PMOS Diet Indian Foods: पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम को मैनेज करने के लिए हमेशा महंगे सुपरफूड्स या स्पेशल डाइट प्लान की जरूरत नहीं होती है। हेल्दी लाइफ स्टाइल के साथ हमारी रसोई में मौजूद खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल कर इंसुलिन रेजिस्टेंस को मैनेज किया जा सकता है।

इन चीजों को डाइट में शामिल करके ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने, मीठा खाने की इच्छा कम करने और इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
PMOS से जूझ रहे लोगों में इंसुलिन रेजिस्टेंस और इंफ्लेमेशन जैसी समस्याएं आम होती हैं। ऐसे में खानपान में छोटेछोटे बदलाव भी स्वास्थ्य पर बड़ा असर डाल सकते हैं।
4 भारतीय फूड्स जो पीएमओएस कंट्रोल करने में कर सकते हैं मदद
भुना हुआ चना
न्यूट्रिशनिस्ट के अनुसार, छिलके वाला भुना चना पीएमओएस में काफी फायदेमंद हो सकता है। इसके छिलके में क्रोमियम नामक मिनरल पाया जाता है, जो इंसुलिन को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है। साथ ही इसमें मौजूद प्रोटीन मीठा खाने की इच्छा को भी कम करता है। हालांकि, यदि आपको गैस, पेट फूलना या अन्य पाचन संबंधी समस्याएं हैं, तो इसे अपनी पाचन क्षमता के अनुसार ही खाएं।
भुने चने
खरबूजा
खरबूजा उन कुछ फलों में शामिल है, जिनमें प्राकृतिक रूप से मायोइनोसिटोल पाया जाता है। यह तत्व इंसुलिन सिग्नलिंग और हेल्दी ओव्यूलेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
खरबूजा
मेथी के बीज
मेथी के बीजों को रात भर पानी में भिगोकर खाने की सलाह दी जाती है। इनमें घुलनशील फाइबर की भरपूर मात्रा होती है, जो ग्लूकोज के एब्जॉर्बशन की गति को धीमा करता है। इससे भोजन के बाद ब्लड शुगर और इंसुलिन में अचानक होने वाली बढ़ोतरी को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
मेथी दाना
दालचीनी
न्यूट्रिशनिस्ट भी मानते हैं कि अपनी चाय या कॉफी में थोड़ीसी दालचीनी मिलाना भी फायदेमंद हो सकता है। दालचीनी शरीर की कोशिकाओं में मौजूद इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता को बेहतर बनाने और ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में सहायक होती है।
दालचीनी
क्या है PMOS?
पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम यानी PMOS एक ऐसी स्थिति है, जिसमें हर माह महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी समस्याएं होती है। इसके कारण कई महिलाओं को अनियमित पीरियड्स, ओव्यूलेशन और प्रजनन संबंधी दिक्कतें, ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में परेशानी, पिंपल्स, चेहरे व शरीर पर अनचाहे बाल, हेयर फॉल, वेटलॉस या वेट गेन और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति नींद, मानसिक स्वास्थ्य और पूरी दिनचर्या को प्रभावित करती है।



