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नागरासू गुरुद्वारा विवाद: चार निहंगों की गिरफ्तारी के बाद रुद्रप्रयाग में बढ़ा तनाव, पुलिस-प्रशासन अलर्ट

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के नागरासू स्थित गुरुद्वारे में हथियारबंद निहंग सिखों और प्रशासन के बीच पैदा हुआ गतिरोध पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। चार निहंग सदस्यों की गिरफ्तारी के विरोध में शुरू हुआ यह विवाद देखते ही देखते ऐसे तनावपूर्ण घटनाक्रम में बदल गया, जिसने पुलिस, जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मोड में ला दिया। स्थिति इतनी संवेदनशील हो गई कि इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सेना की भी मौजूदगी दर्ज की गई।

नागरासू गुरुद्वारा विवाद: चार निहंगों की गिरफ्तारी के बाद रुद्रप्रयाग में बढ़ा तनाव, पुलिस-प्रशासन अलर्ट

इस पूरे घटनाक्रम की जड़ 16 जून 2026 को चमोली जिले के कर्णप्रयाग में हुई एक झड़प को माना जा रहा है। बताया गया कि पार्किंग को लेकर निहंग सिखों और स्थानीय लोगों के बीच विवाद हुआ था, जो बाद में हिंसक रूप ले बैठा। आरोप है कि इस दौरान तलवारों का इस्तेमाल किया गया, जिसमें करीब चार स्थानीय लोग घायल हुए जबकि एक निहंग भी चोटिल हुआ। घटना के बाद पुलिस ने पंजाब के मोहाली निवासी चार निहंग सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। यही गिरफ्तारी आगे चलकर नागरासू गुरुद्वारा विवाद की मुख्य वजह बनी।

A tense standoff is ongoing at a gurdwara in Nagrasu, Rudraprayag district after a group of armed Nihang Sikhs entered the premises and refused to leave, leading to a major security response including police deployment and Indian Army involvement.

What triggered…

— Being Political June 23, 2026

21 जून 2026 की शाम को लगभग चार से दस निहंग सिख नागरासू गुरुद्वारे पहुंचे। बताया गया कि वे हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग पर थे और उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधन से बड़ी संख्या में आने वाले समर्थकों के लिए 50 से 60 कमरों की व्यवस्था तथा विरोध प्रदर्शन के लिए स्थान उपलब्ध कराने की मांग की। जब उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो हालात अचानक बिगड़ गए।

आरोप है कि निहंगों ने गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल और छत की ओर जाने वाले हिस्से पर कब्जा कर लिया। उन्होंने तीसरी मंजिल तक पहुंचने वाले रास्ते को बंद कर दिया और परिसर के कुछ हिस्सों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया। इस दौरान वे तलवार, भाले, किरपान और कुल्हाड़ियों जैसे पारंपरिक हथियारों से लैस थे। घटनास्थल से सामने आई जानकारी के अनुसार, गुरुद्वारे के एक बुजुर्ग सेवादार को छत पर बंधक बनाए जाने की भी खबरें सामने आईं, जिससे स्थिति और अधिक गंभीर हो गई।

रुद्रप्रयाग पुलिस के अनुसार, निहंग समूह चार गिरफ्तार साथियों की रिहाई की मांग कर रहा था। अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन और पुलिस लगातार बातचीत के माध्यम से विवाद सुलझाने की कोशिश में जुटे रहे। रुद्रप्रयाग की पुलिस अधीक्षक निहारिका तोमर ने कहा कि पुलिस, जिला प्रशासन और गुरुद्वारा प्रबंधन समिति निहंग सिखों के साथ लगातार संवाद कर रही है। उन्होंने बताया कि बातचीत के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और एक निहंग छत से नीचे उतरकर प्रशासन के साथ चर्चा के लिए तैयार हुआ, जबकि बाकी लोगों से भी वार्ता जारी रही।

They are openly challenging the police now

Bula lo jitni force bulani hai https://t.co/fty0MWyASN pic.twitter.com/cJMIla08VD

— Panther🇮🇳 June 23, 2026

जिला मजिस्ट्रेट विशाल मिश्रा द्वारा जारी बयान में कहा गया कि निहंगों ने तीसरी मंजिल की ओर जाने वाले हिस्से को बंद कर रखा था, जहां एक बुजुर्ग सिख व्यक्ति मौजूद था। वहीं गुरुद्वारा प्रबंधन समिति ने दावा किया कि निहंगों ने अपने समर्थकों के लिए बड़ी संख्या में कमरों की मांग की थी ताकि गिरफ्तार सदस्यों के समर्थन में प्रदर्शन आयोजित किया जा सके।

#WATCH | Rudraprayag, Uttarakhand | Rudraprayag DM Vishal Mishra says, “In the context of the incident that took place in Nagrasu, I would like to tell that there was a dispute inside the Gurudwara itself and to monitor this dispute, to maintain peace and order, the police and… pic.twitter.com/MfvE4fp1WN

— ANI UP/Uttarakhand June 22, 2026

हालांकि प्रशासन ने कुछ मीडिया रिपोर्टों में सामने आए दावों का खंडन भी किया। जिला मजिस्ट्रेट विशाल मिश्रा ने कहा कि गुरुद्वारे पर किसी प्रकार का कब्जा नहीं किया गया है और न ही किसी व्यक्ति को बंधक बनाए जाने की पुष्टि हुई है। उनके अनुसार गुरुद्वारे में अरदास, लंगर और धार्मिक गतिविधियां सामान्य रूप से जारी हैं तथा श्रद्धालुओं की आवाजाही भी प्रभावित नहीं हुई है। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की और कहा कि स्थिति पूरी तरह शांतिपूर्ण है।

घटना के दौरान कानूनव्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने रुद्रप्रयाग जिले के कुछ हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं भी अस्थायी रूप से निलंबित कर दी थीं। बाद में लगभग 12 घंटे के बाद सेवाएं बहाल कर दी गईं। बताया गया कि उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद कानूनव्यवस्था के मद्देनजर इंटरनेट बंद किए जाने का यह केवल तीसरा मामला था। करीब 40 घंटे से अधिक समय तक चले इस गतिरोध के दौरान पूरे क्षेत्र में तनाव बना रहा। अलगअलग रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि कुछ लोगों को बातचीत के बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि कुछ निहंग अभी भी परिसर में मौजूद थे। प्रशासन ने पूरे मामले को कानूनव्यवस्था से जुड़ा विषय बताते हुए बल प्रयोग के बजाय बातचीत और शांतिपूर्ण समाधान की रणनीति अपनाई।

नागरासू गुरुद्वारा विवाद इसलिए भी बेहद संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि इसमें एक धार्मिक स्थल, हथियारबंद समूह, कथित बंधक संकट और चारधाम यात्रा मार्ग जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक क्षेत्र का नाम जुड़ा हुआ है। कर्णप्रयाग में हुई हिंसक झड़प से शुरू हुआ यह विवाद अब प्रशासन, पुलिस और धार्मिक संस्थाओं के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बातचीत के जरिए इस तनावपूर्ण स्थिति का स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान कैसे निकाला जाता है।

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