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Narad Jayanti 2026: नारद जयंती 2026 कब है? जानिए हिंदूओं में इस दिन का क्या है महत्व

Satya Report: Narad Jayanti 2026: हिंदू धर्म में नारद जयंती का विशेष महत्व माना जाता है। नारद जयंती ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाई जाती है। यह दिन देवर्षि नारद के जन्म से जुड़ा है, जिन्हें ज्ञान, भक्ति और देवताओं के संदेशवाहक के रूप में जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और नारद जी की पूजा करने से जीवन में सुखसमृद्धि आती है और मनोकामनाएं पूरी होने का आशीष मिलता है। इस दिन पूजा पाठ, दान पुण्य और विष्णु आराधना का विशेष महत्व माना गया है। जानिए साल 2026 में यह पर्व कब मनाया जाएगा और इसका महत्व क्या है। 

Narad Jayanti 2026: नारद जयंती 2026 कब है? जानिए हिंदूओं में इस दिन का क्या है महत्व
Narad Jayanti 2026: नारद जयंती 2026 कब है? जानिए हिंदूओं में इस दिन का क्या है महत्व

कब है नारद जयंती 2026

पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि 2 मई 2026 को रात 12 बजकर 51 मिनट से शुरू होगी और 3 मई को रात 3 बजकर 2 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 3 मई को नारद जयंती मनाना शुभ और शास्त्रसम्मत माना गया है। इस दिन शुभ मुहूर्त में पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

क्या है नारद जयंती का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नारद जी ब्रह्मा जी के मानस पुत्र हैं और उन्हें सृष्टि का पहला पत्रकार भी कहा जाता है। वे तीनों लोकों में भ्रमण कर देवताओं और मनुष्यों के बीच संदेश पहुंचाते थे। नारद जी भगवान विष्णु के परम भक्त माने जाते हैं और वे निरंतर नारायणनारायण का जाप करते रहते हैं। मान्यता है कि नारद जी भक्तों की प्रार्थनाएं भगवान तक पहुंचाते हैं। इस दिन उनकी पूजा करने से ज्ञान, बुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। साथ ही भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करने से जीवन में सुख समृद्धि और शांति बनी रहती है। यह दिन भक्ति और सेवा का संदेश भी देता है।

दानपुण्य करना होता है शुभ

नारद जयंती के दिन दानपुण्य करना अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराना, जरूरतमंद लोगों की सहायता करना और धर्म कार्यों में भाग लेना विशेष फलदायी होता है। मान्यता है कि इससे व्यक्ति के जीवन में शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं और कष्ट दूर होते हैं।

नारद जयंती पूजा विधि

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थान की सफाई कर गंगाजल का छिड़काव करें। सबसे पहले भगवान विष्णु की पूजा करें और उन्हें फूल, चंदन और फल अर्पित करें। धूप दीप जलाकर आरती करें और पंचामृत में तुलसी डालकर भोग लगाएं। इसके बाद नारद जी की विधिविधान से पूजा करें। मान्यता है कि इस दिन बांसुरी अर्पित करना भी शुभ होता है।

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