TrendingUttar Pradesh

72 ताबूतों का जुलूस नहीं, बिलग्राम की सदियों पुरानी मोहब्बत का पैगाम! 19-20 अगस्त को दिखेगी गंगा-जमुनी तहजीब

बिलग्राम, हरदोई। बिलग्राम में 19 और 20 अगस्त को होने वाला शबबेदारी व जुलूसए72 ताबूत इस बार सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शहर की उस पहचान को सामने लाने वाला मौका होगा, जिसके लिए बिलग्राम को उसकी गंगाजमुनी तहज़ीब और आपसी भाईचारे के लिए जाना जाता है।

बड़ा इमामबाड़ा से उठने वाली अकीदत की यह आवाज़ दूरदराज तक पहुंचेगी। जुलूसएताज़िया का आगाज़ इमामबाड़ा ऊँचीमांडी से नमाज़एमगरिब के बाद होगा। मर्सियाख्वानी, नौहाख्वानी और तकरीरों के बीच बड़ी संख्या में अकीदतमंदों के पहुंचने की उम्मीद है।

इस आयोजन की खास बात यह है कि यहां अकीदत के साथ इंसानियत और भाईचारे का संदेश भी दिखाई देता है। बिलग्राम की यही खूबसूरती है कि यहां अलगअलग समुदायों के लोग एकदूसरे की खुशियों और ग़म में शरीक होते रहे हैं। यही परंपरा इस आयोजन को भी खास बनाती है।

19 अगस्त की रात 10 बजे बड़ा इमामबाड़ा में मौलाना क़ाज़ी मोहम्मद अस्करी साहब की खिताबत होगी। 20 अगस्त को फ़ज्र की नमाज़ के बाद दरगाह हज़रत अब्बास में मौलाना ग़ुलाम अली साहब क़िबला रूड़की खिताब करेंगे। सुबह 7 बजे इमामबाड़ा मेहंदी हैदर में मौलाना ज़ीशान अली आज़मी साहब क़िबला सुल्तानपुरी की नक़ाबत होगी।

मुज़फ्फरनगर, सुल्तानपुर, पिहानी, घुघेरा सादात समेत विभिन्न स्थानों से आने वाली अंजुमनें कार्यक्रम में शिरकत करेंगी। शबीह अब्बास आरफ़ी, अली ज़ैदी मौलई और फरान अली समेत नौहाख्वानों की आवाज़ भी कार्यक्रम का हिस्सा होगी।

बिलग्राम में यह आयोजन एक बार फिर यह संदेश देगा कि शहर की असली ताकत उसकी इमारतों में नहीं, बल्कि उन दिलों में है जो एकदूसरे के लिए धड़कते हैं।

यही वजह है कि 1920 अगस्त का यह आयोजन सिर्फ एक जुलूस नहीं, बल्कि बिलग्राम की मोहब्बत, मेलजोल और सदियों पुरानी भाईचारे की रवायत की तस्वीर बनने जा रहा है।

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply