
नोएडा/गाजियाबाद: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में मौसम ठंडा होने के साथ वायु प्रदूषण की समस्या गंभीर होती दिखाई दे रही है। नोएडा और गाजियाबाद के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 300 के पार पहुंच गया है। इससे लोगों की चिंता बढ़ गई है। प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने निरीक्षण अभियान चलाया और नियमों का उल्लंघन करने वाली 16 परियोजनाओं या स्थानों पर कुल 75.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
नोएडा और गाजियाबाद में AQI 300 के पार
उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार सुबह 9 बजे नोएडा के सेक्टर-62 में AQI 325 दर्ज किया गया। वहीं, गाजियाबाद के इंदिरापुरम में यह 312 और वसुंधरा में 321 रहा।
वायु गुणवत्ता के इस स्तर पर संवेदनशील लोगों को विशेष परेशानी हो सकती है। बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को खांसी, सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं।
ग्रेप लागू होने के बावजूद प्रदूषण पर चुनौती
प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत कदम उठाए जाते हैं। इसके बावजूद निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियों पर नियंत्रण प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।
प्रदूषण का स्तर कम करने के लिए निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के उपाय, सड़कों की सफाई और नियमों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है। हवा की गति और मौसम में बदलाव भी प्रदूषण के स्तर को प्रभावित कर सकते हैं।
16 परियोजनाओं पर लगाया गया 75.50 लाख रुपये का जुर्माना
रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर में क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने निर्माण स्थलों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर निरीक्षण अभियान चलाया। इस दौरान कुल 30 स्थानों की जांच की गई।
जांच में 16 स्थानों पर धूल नियंत्रण और पर्यावरण संबंधी नियमों का उल्लंघन पाए जाने की बात कही गई। इसके बाद संबंधित इकाइयों पर कुल 75.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
इस कार्रवाई का उद्देश्य निर्माण गतिविधियों और अन्य स्रोतों से फैलने वाले प्रदूषण पर अंकुश लगाना है। हालांकि, प्रदूषण में स्थायी कमी लाने के लिए नियमित निगरानी और नियमों का लगातार पालन भी जरूरी है।
खराब हवा में लोग कैसे रखें अपना ध्यान?
प्रदूषण बढ़ने के दौरान कुछ सावधानियां मददगार हो सकती हैं:
- बाहर हवा की गुणवत्ता बहुत खराब हो तो अनावश्यक रूप से लंबे समय तक खुले में रहने से बचें।
- सुबह या शाम की सैर से पहले स्थानीय AQI की जानकारी लें।
- आंखों में जलन, खांसी या सांस लेने में परेशानी होने पर सावधानी बरतें और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
- बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी वाले लोगों को प्रदूषित हवा के संपर्क से बचाने का प्रयास करें।
नोएडा और गाजियाबाद में बढ़ता प्रदूषण सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण, दोनों के लिए चिंता का विषय है। ऐसे में निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन और प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर प्रभावी निगरानी महत्वपूर्ण होगी।
सत्या रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों पर आधारित है। AQI के आंकड़े संबंधित समय और स्थान के अनुसार बदल सकते हैं।



