नोएडा श्रमिक आंदोलन मामले में आकृति चौधरी को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने आकृति के खिलाफ NSA के तहत डिटेंशन ऑर्डर रद्द कर दिया है. साथ ही यूपी सरकार को 5 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया है. ये आदेश जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की डिवीजन बेंच ने दिया है. सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता उपस्थित हुए.

अदालत ने सरकार से पुलिस कार्रवाई और NSA के तहत निरुद्ध किए जाने के आधार से संबंधित साक्ष्य और दस्तावेज पेश करने को कहा था. बताया गया कि सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से ऐसा कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका, जिससे आकृति चौधरी के खिलाफ NSA के तहत डिटेंशन की कार्रवाई को न्यायिक कसौटी पर उचित ठहराया जा सके.
कोर्ट ने NSA के तहत जारी डिटेंशन ऑर्डर को क्वैश किया
इसके बाद हाई कोर्ट ने NSA के तहत जारी डिटेंशन ऑर्डर को क्वैश कर दिया. हाई कोर्ट ने एफआईआर से पहले शांति भंग की नोटिस पर भी जानकारी मांगी थी. इससे पहले अदालत ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा था कि आकृति चौधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने से पहले क्या उन्हें शांति भंग की आशंका के संबंध में कोई नोटिस जारी किया गया था?
अदालत ने कथित तौर पर मजदूरों को भड़काने वाले वीडियो और व्हाट्सएप चैट से संबंधित विवरण भी सरकार से मांगा था. सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से इन आरोपों के समर्थन में अपेक्षित साक्ष्य प्रस्तुत न किए जा पाने को महत्वपूर्ण माना गया. याचिका में आकृति चौधरी की ओर से NSA के तहत की गई कार्रवाई को निरस्त करने और जमानत दिए जाने की मांग की गई थी.
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट जाने की सलाह दी थी
याचिका में केंद्र सरकार सहित अन्य पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया था. बताया गया है कि ग्रेटर नोएडा की सत्र अदालत आकृति चौधरी की चार में से तीन जमानत अर्जियां खारिज कर चुकी थी. जबकि एक मामले में उन्हें राहत मिली थी. इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जहां कोर्ट ने सीधे जमानत देने से इनकार करते हुए उन्हें हाई कोर्ट जाने की सलाह दी थी.
आकृति चौधरी और पत्रकार सत्यम वर्मा समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ हिंसा भड़काने, आगजनी तथा सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने के आरोपों में मुकदमे दर्ज किए गए हैं. पुलिस ने आकृति चौधरी और सत्यम वर्मा के खिलाफ NSA के तहत भी कार्रवाई की थी. पुलिस का आरोप था कि 13 अप्रैल को वेतन वृद्धि की मांग को लेकर चल रहे मजदूरों के आंदोलन के दौरान आकृति चौधरी ने मजदूरों को भड़काने का प्रयास किया, जिसके बाद हिंसा और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हुई. आकृति की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्विस तथा इलाहाबाद हाईकोर्ट की अधिवक्ता चार्ली प्रकाश ने पक्ष रखा.


