
न्यूजीलैंड के मशहूर ट्रैवलर कार्ल रॉक इन दिनों पाकिस्तान की यात्रा पर हैं। पिछले कई महीनों से वह पाकिस्तान के अलग-अलग इलाकों की यात्रा कर रहे हैं और वहां के ऐतिहासिक स्थलों को करीब से देख रहे हैं। इसी दौरान उन्होंने पाकिस्तान में मौजूद कई हिंदू मंदिरों का भी दौरा किया और उनकी मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी साझा की।
कार्ल रॉक ने बताया कि पाकिस्तान में हिंदू विरासत से जुड़े कई महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल मौजूद हैं, लेकिन इनमें से कुछ मंदिर वीरान पड़े हैं, कई जगहों पर इमारतें जर्जर हालत में हैं और कुछ स्थानों पर आम लोगों के जाने पर प्रतिबंध है।
इस्लामाबाद से कटास राज तक पहुंचे
कार्ल के मुताबिक, उन्होंने अब तक इस्लामाबाद के पास स्थित एक राम मंदिर और प्रसिद्ध श्री कटास राज मंदिर के दर्शन किए हैं। इसके अलावा उन्होंने मीरपुर में मंगला डैम के पास स्थित एक प्राचीन मंदिर के बारे में भी जानकारी साझा की।
बताया जाता है कि मंगला डैम के पास मौजूद यह मंदिर साल के ज्यादातर समय पानी में डूबा रहता है। जब डैम का जलस्तर कम होता है, तभी यहां तक पहुंचना संभव हो पाता है।
मंदिरों की स्थिति पर जताई चिंता
कार्ल रॉक के मुताबिक, पाकिस्तान में हिंदू धार्मिक विरासत का इतिहास काफी पुराना और समृद्ध है, लेकिन कई मंदिरों की स्थिति अच्छी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि कुछ मंदिर लंबे समय से वीरान पड़े हैं और कुछ धार्मिक स्थलों की हालत खराब हो चुकी है।
उन्होंने यह भी बताया कि कई जगहों पर सुरक्षा कारणों या स्थानीय प्रतिबंधों की वजह से लोगों को मंदिरों तक जाने की अनुमति नहीं मिलती।
कराची में मंदिर जाने से रोके जाने का दावा
कार्ल ने बताया कि कराची में अरब सागर के किनारे स्थित एक प्राचीन मंदिर में जाने की उनकी इच्छा थी। उनके अनुसार, वहां मौजूद पाकिस्तानी सेना के जवानों ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया और वह उस मंदिर तक नहीं पहुंच सके।
उन्होंने एक प्रसिद्ध काली माता मंदिर तक जाने की भी कोशिश की थी। कार्ल के मुताबिक, पहाड़ खिसकने के कारण रास्ते में बड़े पत्थर आ गए थे, जिसके चलते वहां पहुंचना संभव नहीं हो पाया।
साधु बेला बना यात्रा का खास आकर्षण
कार्ल रॉक की पाकिस्तान यात्रा में सिंध के सुक्कुर स्थित साधु बेला भी खास जगह रहा। यह सिंधु नदी के बीच एक द्वीप पर स्थित हिंदू मंदिर परिसर है। यहां पहुंचने के लिए नाव के जरिए नदी पार करनी पड़ती है।
साधु बेला का इतिहास करीब 200 साल पुराना बताया जाता है। मान्यता के अनुसार, साल 1823 में उदासी संत बाबा बांखंडी महाराज इस स्थान पर आए थे। समय के साथ यहां कई मंदिर और धार्मिक सुविधाएं विकसित हुईं।
परिसर में भगवान शिव, हनुमान जी, भगवान गणेश और माता अन्नपूर्णा से जुड़े मंदिर मौजूद हैं। यहां बगीचे, पुस्तक



