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ठीक से न चबाना, ओवरईटिंग, बढ़ता मोटापा…रील्स की लत का बच्चों के डाइजेशन पर असर

बच्चा कुछ भी खाता है तो उसके हाथ में फोन होता है. चीजें अब इसलिए और खराब हो गई हैं क्योंकि खाना खाते हुए वो सिर्फ रील्स देख रहा होता है. बच्चा हो या बड़ा… हर किसी को रील्स देखने की लत लगी हुई है. कुछ सेकंड बाद नई वीडियो देखने में डोपामाइन का रोल रहता है. लेकिन हर वीडियो को देखने समय अगले में नई कंटेंट की चाहत हमें रीलस की लत लगा देती है. जब बड़े लोग इससे बच नहीं पाते हैं तो भला बच्चे इससे दूर कैसे रह सकते है.

यहां हम बच्चों में रील्स की लत और इसका उनके पाचन पर क्या असर पड़ता है… ये आपको बताने जा रहे हैं. पेरेंट्स अपने सुख के लिए बच्चों के हाथ में फोन थमा देते हैं. लेकिन चिंता तब और बढ़ जाती है जब बच्चा फोन देखतेदेखते देर तक खाना खाता रहता है.

एक्सपर्ट ने क्या कहा…

डॉ. शुचिन बजाज कहते हैं कि आजकल बच्चों में एक समस्या दिख रही है. फोन में वीडियो देखे बिना वो खाना नहीं खाते हैं. हमें लगता है कि बच्चा चुपचाप खाना खा रहा है, लेकिन इसका असर उसके पाचन और वजन दोनों पर पड़ सकता है. जब बच्चे का ध्यान फोन की स्क्रीन पर होता है तो वो खाने को ठीक से चबाता ही नहीं है. बड़ेबड़े बाइट जल्दी निगलने से पेट फूलना, गैस, अपच और पेट में भारीपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

बड़ा मुद्दा है ओवरईटिंग

एक्सपर्ट कहते हैं कि पेट भरने का संकेत दिमाग तक पहुंचने में समय लगता है. लेकिन जब दिमाग रील्स में बिजी हो तो अपने शरीर के हंगर सिग्नल्स पर ध्यान नहीं देता. ऐसे में वो जरूरत से ज्यादा खाता है.

अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड संग स्क्रीन

इसके साथ अगर स्क्रीन देखते हुए चिप्स या दूसरे पैकेट वाले अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स खाए जा रहे हैं तो बॉडी में कैलोरी बहुत तेजी से बढ़ती हैं. लंबे समय में इस वजह से मोटापा, कब्ज और अनहेल्दी ईटिंग हैबिट्स का खतरा बढ़ सकता है.

समस्या सिर्फ डाइजेशन की नहीं

डॉक्टर कहते हैं कि प्रॉब्लम सिर्फ डाइजेशन के खराब होने तक नहीं है. बच्चे को ये सीखने की जरूरत है कि खाना एक माइंडफुल एक्टिविटी भी है, न कि ये एक बैकग्राउंड एक्टिविटी है. बच्चे को मोबाइल में स्क्रीन देखने की लत को एकदम से दूर नहीं किया जा सकता है. एक्सपर्ट कहते हैं कि बच्चे को कम से कम खाना खिलाते वक्त स्क्रीन देखने न दें.

उसे धीरेधीरे खाना खाने दें. परिवार से साथ बैठकर समय बिताने दें. याद रखें कि बच्चे को सिर्फ हेल्दी फूड्स देना जरूरी नहीं है उसे हेल्दी तरीके से खाना सीखाना भी जरूरी है.

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