प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुजरात के सोमनाथ अमृत महोत्सव में एक जनसभा को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि आज प्रभास पाटन का पवित्र क्षेत्र एक अद्भुत प्रभा से भरा हुआ है. पीएम मोदी ने कहा कि महादेव का ये साक्षात्कार, ये सौंदर्य, धरती और आसमान से हुई पुष्प वर्षा, वेद मंत्रों का उच्चार इन सबके साथसाथ सागर की लहरों का जयघोष… ऐसा लग रहा है जैसे ये सृष्टि एक साथ बोल रही है जय सोमनाथ, जयजय सोमनाथ.पीएम मोदी ने कहा कि समय खुद जिनकी इच्छा से प्रकट होता है, जो स्वयं कालातीत हैं, जो स्वयं काल स्वरुप हैं, आज उन देवाधिदेव महादेव की विग्रह प्रतिष्ठा के हम 75 वर्ष मना रहे हैं.

पीएम मोदी ने कहा कि ये सृष्टि जिनसे सृजित होती है, जिनमें लय हो जाती है. आज हम उनके धाम के पुनर्निर्माण का उत्सव मना रहे हैं. जो हलाहल पीकर नीलकंठ हो गए, आज उन्हीं की शरण में यहां सोमनाथ अमृत महोत्सव हो रहा है. ये सब भगवान सदाशिव की ही क्रीडा है.
#WATCH | Gir Somnath, Gujarat: Prime Minister Narendra Modi releases a commemorative stamp and coin, commemorating the legacy and spiritual significance of Somnath Temple
— ANI May 11, 2026
‘भारत पर दुनिया की कोई ताकत दबाव नहीं बना सकती’
आज का दिन एक और वजह से भी विशेष है. 11 मई, 1998 यानी आज के ही दिन देश ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था. देश ने 11 मई को पहले 3 परमाणु परीक्षण किए. हमारे वैज्ञानिकों ने भारत के सामर्थ्य को, भारत की क्षमता को दुनिया के सामने रखा. दुनिया में तूफान आ गया कि भारत कौन होता है, उसकी ये हैसियत, जो परमाणु परीक्षण करें.
दुनिया भर की शक्तियां भारत को दबोचने के लिए मैदान में उतरी, अनेक प्रकार के बंधन लग गए, आर्थिक संभावनाओं के सारे रास्ते बंद कर दिए गए. 11 मई के बाद दुनिया हम पर टूट पड़ी थी. लेकिन 13 मई को फिर 2 और परमाणु परीक्षण हुए थे. उससे दुनिया को पता चला था कि भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति कितनी अटल है.
पीएम मोदी ने कहा कि दादा सोमनाथ के अनन्य भक्त के रूप में मैं कितनी बार यहां आया हूं, कितनी ही बार उनके सामने नतमस्तक हुआ हूं. लेकिन आज जब मैं यहां आ रहा था, तो समय की ये यात्रा एक सुखद अनुभूति दे रही थी. अभी कुछ ही महीने पहले मैं यहां आया था, तब हम सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मना रहे थे. प्रथम विध्वंस के 1,000 साल बाद भी सोमनाथ के अविनाशी होने का गर्व और आज इस आधुनिक स्वरूप की प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष, हम केवल 2 आयोजनों का हिस्सा भर नहीं बनें, हमें हजार वर्षों की अमृत यात्रा को अनुभव करने का शिवजी ने मौका दिया है. पीएम मोदी ने कहा कि 75 साल पहले आज के ही दिन सोमनाथ मंदिर की पुनर्स्थापना, ये कोई साधारण अवसर नहीं था. अगर 1947 में भारत आजाद हुआ था. तो, 1951 में सोमनाथ की प्राण प्रतिष्ठा ने भारत की स्वतंत्र चेतना का उद्घोष किया था.
‘लुटेरों ने सोमनाथ मंदिर को मिटाने का प्रयास किया’
जब मैं पिछली बार यहां आया था, तब मैंने कहा था कि जिसके नाम में ही सोम अर्थात अमृत जुड़ा हो, उसे कौन नष्ट कर सकता है. इतिहास के लंबे कालखंड में इस मंदिर ने अनेक आक्रमण झेले. महमूद गजनवी, अलाउद्दीन खिलजी जैसे अनेक आक्रांता आए. लुटेरों ने सोमनाथ मंदिर का वैभव मिटाने का प्रयास किया. वो सोमनाथ को एक भौतिक ढांचा मानकर उससे टकराते रहे. उन्होंने कहा कि बारबार इस मंदिर को तोड़ा गया. ये बारबार बनता रहा… हर बार उठ खड़ा होता रहा. क्योंकि तोड़ने वालों को मालूम नहीं था कि हमारे राष्ट्र का वैचारिक सामर्थ्य क्या है. हम भौतिक शरीर को नश्वर मानने वाले लोग हैं. उसके भीतर बैठी आत्मा अविनाशी है और शिव तो सर्वात्मा हैं.



