
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में एक महीने के बच्चे को बेचने का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने चाइल्ड ट्रैफिकिंग के एक पूरे नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। सबसे पहले मां-बाप ने अपने बच्चे को फोन और गोल्ड खरीदने के लिए बेचा। इसके बाद खरीदार ने बच्चे को कहीं और बेच दिया। यह सिलसिला आगे भी जारी रहा। इस तरह एक महीने के नवजात को कुल 4 बार बेचा गया।
बच्चा आखिर में हैदराबाद पहुंचा। मामले में बच्चे के माता-पिता समेत 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।
माता-पिता ने 1.20 लाख में बच्चे को बेचापुलिस के मुताबिक, छत्रपति संभाजीनगर के मुकुंदवाड़ी इलाके में रहने वाले वंदना और योगेश कांबले ने अपने एक महीने के बच्चे को 1.20 लाख रुपए में बेच दिया। दोनों बीते 2-3 साल से लिव-इन रिलेशनशिप में थे और बच्चा नहीं चाहते थे।
यही कारण रहा कि कपल ने एक बिचौलिया महिला सीमा रेशवाल को बच्चा बेच दिया। इससे मिले पैसों से दंपती ने दो महंगे मोबाइल फोन और सोने की चेन खरीदी। पुलिस ने इन सामानों को जब्त भी कर लिया है। पुलिस की जांच में बच्चे को एक के बाद एक कई लोगों को सौंपे जाने की बात सामने आई है।
पहला सौदा: माता-पिता ने बच्चे को सीमा रेशवाल को 1.20 लाख रुपए में दिया।
दूसरा सौदा: रेशवाल ने बच्चे को पडेगांव की रहने वाली संगीता आव्हाड को 2.70 लाख रुपए में बेचा।
तीसरा सौदा: आव्हाड बच्चे को नांदेड ले गईं और वहां सुरेश गुंटुका को सौंप दिया। पुलिस ने उसे फर्जी डॉक्टर बताया है। उसने बच्चे को 3.50 लाख रुपए में खरीदा।
चौथा सौदा: इसके बाद गुंटुका ने बच्चे को अपने रिश्तेदार उमा खटकम के हवाले किया, जो हैदराबाद में रहती हैं। यह सौदा भी 3.50 लाख रुपए में हुआ।
बच्चा सुरक्षित, ‘साकार’ संस्था करेगी परवरिशमामला सामने आने के बाद पुलिस ने बच्चे को हैदराबाद से सुरक्षित बरामद किया और उसे महाराष्ट्र वापस लेकर आई। चाइल्ड वेलफेयर कमिटी के आदेश के बाद बच्चे को एक संस्था ‘साकार’ के सुपुर्द कर दिया गया। यह संस्था बच्चों की देखभाल के लिए एक आधिकारिक संस्था है।
पुलिस ने बच्चे की खरीद-फरोख्त में शामिल 7 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें बच्चे के माता-पिता के अलावा सीमा रेशवाल, संगीता आव्हाड और सुरेश गुंटुका शामिल हैं।
पुलिस सभी आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बच्चे को किन-किन लोगों के जरिए हैदराबाद तक पहुंचाया गया। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि आरोपियों का इससे पहले बच्चों की गैरकानूनी खरीद-फरोख्त के किसी और मामले से संबंध तो नहीं रहा है। मामले में आगे की जांच मुकुंडवाड़ी पुलिस कर रही है।



