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अब बर्फीले पहाड़ों के बीच वाइल्ड लाइफ सफारी! लद्दाख में शुरू होगी भारत की पहली हाई-एल्टीट्यूड सफारी..

अब बर्फीले पहाड़ों के बीच वाइल्ड लाइफ सफारी! लद्दाख में शुरू होगी भारत की पहली हाई-एल्टीट्यूड सफारी..

जम्मू/लेह । देश में पहली बार लद्दाख (Ladakh) के ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों में गाइडेड हाई-एल्टीट्यूड वाइल्ड लाइफ सफारी (Guided High-Altitude Wildlife Safari) शुरू होने जा रही है। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना (Lieutenant Governor Vinai Kumar Saxena) ने स्नो लेपर्ड और बर्ड वॉचिंग ट्रेल्स पर विशेष सफारी शुरू करने को मंजूरी दे दी है। इस पहल का उद्देश्य केवल पर्यटकों को दुर्लभ वन्यजीवों से रूबरू कराना ही नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों को संरक्षण गतिविधियों और पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था का भागीदार बनाना भी है। यह देश में समुदाय आधारित वन्यजीव संरक्षण और इको टूरिज्म का पहला व्यापक मॉडल माना जा रहा है।

वन विभाग को कांजीरंगा और रणथंभौर की तर्ज पर विशेष ओपन बैक जीपों से गाइडेड सफारी संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशिक्षित स्थानीय ड्राइवर और गाइड पर्यटकों को निर्धारित मार्गों पर ले जाएंगे। इससे अनियंत्रित ऑफ-रोडिंग और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में मानव हस्तक्षेप कम होगा, वहीं पर्यटकों को सुरक्षित और बेहतर अनुभव मिलेगा।

यह निर्णय हाल ही में गठित स्नो लेपर्ड एंड हाई-एल्टीट्यूड नेचर (एसएचएएन) कंजर्वेशन सोसाइटी की पहली गवर्निंग बॉडी बैठक में लिया गया। सोसाइटी हेमिस नेशनल पार्क, चांगथांग, काराकोरम वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी, नुब्रा, जंस्कार, शाम, करगिल और द्रास क्षेत्रों में सफारी मार्ग विकसित करेगी। प्रशासन ने संबंधित विभागों को इस वर्ष सर्दियों में स्नो लेपर्ड देखने के मौसम से पहले सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि लद्दाख की सबसे बड़ी पूंजी उसका नाजुक पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र और समृद्ध वन्यजीव हैं। संरक्षण तभी सफल होगा, जब स्थानीय समुदाय इसमें बराबर के भागीदार बनें। उन्हें आर्थिक लाभ भी मिले। एसएचएएन के माध्यम से लद्दाख को समुदाय आधारित संरक्षण और जिम्मेदार पर्वतीय इको टूरिज्म का वैश्विक मॉडल बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

देश में सर्वाधिक 477 स्नो लेपर्ड लद्दाख में पाए जाते हैं
देश में लद्दाख स्नो लेपर्ड का सबसे बड़ा आवास है। यहां भारत के अनुमानित 718 स्नो लेपर्ड में से 477 पाए जाते हैं। इसके अलावा 38 से अधिक स्तनधारी, 340 पक्षी प्रजातियां और लगभग 1,800 संवहनी पौधों की प्रजातियां यहां की जैव विविधता को समृद्ध बनाती हैं। इसी प्राकृतिक धरोहर को जिम्मेदार पर्यटन के माध्यम से वैश्विक पहचान दिलाने की योजना तैयार की गई है।

20 युवाओं को बर्ड वाचिंग और वन्यजीव गाइड का प्रशिक्षण दिया जाएगा
परियोजना के तहत 20 स्थानीय युवाओं को बर्ड-वॉचिंग और वन्यजीव गाइड के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा तथा उन्हें दूरबीन समेत आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रमुख स्थलों पर 10 बर्ड-वॉचिंग हाइड्स विकसित किए जाएंगे। साथ ही 50 सरकारी स्कूलों में एसएचएएन वाइल्डलाइफ क्लब बनाए जाएंगे। ताकि बच्चों में भी प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़े। इसके लिए हर स्कूल को 30,000 रुपये का फंड दिया जाएगा।

एसएचएएन का एक्शन प्लान
– 40 गांवों में 300 रंग कोडित कूड़ेदान, पूरे लद्दाख में प्लास्टिक मुक्त पर्यटन अभियान
– हर वर्ष 10 युवाओं को वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी फेलोशिप
– 50 महिला कारीगरों को वन्यजीव आधारित स्मृति चिह्न बनाने का प्रशिक्षण
– संरक्षित क्षेत्रों में सूचना बोर्ड और पर्यावरण जागरूकता अभियान
– स्थानीय समुदायों को पर्यटन से जोड़कर टिकाऊ आजीविका विकसित करना
– पूरे लद्दाख में वन्यजीवों से जुड़े यादगार सामान (सवेनियर) बेचने वाली दुकानें खोलना

‘एसएचएएन के माध्यम से हम ऐसा मॉडल विकसित कर रहे हैं, जिसमें वन्यजीव संरक्षण, जिम्मेदार इको-टूरिज्म, पर्यावरण शिक्षा और स्थानीय समुदायों की आजीविका एक साथ आगे बढ़े। हमारा लक्ष्य लद्दाख को समुदाय आधारित संरक्षण का वैश्विक उदाहरण बनाना है।’

contact.satyareport@gmail.com

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