
प्रयागराज: अपराध की जांच में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक की मदद लेने की दिशा में नई पहल हुई है। मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNNIT) के शोधार्थी अर्पित दुबे ने ‘टेक एंड फॉरेंसिक’ नाम से एक स्टार्टअप शुरू किया है। इसका उद्देश्य घटनास्थल की तस्वीरों, उपलब्ध फुटेज और साक्ष्यों की मदद से उसका डिजिटल 3D मॉडल तैयार करना है, ताकि जांच अधिकारी घटना से जुड़ी परिस्थितियों को अधिक व्यवस्थित तरीके से समझ सकें।
तस्वीरों से बनेगा घटनास्थल का डिजिटल मॉडल
किसी अपराध के बाद पुलिस घटनास्थल की तस्वीरें लेती है, वहां मौजूद वस्तुओं की स्थिति दर्ज करती है और भौतिक साक्ष्य जुटाती है। कई बार घटनास्थल पर मौजूद वस्तुओं और सुरागों के बीच संबंध समझना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
AI आधारित इस तकनीक में उपलब्ध तस्वीरों और अन्य डेटा का इस्तेमाल करके घटनास्थल का त्रि-आयामी मॉडल तैयार करने की कोशिश की जाएगी। इससे जांच अधिकारी डिजिटल रूप में देख सकेंगे कि घटनास्थल की बनावट कैसी थी और विभिन्न वस्तुएं एक-दूसरे के मुकाबले कहां स्थित थीं।
क्या है फोटोग्रामेट्री तकनीक?
इस पहल में फोटोग्रामेट्री तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। सामान्य तौर पर इस तकनीक में अलग-अलग कोणों से ली गई तस्वीरों का विश्लेषण करके किसी वस्तु या स्थान की त्रि-आयामी संरचना तैयार की जाती है।
अपराध की जांच में इसका उपयोग घटनास्थल की संरचना को डिजिटल रूप में समझने में मदद कर सकता है। इससे जांच अधिकारी संभावित घटनाक्रम का विश्लेषण कर सकते हैं और महत्वपूर्ण साक्ष्यों पर अधिक बारीकी से ध्यान दे सकते हैं।
हालांकि, मॉडल की सटीकता उपलब्ध तस्वीरों की गुणवत्ता, अलग-अलग कोणों से मिली जानकारी और घटनास्थल के सही दस्तावेजीकरण पर निर्भर करेगी।
VR के जरिए घटनास्थल को देख सकेंगे जांच अधिकारी
इस तकनीक के साथ वर्चुअल रियलिटी (VR) का इस्तेमाल भी उपयोगी हो सकता है। इसके जरिए घटनास्थल के डिजिटल मॉडल को इस तरह देखा जा सकता है, मानो जांच अधिकारी किसी आभासी वातावरण में मौजूद हों।
ऐसी व्यवस्था से घटनास्थल की बनावट, वस्तुओं की स्थिति और साक्ष्यों के बीच संभावित संबंधों को समझने में मदद मिल सकती है। भविष्य में यह तकनीक अदालतों में घटनास्थल से जुड़े तथ्यों को दृश्य रूप में प्रस्तुत करने में भी सहायक हो सकती है, बशर्ते संबंधित साक्ष्य और प्रक्रिया कानूनी मानकों पर खरी उतरें।
MNNIT के शोध से शुरू हुआ स्टार्टअप
अर्पित दुबे MNNIT के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में शोध कर रहे हैं। वह डॉ. दिव्य कुमार के निर्देशन में फॉरेंसिक AI के विषय पर पीएचडी कर रहे हैं। अपने शोध को व्यावहारिक उपयोग में लाने के उद्देश्य से उन्होंने ‘टेक एंड फॉरेंसिक’ स्टार्टअप की शुरुआत की है। इस पहल को MNNIT फाउंडेशन के इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन हब से इनक्यूबेशन भी मिला है।
क्या AI खुद अपराधी को पकड़ लेगा?
इस तकनीक को लेकर सबसे अहम बात यह है कि 3D मॉडल अपने आप किसी अपराधी की पहचान या गिरफ्तारी सुनिश्चित नहीं कर सकता। इसका काम जांच अधिकारियों को घटनास्थल और उपलब्ध साक्ष्यों को बेहतर ढंग से समझने में मदद देना है।
किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए भौतिक साक्ष्य, डिजिटल रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और अन्य जांच प्रक्रियाएं जरूरी रहेंगी। AI से तैयार मॉडल की भी स्वतंत्र रूप से जांच और पुष्टि करनी होगी।
अगर यह तकनीक प्रभावी ढंग से विकसित और इस्तेमाल की जाती है, तो भविष्य में जटिल अपराधों की जांच में घटनास्थल को समझने का एक नया तरीका उपलब्ध हो सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। तकनीक की वास्तविक उपयोगिता और सटीकता उसके परीक्षण, उपलब्ध साक्ष्यों तथा जांच एजेंसियों द्वारा किए गए सत्यापन पर निर्भर करेगी।



