Satya Report: अब नोएडाग्रेटर नोएडा में अब आपको और भी गगनचुंबी इमारतें देखने को मिलेंगी. दरअसल प्रदेश के सभी औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के लिए यूनिफाइड बिल्डिंग रेगुलेशन2026 लाने की तैयारी शुरू कर दी गई है. इनवेस्ट यूपी विभाग की ओर से इसका ड्राफ्ट जारी कर दिया गया है और सुझाव अगले 15 दिन के अंदर मांगे गए है.

इससे गौतम बुद्ध नगर के सभी विकास प्राधिकरण नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे, यूपीसिडा, यूपीडा और अन्य औद्योगिक विकास प्राधिकरणों – में अब नए बनने वाले भवनों की ऊंचाई और अधिक की जा सकेगी. यानि औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के क्षेत्रों में गगनचुम्बी बिल्डिंग बनने का रास्ता साफ हो गया है. लेकिन इसके कई फायदें तथा चुनौतियां भी होंगी .
एकीकृत बिल्डिंग बायलॉज, खत्म होगी भ्रम की स्थिति
अब तक अलगअलग औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में अलगअलग बिल्डिंग बायलॉज थे, जिससे भवन निर्माणकर्ताओं और आवंटियों को उन्हीं औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के नियमों के अनुसार काम करना होता था. इससे भ्रम की स्थिति बनी रहती थी. इस ड्राफ्ट के लागू होने के बाद प्रदेश के सभी औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में एकीकृत बिल्डिंग बायलॉज लागू होंगे. इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि निर्माण मंजूरी की प्रक्रिया फॉलो करना आसान, सरल और तेज हो सकेगी. वही इस ड्राफ्ट में प्रीमियम परचेजबल एफएआर का भी विकल्प दिया गया है और इसे सड़क की चौड़ाई से जोड़ दिया गया है. इसका सीधा मतलब यह है कि निर्माणकर्ता या बिल्डर सड़क की चौड़ाई के आधार पर एक निश्चित शुल्क चुकाकर अतिरिक्त एफएआर खरीद सकेंगे और इसके जरिए भवन की ऊंचाई को और बढ़ा सकेंगे.
ईचार्जिंग तथा 126 भिन्न परिभाषाओं पर स्पष्टता
इलेक्ट्रिक वाहनों को भविष्य का ट्रांसपोर्ट साधन बनाने हेतु नई नियमावली में ईचार्जिंग के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने जोर दिया गया है. इससे इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग की सुविधा मिलेगी जिससे वाहन खरीदने वालों को प्रोत्साहन मिलेगा. एक्स्पर्ट्स का मानना है कि ऊंचे टॉवर बनने से अधिक यूनिटस बनेंगे जिसके अनुपात में इंफ्रा भी बढ़ाना होगा. इसके लिए भवन निर्माण से जुड़ी 126 परिभाषाओं को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित कर दिया गया है.इसके अलावा पार्किंग सुविधा में भी बदलाव किए गए हैं. ग्रुप हॉऊसिंग के लिए पार्किंग 1 से 1.5 प्रति यूनिट रखी गई है. व्यावसायिक के लिए 1 पार्किंग स्लॉट पहले 30100 वर्ग मीटर के निर्माण से बढ़ाकर 50500 वर्ग मीटर कर दिया गया है. जबकि औद्योगिक में 1 पार्किंग प्रति 300 वर्ग मीटर पर निर्धारित की गई है.
भवन की ऊंचाई और ग्रीन एरिया
10 से 24 मीटर की सीमा को समाप्त कर दिया गया है केवल एयरपोर्ट और हेरिटेज निर्माण के आसपास छोड़कर. पहले की 2530% की तुलना में ग्रीन एरिया 510% रखने की अनुमति दी जा सकती है. इनवेस्ट यूपी ने ड्राफ्ट पर आम जनता, बिल्डर्स, डेवलपर्स और संबंधित पक्षों से आपत्तियां व सुझाव 3 मई 2026 तक मांगे हैं. सुझावों के आधार पर ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा, जिसके बाद इसे औपचारिक रूप से लागू किया जाएगा. माना जा रहा है कि यह नई नियमावली नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्स्प्रेसवे सहित अन्य औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के क्षेत्रों में रियल एस्टेट सेक्टर को नई गति देगी.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स
सरकार की ओर से जारी मौजूदा ड्राफ्ट में लगभग डबल एफएआर तथा रोड की चौड़ाई जितनी होगी. डिलीजेन्ट बिल्डर्स के सीईओ अश्वनी नागपाल का कहना है कि प्लॉट्स को उतना ज्यादा एफएआर मिलने के प्रस्ताव है. यानि कि ज्यादा चौड़ी सड़क पर ज्यादा एफएआर मिलने से शहर को वर्टिकल ग्रोथ मिलेगी और छोटे प्लॉटस पर ज्यादा ऊँचे टावर बनाये जा सकेंगे, जिससे ज्यादा घरों का निर्माण किया जा सकेगा, जिससे लागत कम की जा सकेगी और लाभ घर खरीदारों को भी मिलेगा. वहीं रेनॉक्स ग्रुप के चेयरमैन, शैलेन्द्र शर्मा के मुताबिक एक जैसे बिल्डिंग नियमों के लागू होने से पारदर्शिता आएगी, विकासकर्ताओं का भ्रम दूर होगा व विवाद की स्थिति नहीं रह जाएगी, निर्माण और विकास करना आसान हो जाएगा. एक्ज़ोटिका हाउसिंग के सीएमडी दिनेश जैन के मुताबिक यह नीति नोएडा के अचल संपत्ति परिदृश्य को मूल रूप से बदल देगी. प्रीमियम डेवलपर्स को इसका सबसे अधिक लाभ मिलेगा, क्योंकि उनके पास बेहतर गुणवत्ता निर्माण और डिज़ाइन दक्षता के साथ अधिक फ्लोर एरिया अनुपात का उपयोग करने की क्षमता होती है. निवेशकों और अंतिम उपभोक्ताओं के लिए इसका मतलब बेहतर संपत्ति उपयोग और दीर्घकालिक मूल्यवृद्धि हो सकता है.
शहरी विकास को मिलेगी नई दिशा
आरजी ग्रुप के निदेशक हिमांशु गर्ग के मुताबिक ड्राफ्ट बिल्डिंग बायलॉज़ में किए गए बदलाव राज्य के शहरी विकास को नई दिशा देंगे. हाइट लिमिट हटने से हाईराइज प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा मिलेगा, जिससे सीमित जमीन में ज्यादा आवास उपलब्ध कराए जा सकेंगे. इसके अलावा, छोटे प्लॉट्स पर भी विकास की अनुमति और कम औपचारिकताओं के कारण रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश और निर्माण गतिविधियां तेजी से बढ़ने की उम्मीद है.विजन बिजनेस पार्क के फाउंडर अतुल विक्रम सिंह का कहना है कि FAR को सड़क की चौड़ाई से जोड़ने और हाइट कैप हटाने से अब डेवलपर्स को बेहतर प्लानिंग और ज्यादा एफिशिएंट लैंड यूज का अवसर मिलेगा. इससे शहरी क्षेत्रों में वर्टिकल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा, जो बढ़ती आबादी के दबाव को संभालने में मददगार होगा. साथ ही, सेटबैक नियमों में ढील और अप्रूवल प्रक्रिया को आसान बनाने से प्रोजेक्ट्स की लागत और समय दोनों में कमी आएगी, जिससे खरीदारों को भी सीधा फायदा मिलेगा. निराला वर्ल्ड के चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर सुरेश गर्ग के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार के ड्राफ्ट एकीकृत भवन नियम नियोजित, अवसंरचनाआधारित शहरीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम हैं, जो फ्लोर एरिया रेशियो को सड़क की चौड़ाई से सीधे जोड़ते हैं. 3 के आसपास बेस FAR के साथ, तथा 45 मीटर से अधिक चौड़ी सड़कों पर लगभग असीमित FAR, ये सुधार ऊर्ध्वाधर विकास को प्रोत्साहित करेंगे और नोएडा, ग्रेटर नोएडा, YEIDA तथा अन्य औद्योगिकविकास प्राधिकरणों में डेवलपर्स के लिए एक एकल, पारदर्शी ढांचा तैयार करेंगे.



