
आगरा: सोशल मीडिया पर प्रकाशित होने वाले कंटेंट और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर आगरा में एक मामला सामने आया था। यहां एक महिला ने आरोप लगाया कि उनके बच्चे इंस्टाग्राम पर एक महिला इन्फ्लुएंसर की ऐसी रील्स देख रहे थे, जिनमें कथित तौर पर दोहरे अर्थ वाले संवाद और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया था। बच्चों को इस तरह का कंटेंट देखते हुए देखकर महिला ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई।
बच्चों के मोबाइल पर रील्स देखते समय हुआ ध्यान
मिली जानकारी के अनुसार, यह मामला जनवरी 2026 का है। शिकायतकर्ता महिला ने बताया कि 5 जनवरी को उनके बच्चे मोबाइल पर सोशल मीडिया पर सामग्री देख रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर एक इंस्टाग्राम अकाउंट पर पड़ी, जिस पर प्रकाशित कुछ रील्स को लेकर उन्होंने आपत्ति जताई।
महिला का आरोप था कि इन रील्स में इस्तेमाल किए गए संवाद और इशारे बच्चों के लिए उचित नहीं थे। उन्होंने बच्चों को मोबाइल पर ऐसी सामग्री देखने से रोका और इस मामले में शिकायत करने का फैसला किया।
करीब तीन लाख फॉलोअर्स वाले अकाउंट पर लगाए आरोप
शिकायत में जिस इंस्टाग्राम अकाउंट का उल्लेख किया गया, उसके लगभग तीन लाख फॉलोअर्स होने का दावा किया गया था। महिला ने चिंता जताई कि बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच रखने वाले अकाउंट पर प्रकाशित सामग्री का बच्चों और किशोरों पर भी असर पड़ सकता है।
उन्होंने संबंधित अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई करने और आपत्तिजनक सामग्री पर रोक लगाने की मांग की।
साइबर थाने में दी गई शिकायत
प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, महिला ने आगरा के साइबर थाने में लिखित शिकायत दी थी। पुलिस की ओर से शिकायत के आधार पर मामले की जांच किए जाने की जानकारी दी गई थी। जांच में सामग्री की प्रकृति और संभावित नियम उल्लंघन की पड़ताल की जानी थी।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं होता कि जांच के बाद क्या कार्रवाई हुई या संबंधित अकाउंट के खिलाफ कोई अंतिम कानूनी निर्णय लिया गया।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
यह मामला बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर अभिभावकों की चिंता को सामने लाता है। सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की सामग्री आसानी से उपलब्ध होती है, इसलिए बच्चों की उम्र के अनुसार कंटेंट फिल्टर और पैरेंटल कंट्रोल जैसे विकल्प उपयोगी हो सकते हैं।
अभिभावक बच्चों के साथ ऑनलाइन सुरक्षा पर खुलकर बात कर सकते हैं और उन्हें समझा सकते हैं कि इंटरनेट पर दिखाई देने वाली हर सामग्री उनके लिए उपयुक्त नहीं होती। वहीं, कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भी जिम्मेदारी है कि वे नियमों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करें और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों को गंभीरता से लें।
अस्वीकरण: यह खबर उपलब्ध प्रकाशित जानकारी और शिकायत में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।



