अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा कथित चोरी मामले में प्रत्येक दिन नए राज सामने आ रहे हैं. चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं, जिसका टेंशन देने वाला एक्सटेंशन हो रहा है. हर विस्तार में आस्था से खिलवाड़ की नई कहानी है. SIT पिछले 6 दिनों से जांच कर रही है. कई लोग रडार पर हैं. कई नाम भी सामने आ चुके हैं, जिन पर लगे आरोपों की हर एंगल से जांच हो रही है.

चढावा चोरी में नई मिस्ट्री रामलला को समर्पित हार और चरण पादुका से जुड़ी है. दावा किया जा रहा है, जो हार और चरण पादुका भेंट किए गए थे उसकी ना तो रसीद है और ना कोई जानकारी है. सवाल यही है राम मंदिर से जुड़ी हेराफेरी में अभी और कितनी कहानियां हैं और कितने किरदार हैं?
सात दिन के अंदर SIT को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपनी है. अबतक SIT ट्रस्ट के कई पदाधिकारियों से पूछताछ कर चुकी है. डोनेशन काउंटिंग से जुड़े कर्मचारियों और बैंक कर्मचारियों से भी सवाल जवाब कर चुकी है.
चांदी के हारचरणपादुका की मिस्ट्री
अबतक आपने राम मंदिर में चढ़ाए गए कैश के गबन के बारे में सुना होगा लेकिन अयोध्या के महंत विनोद मिश्रा ने जो सनसनीखेज दावा किया है. वो चौंकाने वाला है. उनका कहना है हार और चरण पादुका की रसीद भी नहीं मिली है. उन्होंने ये भी दावा किया है कि चांदी का हार और चरण पादुका मंदिर में पुजारियों को दिए थे.
विनोद मिश्रा का दावा इसके बदले में उन्हें कोई रसीद नहीं मिली. ये भी कहा है कि टिन्नू से कई महीनों तक रसीद और फोटो मांगी लेकिन उन्हें नहीं दिया गया. टिन्नू यादव महीनों तक टालता रहा और बाद में बताया कि हार और चरण पादुका को बेंगलुरु में गला दिया गया है. आपको बता दें दावे के अनुसार 30 अक्टूबर 2025 को रामलला को लगभग सवा किलो चांदी का हार और करीब 300 ग्राम वजन की चांदी की चरण पादुका समर्पित की गई थी.
SIT जांच में नए खुलासे और संदिग्धों की पड़ताल
दूसरी ओर, आज छठे दिन भी SIT की जांच जारी है.स्टेट बैंक के 6 कर्मचारियों से पूछताछ की गई है. आउटसोर्स के भी 12 स्टाफ से सवाल जवाब किए गए हैं.ट्रस्ट के और तीन सदस्यों से भी आज पूछताछ हुई.
बताया जा रहा है आज ही SIT की टीम लखनऊ पहुंच सकती है. सीएम योगी से मिल सकती है. सीएम को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप सकती है. इस बीच SIT की जांच में कई ऐसी जानकारियां सामने आ रही हैं, जिनसे आप समझ सकते हैं कैसे कई महीनों से चढ़ावे में हेराफेरी की जा रही थी.
ये बताया जा रहा है कि बैंक ने गिनती के लिए निजी एजेंसी को हायर किया था. निजी एजेंसी आउटसोर्सिंग से कर्मचारी भर्ती करती थी. बड़ी बात ये है कि काउंटिंग में ट्रस्टी के रिश्तेदार परिचित भी रखे गए थे.
बैंक कर्मियों और ट्रस्ट की भूमिका पर सवाल
इससे भी चौंकाने वाला दावा ये है कि प्रभावशाली लोगों की सिफारिश पर कई नियुक्तियां हुई थीं. कहा जा रहा है प्रभावशाली लोगों की वजह से बैंक अधिकारी भी परेशान थे. कई लोगों के दबदबे की वजह से सख्ती से नियम लागू नहीं हो पा रहे थे. इसका अंजाम ये हुआ कि बैंककर्मी अनियमितता की जानकारी पर भी चुप रहे. गिनती में रकम में अंतर आने पर भी बैंक अफसर चुप रहे.
अफसरों की चुप्पी का कुछ बैंककर्मियों ने फायदा उठाया. कुछ बैंक कर्मचारियों के सीधे गड़बड़ी में होने की आशंका है. इसकी जांच हो रही है. अबतक की जांच में एक अफसर समेत तीन से चार लोगों की भूमिका संदिग्ध है. ट्रस्ट के अधिकारी का घर किराए पर लेने वाले अफसर भी रडार पर हैं. अफसर की भूमिका के सबूत भी मिले हैं जिसकी पड़ताल जारी है.
बताया जा रहा है CCTV की फॉरेंसिंक जांच भी हो सकती है. सूत्रों का कहना है कि कैश गिनने का काम निजी एजेंसी के पास था. निजी एजेंसी ने आउटसोर्सिंग से लोगों को नौकरी पर रखा गया था. गणना प्रक्रिया में शामिल लोगों की नियुक्ती पैरवी पर हुई था. संभव है कि कुछ कर्मचारी गड़बड़ी में शामिल हैं. मंदिर परिसर में 800 कर्मचारी तैनात हैं. 800 में से 200 कर्मचारी ट्रस्ट से नियुक्त हैं. SIT कर्मचारियों की भूमिका का पता लगा रही है. लंबे समय से सैनात सुरक्षाकर्मी भी रडार पर हैं.
ब्यूरो रिपोर्ट, टीवी9 भारतवर्ष


