बाइक या स्कूटर चलाते समय हेलमेट पहनना सिर्फ चालान से बचने का जुगाड़ नहीं है. बल्कि यह आपकी जिंदगी की सबसे बड़ी सेफ्टी गारंटी भी है. वहीं अक्सर लोग सस्ते हेलमेट के चक्कर में आकर अपनी जिंदगी से खिलवाड़ कर बैठते हैं. अगर आप भी अपने लिए एक नया हेलमेट लेने की प्लानिंग कर रहे हैं तो ये खबर आपके काम की हो सकती है. हम आपको इस खबर के माध्यम से हेलमेट लेते समय किन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए वो बताने जा रहे हैं.

सबसे पहले चेक करें ISI मार्क?
हेलमेट खरीदते समय सबसे पहला काम ISI मार्क देखना होता है. यह मार्क कोई मामूली ठप्पा नहीं है, बल्कि इस बात का सबूत है कि को भारतीय मानक ब्यूरो ने कड़े सेफ्टी टेस्ट से गुजरने के बाद पास किया है.
स्टैंडर्ड कोड चेक करें
भारत में हेलमेट के लिए IS 4151 स्टैंडर्ड तय किया गया है, इसे जरूर चेक करें. आजकल मार्केट में ऐसे सड़कों के किनारे बिकने वाले सस्ते हेलमेट्स की भरमार है जिन पर नकली ISI का स्टीकर लगा होता है. असली हेलमेट की पहचान यह है कि उस पर एक यूनिक लाइसेंस नंबर लिखा होता है, जिसे आप BIS की ऑफिशियल वेबसाइट या ऐप पर जाकर तुरंत वेरीफाई कर सकते हैं.
साइज और फिटिंग
कई बार लोग हेलमेट तो बहुत महंगा और ब्रांडेड खरीद लेते हैं, लेकिन साइज गलत चुन लेते हैं. तो वो हेलमेट आपके किसी का नहीं होगा.
कैसे चेक करें फिटिंग?
हेलमेट को सिर पर पहनकर देखें. उसे थोड़ा सा दाएंबाएं और ऊपरनीचे हिलाएं. अगर वह सिर पर आसानी से घूम रहा है, तो समझ जाइए कि साइज बड़ा है. उसे आपके गालों और माथे पर एकदम परफेक्ट बैठना चाहिए.
इन आम गलतियों से हमेशा बचें
अक्सर के रखरखाव या उसे इस्तेमाल करने में कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं जो हमारी सेफ्टी को खतरे में डाल देती हैं. इनसे बचना बहुत जरूरी है: सेकेंड हैंड या पुराना हेलमेट भूलकर भी न लें. कुछ लोग पैसे बचाने के चक्कर में पुराना हेलमेट खरीद लेते हैं. यह बहुत खतरनाक हो सकता है. अगर कोई हेलमेट पहले कभी किसी छोटेमोटे एक्सीडेंट का शिकार हुआ है, तो भले ही वह बाहर से ठीक दिखे, लेकिन उसके अंदर की सेफ्टी लेयर डैमेज हो चुकी होती है.
केमिकल और तेल से दूरी
हेलमेट को चमकाने के लिए कभी भी पेट्रोल, डीजल, थिनर या किसी तेज केमिकल वाले क्लीनर का इस्तेमाल न करें. ये चीजें हेलमेट के प्लास्टिक या फाइबर की बाहरी शेल को कमजोर कर देती हैं. इसे साफ करने के लिए सादा पानी और हल्का सा साबुन ही काफी है.
एक्सपायरी डेट का ध्यान रखें
क्या आप जानते हैं कि हेलमेट की भी एक उम्र होती है? धूप, पसीना और मौसम की मार झेलतेझेलते हेलमेट के अंदर का मटेरियल वक्त के साथ खराब होने लगता है. इसलिए एक्सपर्ट्स मानते हैं कि 5 साल से ज्यादा पुराने हेलमेट को बदल देना चाहिए, भले ही वह देखने में एकदम नया क्यों न लग रहा हो.



