सकती हैं।

सबसे अच्छा तरीका यही है कि रोज एक ही दाल पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग दालों और फलियों को अपनी डाइट में शामिल करें। साथ ही अनाज और दूसरे प्रोटीन स्रोतों के साथ संतुलित भोजन लें।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य पोषण संबंधी जानकारी पर आधारित है। दालों में पोषक तत्वों की मात्रा उनकी किस्म, गुणवत्ता, कच्ची या पकी अवस्था और पकाने के तरीके के अनुसार बदल सकती है। अपनी व्यक्तिगत प्रोटीन जरूरत या किसी विशेष स्वास्थ्य स्थिति के लिए डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन की सलाह लें।

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