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न कंपनी, न कारोबार! पंचर दुकानदार के नाम पर 28 करोड़ का जीएसटी बकाया? परिवार ने CM योगी से लगाई न्याय की गुहार

GST Fraud Gorakhpur Case: गोरखपुर में करोड़ों रुपये की कथित जीएसटी चोरी के मामले में एक ऐसा नाम सामने आया है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। जिस व्यक्ति के नाम पर 28 करोड़ रुपये का जीएसटी बकाया दिखाया जा रहा है, वह पेशे से पंचर बनाने का काम करता है। सवाल यह है कि आखिर एक पंचर बनाने वाले के नाम पर करोड़ों के कारोबार वाली फर्जी कंपनी किसने बनाई और अब इस पूरे मामले में वह न्याय के लिए दरदर क्यों भटक रहा है। पढ़िए हमारी यह विशेष रिपोर्ट

न कंपनी, न कारोबार! पंचर दुकानदार के नाम पर 28 करोड़ का जीएसटी बकाया? परिवार ने CM योगी से लगाई न्याय की गुहार
न कंपनी, न कारोबार! पंचर दुकानदार के नाम पर 28 करोड़ का जीएसटी बकाया? परिवार ने CM योगी से लगाई न्याय की गुहार

पंचर बनाने का काम करते है राज प्रजापति

यह मामला चौरीचौरा तहसील क्षेत्र के रहने वाले राज प्रजापति का है। पिता की तरह इन्होंने भी मेहनतमजदूरी और पंचर बनाने का काम चुना। साइकिल, मोटरसाइकिल और ट्रकों के पहियों का पंचर बनाकर परिवार का पेट पालने वाले राज की जिंदगी उस समय बदल गई जब जीएसटी विभाग का नोटिस उनके घर पहुंचा।

28 करोड़ रुपये के जीएसटी बकाये का दावा

जीएसटी विभाग का नोटिस के अनुसार उन पर 28 करोड़ रुपये के जीएसटी बकाये का दावा किया गया है। राज के मुताबिक उन्होंने कभी कोई कंपनी बनाई ही नहीं, फिर करोड़ों के कारोबार का सवाल ही नहीं उठता।

राज का कहना है कि वह बनारस जाकर जीएसटी अधिकारियों के सामने भी पेश हुए और अपनी बात रखी। उनका दावा है कि अधिकारियों ने उन्हें बताया कि यदि उनके नाम का दुरुपयोग हुआ है तो पहले पुलिस में मुकदमा दर्ज कराइए।

शिकायत के बाद भी नही हुई कोई प्रभावी कार्रवाई

जीएसटी अधिकारियों की सलाह पर वह एम्स थाने पहुंचे। लेकिन राज का आरोप है कि उनकी शिकायत पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। दूसरी ओर थाना प्रभारी का कहना है कि इस नाम का कोई व्यक्ति उनके पास शिकायत लेकर आया ही नहीं।

जब हमारी टीम ने राज से मुलाकात की तो उन्होंने जनसुनवाई की पर्चियां दिखाईं। उनका आरोप है कि कुछ लोगों ने उन्हें मामले से नाम हटवाने का भरोसा देकर आर्थिक शोषण भी किया। इतना ही नहीं, राज का दावा है कि उन्हें कुछ दिनों के लिए घर छोड़ देने तक की सलाह दी गई। डर और अनिश्चितता के बीच अब राज अपने घर से दूर रिश्तेदारों के यहां रहने को मजबूर हैं।

नेटवर्क के जिम्मेदार लोग कौन हैं?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि वास्तव में किसी ने राज प्रजापति के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बनाई और करोड़ों का कारोबार दिखाया, तो उस नेटवर्क के जिम्मेदार लोग कौन हैं? और यदि राज निर्दोष हैं तो उन्हें राहत कब मिलेगी? इस मामले में जांच एजेंसियों और पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।

सीएम योगी को देंगे मामले की जानकारी

राज प्रजापति के मौसेरे भाई राजन प्रजापति, जो टेराकोटा कला के लिए प्राप्त कर चुके हैं, का कहना है कि वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर दौरे के दौरान उनसे मिलकर पूरे मामले की जानकारी देंगे और अपने भाई के लिए न्याय की मांग करेंगे।

आखिर कब मिलेगा इंसाफ

अब देखना यह होगा कि करोड़ों रुपये के इस कथित फर्जीवाड़े की जांच किस दिशा में जाती है और एक गरीब पंचर बनाने वाले को आखिर कब इंसाफ मिलता है। एक तरफ करोड़ों के फर्जी कारोबार का आरोप और दूसरी तरफ खुद को निर्दोष बताने वाला एक गरीब पंचर मिस्त्री। सच क्या है, यह जांच के बाद ही सामने आएगा। लेकिन फिलहाल राज प्रजापति का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब उन्होंने कोई कंपनी बनाई ही नहीं, तो आखिर 28 करोड़ रुपये का बोझ उनके सिर पर कैसे आ गया।

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