पटना
सरकार ने गांवों को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्र सरकार की नई और महत्वाकांक्षी योजना विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण के कुशल कार्यान्वयन एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जिलेवार पंच सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।

त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों विशेषकर मुखिया, वार्ड सदस्य, पंच और प्रशासनिक अधिकारियों की सहभागिता होगी। यह प्रदेशव्यापी जागरुकता अभियान आगामी 15 अगस्त तक बिहार की सभी ग्राम पंचायतों में निरंतर आयोजित किया जाएगा।
ग्रामीण विकास विभाग तथा सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि इस पंच सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के निर्वाचित प्रतिनिधियों और अधिकारियों को पुरानी मनरेगा और पहली जुलाई2026 से लागू हुई वीबीजीरामजी योजना के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझाना है।
सम्मेलन के सहारे पंचायतों को यह सिखाया जाएगा कि वे कैसे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप साक्ष्यआधारित विकास योजनाएं तैयार करें, ताकि योजनाओं का लाभ सीधे और सही रूप में ग्रामीणों को मिल सके।
मंत्री ने दी योजना की जानकारी
मंत्री ने बताया कि वीबीजीरामजी कार्यक्रम केवल एक रोजगार योजना नहीं, बल्कि विकसित भारत2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य को समय पर प्राप्त करने का मुख्य आधार है। योजना के तहत समय पर पारदर्शी डिजिटल भुगतान और अनिवार्य बेरोजगारी भत्ते का कानूनी प्रविधान किया गया है।
पुराने ढर्रे से इतर, नई योजना में विकास कार्यों को चार स्पष्ट और परिणामोन्मुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इसमें जल संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, गांवों में टिकाऊ और मजबूत अवसंरचना निर्माण, आजीविका के क्षेत्र में उत्पादक परिसंपत्तियों का निर्माण एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देना व जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का मुकाबला और हरित विकास करना शामिल है।
तकनीक आधारित पारदर्शिता
मंत्री बताया कि बीवी जीरामजी योजना को पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचारमुक्त बनाने के लिए आधुनिक डिजिटल तकनीकों का समावेश किया गया है, जो निम्न हैं।
कार्यस्थलों पर बायोमीट्रिक एवं चेहरा सत्यापन
रियलटाइम डिजिटल उपस्थिति और मानीटरिंग
पारदर्शी डिजिटल मजदूरी भुगतान प्रक्रिया
त्वरित समाधान के लिए मजबूत शिकायत निवारण तंत्र
सशक्त पंचायत से विकसित बिहार का संकल्प आदि



