Madhya Pradesh

न सड़क पर जाम, न बारिश से जलजमाव… ड्रोन की तस्वीरों से MP के 35 शहरों का तैयार होगा मास्टर प्लान; सर्वे शुरू

MP Smart City Plan: मध्य प्रदेश में शहरों की प्लानिंग अब पुराने नक्शों और सीमित सैटेलाइट तस्वीरों तक सीमित नहीं रहेगी. राज्य के 35 शहरों में पहली बार ड्रोन और GIS आधारित हाईटेक मॉडल के जरिए मास्टर प्लान तैयार किए जा रहे हैं. नई तकनीक का मकसद शहरों की वास्तविक स्थिति के आधार पर सटीक और आधुनिक प्लानिंग करना है, ताकि भविष्य में सड़कों और ड्रेनेज सिस्टम सहित अन्य निर्माण में कोई बाधा न आए.

न सड़क पर जाम, न बारिश से जलजमाव… ड्रोन की तस्वीरों से MP के 35 शहरों का तैयार होगा मास्टर प्लान; सर्वे शुरू
न सड़क पर जाम, न बारिश से जलजमाव… ड्रोन की तस्वीरों से MP के 35 शहरों का तैयार होगा मास्टर प्लान; सर्वे शुरू

इस प्रक्रिया में सबसे पहले ड्रोन शहर के अलगअलग हिस्सों की बेहद क्लियर तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करेंगे. ड्रोन जमीन के काफी करीब उड़ते हैं, इसलिए वे छोटी गलियों, नालों, मकानों, खाली जमीन और अतिक्रमण तक की जानकारी कैप्चर कर सकते हैं.

इसके बाद हजारों तस्वीरों को जोड़कर शहर का एक 3D डिजिटल मैप तैयार किया जाएगा. इस मैप को GIS सिस्टम में अपलोड किया जाएगा, जहां कंप्यूटर आधारित एनालिसिस के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि कौन सा इलाका रिहायशी है, कहां कमर्शियल गतिविधियां ज्यादा हैं और किन जगहों पर सड़क या ड्रेनेज नेटवर्क की जरूरत है.

पुरानी तकनीक से कितना अलग?

अब तक मास्टर प्लान तैयार करने के लिए मुख्य रूप से सैटेलाइट इमेज और पुराने सर्वे डेटा का उपयोग किया जाता था. कई बार इन आंकड़ों और जमीन की वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर होता था. विशेषज्ञों के मुताबिक, सैटेलाइट आधारित मैपिंग में 100 से 200 मीटर तक की गड़बड़ी सामने आ जाती थी.

नई ड्रोन तकनीक में 3 से 5 सेंटीमीटर तक की सटीक जानकारी मिल सकेगी. यानी किसी गली की चौड़ाई, नाले की दिशा या किसी भूखंड की वास्तविक सीमा तक स्पष्ट रूप से देखी जा सकेगी. इससे प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद बदलाव या विवाद की संभावना कम होगी.

शहरों में विकास कार्य होंगे आसान

ड्रोन और GIS तकनीक की मदद से यह तय करना आसान होगा कि कहां सड़क चौड़ी की जा सकती है, कहां नए सीवेज नेटवर्क की जरूरत है और किन इलाकों में जलभराव की समस्या ज्यादा रहती है. इससे नगर विकास की योजनाएं ज्यादा व्यावहारिक और प्रभावी बन सकेंगी. साथ ही हरित क्षेत्र, पार्क और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए जमीन चिन्हित करने में भी यह तकनीक मददगार साबित होगी.

जल निकासी की मिलेगी सटीक जानकारी

ड्रोन सर्वे से जमीन की ऊंचाई और ढलान का डेटा भी जुटाया जाएगा. इससे यह समझना आसान होगा कि बारिश का पानी किस दिशा में बहता है और किन क्षेत्रों में पानी भरने की आशंका ज्यादा है. इसी आधार पर ड्रेनेज सिस्टम की वैज्ञानिक प्लानिंग की जा सकेगी.

इन शहरों में शुरू हुआ काम

जानकारी के मुताबिक, सिरोंज में इस नई तकनीक से सर्वे का काम शुरू हो चुका है. इसके अलावा सागर, देवास, सतना, रीवा, विदिशा, छिंदवाड़ा और होशंगाबाद समेत कुल 35 शहर इस परियोजना में शामिल हैं. हालांकि भोपाल, इंदौर और जबलपुर जैसे बड़े शहर फिलहाल इस हाईटेक मॉडल का हिस्सा नहीं होंगे, क्योंकि इन शहरों के मास्टर प्लान का ड्राफ्ट पहले ही तैयार किया जा चुका है.

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ती आबादी और ट्रैफिक को देखते हुए शहरों की प्लानिंग में आधुनिक तकनीक बेहद जरूरी हो गई है. ड्रोन और GIS आधारित यह मॉडल शहरों के विकास को ज्यादा व्यवस्थित, पारदर्शी और भविष्य के मुताबिक बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है.

क्या बोले विशेषज्ञ?

डॉ. केके धोटे ने बताया कि सैटेलाइट डेटा और जमीन की वास्तविक स्थिति में कई बार बड़ा अंतर देखने को मिलता है. ड्रोन तकनीक से बेहद सटीक और हाईरिजोल्यूशन डेटा मिलता है, जिससे सड़क, ड्रेनेज और सीवेज नेटवर्क की बेहतर प्लानिंग संभव हो सकेगी.

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply