Greater Noida News: ग्रेटर नोएडा में अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर और जिम ट्रेनर जितेंद्र मान की हत्या के करीब 8 साल बाद अदालत ने मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. जिला न्यायालय ने बुलंदशहर निवासी इमरान और नफीस को हत्या की साजिश में शामिल होने और वारदात में सहयोग करने का दोषी माना है. अदालत ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. साथ ही दोनों पर 2020 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है. जुर्माना नहीं भरने पर उन्हें अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.

जनवरी 2018 में फ्लैट में मिली थी जितेंद्र की लाश
मामला जनवरी 2018 का है. ग्रेटर नोएडा के जीटा1 स्थित एविजे हाइट्स सोसायटी के H606 फ्लैट में अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर जितेंद्र मान रहते थे. वह बॉक्सिंग में जूनियर टीम के नेशनल चैंपियन रह चुके थे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुके थे. इसके अलावा वह ग्रेटर नोएडा में जिम ट्रेनर के तौर पर काम करते थे.
10 जनवरी 2018 को जितेंद्र जिम के लिए निकले थे, लेकिन इसके बाद उनका मोबाइल फोन बंद हो गया और वह जिम नहीं पहुंचे. परिवार और परिचितों को जब उनकी चिंता हुई तो उन्होंने उनसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली. 12 जनवरी को परिजन जितेंद्र के फ्लैट पर पहुंचे. वहां अंदर उनका शव मिला. इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई. सूरजपुर थाना पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू की.
CCTV और मोबाइल लोकेशन से खुलती गई कहानी
हत्या की जांच के दौरान पुलिस ने सोसायटी में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली. फुटेज में एक महिला जितेंद्र के फ्लैट में जाती और बाद में बाहर निकलती दिखाई दी. पुलिस ने उसकी पहचान सृष्टि गुप्ता के रूप में की. जांच आगे बढ़ी तो इमरान और नफीस की भूमिका भी सामने आई. इसके बाद पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार किया था. अभियोजन के मुताबिक, जितेंद्र और सृष्टि गुप्ता के बीच संबंध थे. इसी बात को लेकर इमरान नाराज था. इसी विवाद को हत्या की साजिश की वजह बताया गया.
जांच में मोबाइल लोकेशन से जुड़े तथ्य भी सामने आए. अभियोजन ने अदालत को बताया कि वारदात के बाद जांच को प्रभावित करने के लिए मोबाइल की लोकेशन बदलने की कोशिश की गई थी. फोन को लोनी ले जाने की बात भी जांच में सामने आई थी.
खुद गोली नहीं चलाई, फिर भी हत्या की साजिश में दोषी
मामले की सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि इमरान और नफीस ने खुद जितेंद्र पर गोली नहीं चलाई थी. इसके बावजूद अदालत ने दोनों की भूमिका को गंभीर माना. अदालत के सामने अभियोजन ने उनकी हत्या की साजिश में भूमिका और वारदात को अंजाम देने में सहयोग से जुड़े साक्ष्य रखे. अभियोजन की ओर से मामले में कुल 18 गवाह पेश किए गए. इसके अलावा CCTV फुटेज, मोबाइल लोकेशन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक व भौतिक साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा गया. अदालत ने पेश किए गए साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद इमरान और नफीस को हत्या की साजिश में शामिल होने और वारदात में सहयोग करने का दोषी माना.
अदालत ने सुनाई उम्रकैद की सजा
दोषी ठहराए जाने के बाद अदालत ने इमरान और नफीस को उम्रकैद की सजा सुनाई. दोनों पर 2020 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है. जुर्माना जमा नहीं करने पर दोनों को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा. अदालत ने यह भी कहा कि यह मामला हत्या के लिए निर्धारित दुर्लभतम श्रेणी में नहीं आता. इसलिए उम्रकैद की सजा उचित है.
सृष्टि गुप्ता की सुनवाई अलग
इस मामले में सृष्टि गुप्ता की सुनवाई अलग चल रही है. अदालत की प्रक्रिया में उसकी कार्रवाई अलग किए जाने का उल्लेख है. ऐसे में इमरान और नफीस के खिलाफ मामले में अब फैसला आ चुका है, जबकि सृष्टि से जुड़ी न्यायिक प्रक्रिया अलग जारी है. करीब 8 साल पुराने इस हत्याकांड में अदालत के फैसले के बाद मामले में एक अहम कानूनी पड़ाव आया है. पुलिस जांच में सामने आए CCTV, मोबाइल लोकेशन और अन्य साक्ष्यों के आधार पर इमरान और नफीस को हत्या की साजिश और वारदात में सहयोग के लिए दोषी माना गया है.



