
राजस्थान के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित सरकारी चिकित्सा संस्थानों में शामिल बीकानेर के पीबीएम (PBM) अस्पताल से एक बेहद हैरान और विचलित कर देने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल के जनाना विंग में सिजेरियन डिलीवरी (सिजेरियन ऑपरेशन) के बाद छह प्रसूताओं की अचानक तबीयत बिगड़ गई। इन सभी महिलाओं को ‘एक्यूट किडनी इंजरी’ (AKI), प्लेटलेट्स में भारी गिरावट, गंभीर संक्रमण (इन्फेक्शन), अत्यधिक ब्लीडिंग और मल्टीपल ऑर्गन डिस्फंक्शन जैसी घातक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
वर्तमान में इनमें से एक महिला की हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है, जिन्हें जीवन रक्षक प्रणाली (वेंटिलेटर) पर रखा गया है। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में कोटा मेडिकल कॉलेज में सिजेरियन डिलीवरी के बाद पांच महिलाओं की मौत का मामला शांत भी नहीं हुआ था। बीकानेर की इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों के ऑपरेशन थिएटर की स्वच्छता, जीवन रक्षक दवाओं की गुणवत्ता और चिकित्सा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक-एक कर बिगड़ने लगी हालत, डॉक्टरों की टीम हैरान
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले 10 से 15 दिनों के भीतर पीबीएम अस्पताल के जनाना विंग में इन महिलाओं के सिजेरियन ऑपरेशन किए गए थे। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था, लेकिन ऑपरेशन के कुछ ही समय बाद एक-एक कर महिलाओं की हालत बिगड़ने लगी। मरीजों में यूरिन (मूत्र) बंद होने, पूरे शरीर में सूजन आने, प्लेटलेट्स घटने और रक्त के थक्के (Blood Clots) न बनने जैसी गंभीर शिकायतें देखी गईं।
जब एक साथ कई प्रसूताओं में समान और जानलेवा लक्षण दिखाई देने लगे, तो अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी मरीजों को तुरंत आईसीयू (ICU) में शिफ्ट किया गया, जहां उनकी जान बचाने के लिए आपातकालीन डायलिसिस शुरू की गई है।
मामला दबाने के आरोप, परिजनों में भारी रोष
सूत्रों और स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, शुरुआती दौर में अस्पताल प्रशासन इस पूरे मामले को सामान्य ‘मेडिकल कॉम्प्लिकेशन’ बताकर दबाने की कोशिश करता नजर आया। लेकिन जैसे-जैसे गंभीर मरीजों का आंकड़ा बढ़ा, यह मामला सार्वजनिक हो गया। प्रसूताओं के परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। उनका सीधा सवाल है कि आखिर एक ही अस्पताल और एक ही ऑपरेशन थिएटर में डिलीवरी के बाद इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं की किडनी एक साथ कैसे फेल हो सकती है?
कोटा मेडिकल कॉलेज कांड की यादें हुई ताजा
बीकानेर की इस डराने वाली घटना ने कुछ समय पहले हुए कोटा मेडिकल कॉलेज कांड के जख्मों को फिर से हरा कर दिया है, जहां सिजेरियन ऑपरेशन के बाद पांच प्रसूताओं की मौत हो गई थी। कोटा मामले की उच्च स्तरीय जांच में यह सामने आया था कि प्रसूताओं को ब्लीडिंग रोकने के लिए दिया गया ‘ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन’ घटिया और अमानक स्तर का था, जिसके बाद संबंधित दवा कंपनी का लाइसेंस रद्द कर दिया गया था। बीकानेर के मामले में भी दवाओं की गुणवत्ता और ऑपरेशन थिएटर के इन्फेक्शन को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं।
मरीजों की मेडिकल स्थिति: हर कहानी बेहद दर्दनाक
अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही महिलाओं की मेडिकल रिपोर्ट बेहद चिंताजनक है:
तारा देवी (27 वर्ष): एक्यूट किडनी इंजरी (AKI), गंभीर एनीमिया (खून की कमी), फेफड़ों के बाहर पानी भरना और शरीर में पोटैशियम का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ना।
शारदा (26 वर्ष): किडनी इंजरी के साथ-साथ प्लेटलेट्स संबंधी गंभीर बीमारी।
राहिला (19 वर्ष): प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव, गंभीर संक्रमण, प्लेटलेट्स में गिरावट और मल्टीपल ऑर्गन डिस्फंक्शन।
इमरती (20 वर्ष): शरीर में फैला गंभीर संक्रमण और मल्टीपल ऑर्गन डिस्फंक्शन।
प्रीति (20 वर्ष, फलोदी निवासी): हाई ब्लड प्रेशर के कारण डिलीवरी के बाद लगातार दौरे आना, फेफड़ों में संक्रमण, AKI और HELLP सिंड्रोम। इनकी हालत सबसे ज्यादा नाजुक है और यह वेंटिलेटर पर हैं।
क्या ऑपरेशन थिएटर का संक्रमण है असली वजह?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा संशय ऑपरेशन थिएटर (OT) के भीतर फैले संक्रमण (Hospital-Acquired Infection) को लेकर है। हालांकि, अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष खजोतिया का कहना है कि केवल संक्रमण को ही इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता; डिलीवरी के दौरान होने वाला अत्यधिक रक्तस्राव (PPH) भी किडनी फेल होने की एक बड़ी वजह होता है।
दूसरी तरफ, एसपी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र वर्मा ने माना कि ऑपरेशन थिएटर में इन्फेक्शन की संभावना को पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में जल्द ही एक अत्याधुनिक इन्फेक्शन डिटेक्टर मशीन स्थापित की जा रही है, जो मात्र 90 सेकंड में संक्रमण की पहचान कर लेगी।
नेफ्रोलॉजी विभाग की देखरेख में इलाज जारी
नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. जितेंद्र फलौदिया ने बताया कि सभी मरीजों का इलाज नेफ्रोलॉजी और क्रिटिकल केयर की विशेषज्ञ टीमों की निगरानी में चल रहा है। लगातार डायलिसिस और आईसीयू मॉनिटरिंग के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक उच्च स्तरीय जांच और कल्चर रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती, तब तक किसी एक नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न
बीकानेर और कोटा जैसे बड़े संभाग स्तरीय सरकारी अस्पतालों में बैक-टू-बैक सामने आ रहे इन मामलों ने राजस्थान के स्वास्थ्य महकमे की पोल खोल दी है। यदि सरकारी दावों के बीच सुरक्षित प्रसव के बाद महिलाओं को अपनी किडनी और जान गंवानी पड़ रही है, तो आम जनता का सरकारी तंत्र पर से विश्वास उठना लाजमी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मांग है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष, वैज्ञानिक और पारदर्शी जांच हो और यदि इसमें किसी भी स्तर पर डॉक्टरों की लापरवाही, अमानक दवाओं की आपूर्ति या ओटी सैनिटाइजेशन में कोताही पाई जाती है, तो दोषियों पर सीधे गैर-इरादतन हत्या जैसी सख्त धाराओं में कार्रवाई होनी चाहिए। फिलहाल, पूरे प्रदेश की नजरें इस मामले की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।



