
लखनऊ, अमृत विचार। वीवर्स एंड हस्तकला डेवलपमेंट फाउंडेशन की ओर से रविवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में नेशनल सिल्क एक्सपो शुरू हुआ। 6 अगस्त तक चलने वाले इस एक्सपो में देश भर के 150 से अधिक बुनकर और हस्तशिल्प कारीगर अपने उत्कृष्ट उत्पादों के साथ शामिल हो रहे हैं।
एक्सपो में त्रिकला हस्ती, आंध्र प्रदेश के मोहन हैंडमेड कलर से तैयार साडियां लेकर आये हैं। इनमें किसी भी तरह का केमिकल इस्तेमाल नहीं हुआ है। मंगल गिरि सिल्क साड़ी पर नर्तकों की तस्वीरें उकेरी गई हैं। इसका दाम 25 हजार रुपये सुनकर आश्चर्य हो सकता है लेकिन साड़ी पर उकेरे गये राधाकृष्ण मन को मोहते हुए दिखाई देंगे।
बनारसी साड़ियों के साथ आये शाहिद तमाम साड़ियां सामने रख देते हैं। वो बताते हैं कि इनमें कई ऐसी हैं जो दोनों तरफ से पहनी जा सकती हैं। बनारसी साड़ियों की खासियत है कि दूसरी तरफ से देखने पर उसमें धागे में कहीं भी कोई गांठ नहीं दिखाई देती है।
पंजाब का फुलकारी वर्क और गुजरात का शीशे का काम भी देखने लायक है। कश्मीर के श्रीनगर से आये बिलाल पोजीशन वर्क दिखाते हैं। साड़ी पर पूरी बारात उकेरी गई है। इसमें दूल्हा दुल्हन से लेकर बाराती तक दिखाई देते हैं। पश्मीना शाल भी वो दिखाते हैं। देखने में वो बारीक कपड़ा लगती है लेकिन बताते हैं कि यह बहुत गर्म होती है।
प्रदर्शनी में बनारसी सिल्क, कांजीवरम, भागलपुरी सिल्क, पैठणी, महेश्वरी, चंदेरी, तसर, मूंगा, क्रेप, जॉर्जेट और उपाड़ा जैसी प्रसिद्ध सिल्क साड़ियों का विशाल संग्रह है। इसके अलावा सूट, हैंडलूम उत्पाद, बैग एवं अन्य एथनिक एक्सेसरीज़ भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। रक्षाबंधन और आगामी त्योहारों को देखते हुए विशेष डिजाइनों का कलेक्शन है।
वीवर्स एंड हस्तकला डेवलपमेंट फाउंडेशन के सचिव जयस कुमार गुप्ता ने कहा कि नेशनल सिल्क एक्सपो का उद्देश्य देश के बुनकरों और हस्तशिल्प कारीगरों को सीधे ग्राहकों से जोड़ना तथा भारतीय हस्तकरघा और पारंपरिक बुनाई को बढ़ावा देना है।
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