
रीवा: मध्य प्रदेश के रीवा से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल में प्रसव के लिए भर्ती हुई एक गर्भवती महिला और उसके नवजात बच्चे की मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही और पैसों की मांग जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
मृतका की पहचान बैकुंठपुर थाना क्षेत्र के हटवा गांव की रहने वाली कल्पना मिश्रा के रूप में हुई है। बताया गया कि प्रसव पीड़ा के बाद उसे 25 अगस्त की रात अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
ऑपरेशन से पहले पिता से मदद मांगती रही महिला
परिजनों और मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, ऑपरेशन थिएटर ले जाने से कुछ समय पहले कल्पना कथित तौर पर रोते हुए डिलीवरी वार्ड से बाहर आई। उसने अपने पिता का हाथ पकड़कर मदद की गुहार लगाई।
परिवार का दावा है कि महिला ने उस दौरान कहा, ‘पापा मुझे बचा लो, ये लोग मुझे मार डालेंगे।’ इसके बाद उसे दोबारा अंदर ले जाया गया।
अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार, अगले दिन 26 अगस्त की रात करीब 8:30 बजे ऑपरेशन के जरिए डिलीवरी कराई गई। बच्चे का जन्म हुआ, लेकिन कुछ ही समय बाद मां और नवजात दोनों की मौत हो गई।
परिवार ने लगाए 30 हजार रुपये मांगने के आरोप
महिला की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि डिलीवरी के लिए उनसे कथित तौर पर 30 हजार रुपये की मांग की गई थी।
परिवार का आरोप है कि रकम नहीं देने पर उनके साथ कथित तौर पर असहयोगपूर्ण व्यवहार किया गया और महिला को अस्पताल से ले जाने तक की बात कही गई।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। अस्पताल प्रशासन और जांच रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तव में पैसों की मांग की गई थी या नहीं।
एनेस्थीसिया को लेकर भी उठाए सवाल
परिजनों ने महिला को दिए गए एनेस्थीसिया को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि एनेस्थीसिया की अधिक मात्रा दिए जाने के कारण महिला को होश नहीं आया और उसकी हालत बिगड़ गई।
हालांकि, महिला और नवजात की मौत की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है। मेडिकल विशेषज्ञों की जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अस्पताल की जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही मौत के कारणों की स्थिति साफ हो सकेगी।
चार घंटे तक अस्पताल में चलता रहा हंगामा
जच्चा-बच्चा की मौत के बाद परिजनों का गुस्सा भड़क गया। उन्होंने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
करीब चार घंटे तक चले विरोध के बाद अस्पताल के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल और अस्पताल अधीक्षक राहुल मिश्रा मौके पर पहुंचे। अधिकारियों और परिजनों के बीच करीब दो घंटे तक बंद कमरे में बातचीत हुई।
प्रशासन की ओर से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का भरोसा मिलने के बाद परिजन शांत हुए।
दो नर्सें निलंबित, जांच कमेटी गठित
अस्पताल प्रशासन ने प्रथम दृष्टया लापरवाही की आशंका को देखते हुए ड्यूटी पर तैनात दो नर्सों को निलंबित कर दिया है। साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित की गई है।
अब जांच में यह देखा जाएगा कि महिला को अस्पताल में भर्ती करने से लेकर ऑपरेशन और डिलीवरी के बाद तक किस तरह का इलाज दिया गया। इसके अलावा परिजनों द्वारा लगाए गए पैसों की मांग और मेडिकल लापरवाही के आरोपों की भी जांच की जाएगी।
फिलहाल जच्चा-बच्चा की मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह और किसी की जिम्मेदारी तय हो पाएगी।



