
कुदरत अपने अंदर ऐसे कई रहस्य समेटे हुए है, जिन्हें देखकर पहली नजर में यकीन करना मुश्किल हो जाता है। कुछ ऐसा ही हैरान करने वाला नजारा मॉन्टेनेग्रो के डिनोसा गांव में देखने को मिलता है। यहां एक करीब 100 से 150 साल पुराने शहतूत के पेड़ के तने से तेज बारिश के बाद पानी फव्वारे की तरह बाहर निकलने लगता है।
पहली नजर में ऐसा लगता है जैसे पेड़ के अंदर ही कोई पानी का स्रोत मौजूद हो, लेकिन इसके पीछे की वजह किसी जादू से नहीं बल्कि जमीन के नीचे होने वाली प्राकृतिक जल प्रक्रिया से जुड़ी है।
बारिश होते ही पेड़ से निकलने लगता है पानी
डिनोसा गांव में मौजूद यह पुराना शहतूत का पेड़ सामान्य दिनों में बिल्कुल आम पेड़ की तरह दिखाई देता है। लेकिन जब इलाके में भारी बारिश होती है, तो इसके तने के अंदर बने एक बड़े छेद से तेज धार के साथ पानी बाहर निकलने लगता है।
पानी का बहाव इतना तेज होता है कि यह नजारा किसी प्राकृतिक फव्वारे जैसा दिखाई देता है। आसपास की जमीन पर भी पानी जमा होने लगता है और कई जगहों से पानी बहता हुआ नजर आता है।
जमीन के नीचे छिपा है पूरा रहस्य
इस अनोखी घटना का संबंध इलाके के भूमिगत जलस्रोतों से बताया जाता है। भारी बारिश के दौरान जमीन के नीचे पानी की मात्रा अचानक बढ़ जाती है। इससे भूमिगत जल पर दबाव बढ़ने लगता है।
जब पानी को बाहर निकलने का प्राकृतिक रास्ता मिलता है, तो वह दबाव के कारण ऊपर की ओर बढ़ता है। इस पेड़ का पुराना और खोखला तना उस पानी के लिए एक प्राकृतिक रास्ते की तरह काम करता है।
पेड़ के तने में मौजूद दरारों और अंदर की खाली जगह से पानी ऊपर पहुंचता है और फिर तने में बने बड़े छेद से बाहर निकलने लगता है। यही वजह है कि ऐसा लगता है जैसे पेड़ खुद पानी का फव्वारा छोड़ रहा हो।
20 से 25 साल से देखा जा रहा है ये नजारा
स्थानीय लोगों के मुताबिक, बारिश के दौरान पेड़ से पानी निकलने की यह घटना पिछले करीब 20 से 25 सालों से देखी जा रही है। भारी बारिश के दौरान जब भूमिगत जलस्रोतों पर दबाव बढ़ता है, तब यह प्राकृतिक घटना दोबारा दिखाई देती है।
जानकारों के अनुसार, पेड़ की उम्र करीब 100 से 150 साल के बीच हो सकती है। इतने पुराने पेड़ का खोखला तना और उसके नीचे मौजूद जलस्रोत इस अनोखी प्राकृतिक प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाते हैं।
एस्टोनिया में भी दिखता है ऐसा ही प्राकृतिक चमत्कार
दुनिया में ऐसी प्राकृतिक घटनाएं सिर्फ मॉन्टेनेग्रो तक सीमित नहीं हैं। यूरोप के एस्टोनिया के तुहाला गांव में भी बारिश के दौरान एक ऐसा ही अनोखा नजारा देखने को मिलता है।
यहां एक कुआं भूमिगत नदी के ऊपर बना हुआ है। जब भारी बारिश के कारण जमीन के नीचे बहने वाली नदी में पानी बढ़ता है, तो दबाव बढ़ने के कारण कुएं से पानी ऊपर की ओर निकलने लगता है।
कई बार पानी कुएं के मुहाने से करीब आधा मीटर तक ऊपर उठ जाता है और तेज धार के साथ बाहर आता है। स्थानीय लोग इसे ‘विचेस वेल’ यानी चुड़ैल का कुआं कहते हैं।
लोककथा भी है इससे जुड़ी
तुहाला के इस कुएं को लेकर स्थानीय लोगों के बीच एक दिलचस्प लोककथा भी प्रचलित है। मान्यता है कि गांव की चुड़ैलें जमीन के नीचे बने सौना में इकट्ठा होती हैं और जब वे एक-दूसरे को बर्च की झाड़ियों से मारती हैं, तो उनके गुस्से के कारण जमीन के अंदर से पानी बाहर निकलने लगता है।
हालांकि वैज्ञानिक नजरिए से देखा जाए तो इसके पीछे भूमिगत जल और बढ़ते जल दबाव की प्राकृतिक प्रक्रिया मानी जाती है।
मॉन्टेनेग्रो का शहतूत का पेड़ भी इसी तरह कुदरत की उस अनोखी ताकत की मिसाल है, जहां भारी बारिश, भूमिगत जल और पेड़ की प्राकृतिक संरचना मिलकर ऐसा नजारा पैदा करते हैं, जिसे देखकर कोई भी पहली बार हैरान रह जाए।



