
ओटावा. दुनियाभर में कई ऐसे छोटे शहर और गांव हैं, जहां अब कोई नहीं रहता है. वीरान होने की वजह से इन जगहों को भूतिया शहर (Ghost Town) का दर्जा मिल जाता है. जब भी कोई ऐसी जगहों के बारे में बात करता है, तो दिमाग में टूटती-फूटती इमारतें, धूल से सने फर्श और घास-फूस से घिरी जगह की तस्वीर उभरती है. लेकिन कनाडा में ब्रिटिश कोलंबिया के समंदर किनारे एक ऐसा रहस्यमयी शहर मौजूद है, जो इस सोच को झुठला देता है. हम बात कर रहे हैं कितसॉल्ट की, जहां पिछले 44 सालों से कोई नहीं रहता है. लेकिन इस शहर में चमचमाते मकान, शॉपिंग सेंटर, बैंक, रेस्टोरेंट, अस्पताल और थिएटर सब कुछ मौजूद है. सड़कें एकदम चकाचक हैं, गार्डन की घास कटी हुई है और रात होते ही पूरे शहर की सड़कों पर स्ट्रीट लाइटें अपने आप जगमगाने लगती हैं. लेकिन सवाल यह उठता है कि जब यहां कोई रहता नहीं, तो ये लाइटें रात में आखिर कैसे घरों और सड़कों को रौशन करती हैं?
इसका जवाब देने से पहले हम आपको इस शहर के इतिहास के बारे में बता देते हैं. दरअसल, अमेरिका की एक बड़ी माइनिंग कंपनी ने मोलिब्डेनम नाम की एक धातु के खनन के लिए जंगलों और पहाड़ों के बीच 1979 में इस हाई-टेक शहर को रातों-रात बसाया था. मोलिब्डेनम का इस्तेमाल लोहे और स्टील को मजबूत व जंग-रोधी बनाने के लिए किया जाता है. इसे बसाने के लिए उस दौर में पानी की तरह पैसा बहाया गया. 100 से ज्यादा मकान, 7 बड़े अपार्टमेंट, अस्पताल, स्विमिंग पूल, लाइब्रेरी, केबल टीवी नेटवर्क और सीवेज सिस्टम बनाया गया था. पूरे उत्तर अमेरिका से इंजीनियर और मजदूर भारी सैलरी के लालच में यहां आकर बसे और देखते ही देखते 1,200 से अधिक लोगों से यह शहर गुलजार हो गया था. लेकिन इसकी रौनक ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रह सकीं. पहला परिवार बसने के महज 18 महीने बाद ही मंदी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में मोलिब्डेनम की कीमतें अचानक नीचे गिर गईं.
घाटा इतना बढ़ गया कि खदानों को रातों-रात बंद करना पड़ा. काम बंद होते ही यहां रहने वाले लोग धीरे-धीरे शहर छोड़कर चले गए और साल 1982 तक यह पूरा का पूरा शहर खाली हो गया. जिस शहर को बनाने में करोड़ों रुपए खर्च किए गए थे, वह देखते ही देखते वीरान हो गया. इसके बाद साल 2005 में भारतीय मूल के अमेरिकी अरबपति कृष्णन सुथंतिरन की नजर इस खाली पड़े शहर पर पड़ी. उन्होंने इसे लगभग 58 करोड़ रुपये खरीद लिया. तब से लेकर अब तक वे इस शहर की देखभाल पर लगभग 200 करोड़ से अधिक खर्च कर चुके हैं. उन्होंने इस शहर को साफ-सुथरा और नया बनाए रखने के एक टीम तैनात कर रखी है. यह टीम रोजाना यहां की सड़कों की सफाई करती है, घास काटती है और मकानों के रख-रखाव का ध्यान रखती है. कृष्णन सुथंतिरन का प्लान इस रहस्यमयी शहर को आने वाले समय में लिक्विफाइड नेचुरल गैस उद्योग का एक बड़ा केंद्र बनाकर दोबारा जिंदा करने का है.



