
नीब करौरी बाबा एक आध्यात्मिक संत थे और वह हनुमान जी को अपना आराध्य मानते थे। साथ ही लोग बाबा को हनुमान की का अवतार तक बताते हैं। वहीं बाबा के भक्तों में देश- विदेश के तमाम दिग्गज शामिल हैं। जिनमें एपल के सीईओ स्टीव जॉब्स से लेकर हॉलीवुड की दिग्गज एक्ट्रेस जूलिया रॉबर्ट्स तक शामिल हैं। नीम करोली बाबा ने अपने जीवनकाल में करीब 108 हनुमान मंदिरों का निर्माण कराया लेकिन उत्तराखंड के नैनीताल के पास स्थित कैंची धाम आज भी उनके नाम से जुड़े प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों में शामिल है। नीम करोली बाबा भले ही दुनिया में न हों, लेकिन उनके आश्रम कैंची धाम में अब भी भक्तों-श्रद्धालुओं का वैसा ही मजमा लगता है। बताया जाता है कि कैंची धाम की स्थापना बाबा ने साल 1964 में की थी।
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किसी से पैर नहीं छुलवाते थे
बताया जाता है नीब करौरी बाबा किसी से अपना पैर नहीं छुलवाते थे, जो कोई भी भक्त बाबा के पैर छूने के लिए आगे बढ़ता था वो उसको रोक देते थे। वो कहते थे कि मेरी जगह हनुमान जी का पैर छुओ…वही कल्याण करेंगे।
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स्टीव जॉब्स भी जा चुके हैं कैंची धाम
एप्पल के पूर्व सीईओ स्टीव जॉब्स 1973 में भारत की यात्रा पर आए थे। साथ ही वह कैंची धाम नीम करोली बाबा के दर्शन करने पहुंचे थे, लेकिन बाबा देहांत हो चुका था। बताया जाता है स्टीव जॉब्स कुछ दिन आश्रम में रुके और ध्यान- योग किया।
कैसे प्रसिद्ध हुआ कैंची धाम?
नीब करौरी बाबा का नाम सबसे ज्यादा उत्तराखंड के कैंची धाम से जुड़ा है। नैनीताल-अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित यह आश्रम नैनीताल से करीब 17 किलोमीटर दूर है। कैंची धाम में हनुमान मंदिर की स्थापना बाबा से जुड़ी है और 15 जून को यहां स्थापना दिवस के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
नीब करोरी बाबा क्यों कहा जाता है?
बाबा का बचपन का नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा रखा गया है। वहीं लक्ष्मी नारायण बड़े हुए तो गृहस्थ छोड़कर साधु बन गए। वहीं घर त्यागने के बाद वह उत्तर प्रदेश के ही फर्रुखाबाद जिले में ‘नीब करोरी’गांव पहुंचे। साथ ही फिर एक गुफा में कठिन तपस्या करने लगे थे। इसी गांव के नाम पर भक्त उन्हें नीब करोरी बाबा कहकर पुकारने लगे।
जानिए कौन थे नीब करौरी बाबा
नीब करौरी बाबा का मूल नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा था। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में हुआ था। नीब करौरी महाराज के पिता का नाम श्री दुर्गा प्रसाद शर्मा था। साथ ही बाबा के बचपन का नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था और बताया जाता। बाबा की प्रारंभिक शिक्षा अकबरपुर गांव में ही हुई थी। बाद में वे आध्यात्म की तरफ मुड़ गए। वहीं नीम करोली की मृत्यु 11 सितंबर 1973 को हुई थी। इस दिन बाबा की पुण्य तिथि मनाई जाती है।


