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यूपी में बिछने लगी सियासी बिसात, सपा के वोट छिनने की तैयारी साफ, रावण मास्टरस्ट्रोक से अखिलेश को देंगे मात!

Chandrashekhar Azad UP: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में सियासी बिसात बिछने लगी है। एक ओर राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बाद अखिलेश यादव को योगी आदित्यनाथ पर हमला बोलने का मौका मिल गया है। तो वहीं दूसरी ओर मायावती ने भी अपनी पार्टी से गैरजिम्मेदार नेताओं को हटाना शुरू कर दिया है। इस चुनावी रण में चंद्रशेखर आजाद रावण ने भी अपनी साख जमानी शुरू कर दी है। इस बार उनकी नजर अखिलेश के वोट बैंक को कम करने की नजर आ रही है। इस पर पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स ने भी इस चुनावी रण का गणित अभी से साफ कर दिया है।

यूपी में बिछने लगी सियासी बिसात, सपा के वोट छिनने की तैयारी साफ, रावण मास्टरस्ट्रोक से अखिलेश को देंगे मात!
यूपी में बिछने लगी सियासी बिसात, सपा के वोट छिनने की तैयारी साफ, रावण मास्टरस्ट्रोक से अखिलेश को देंगे मात!

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने 45 सीटों पर उम्मीदवार उतारकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के लिए नई राजनीतिक चुनौती खड़ी करने की कोशिश की है। पार्टी ने अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग, मुस्लिम और सिख समाज के नेताओं को मैदान में उतारकर पीडीए के समानांतर सामाजिक समीकरण साधने का प्रयास किया है।

45 उम्मीदवारों का सामाजिक समीकरण

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, 45 घोषित उम्मीदवारों में 18 अनुसूचित जाति , 16 अन्य पिछड़ा वर्ग , 10 मुस्लिम और एक सिख समुदाय से हैं। पार्टी ने लखनऊ छावनी, गोविंद नगर, विश्वनाथगंज सहित पांच सामान्य सीटों पर भी अनुसूचित जाति के उम्मीदवार उतारे हैं।

समुदायउम्मीदवारों की संख्याप्रतिशत
अनुसूचित जाति1840%
अन्य पिछड़ा वर्ग1636%
मुस्लिम1022%
सिख12%
कुल45100%

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्र सिंह रावत का कहना है कि उम्मीदवारों के सामाजिक समीकरण से स्पष्ट है कि आजाद समाज पार्टी ने सपा और कांग्रेस के सामने नई चुनौती पेश करने की रणनीति बनाई है। उनके अनुसार, बसपा के जनाधार में आई गिरावट के बाद आजाद समाज पार्टी अब तक खुद को उसके विकल्प के रूप में पेश कर रही थी, लेकिन 45 उम्मीदवारों की सूची बताती है कि अब वह बसपा के साथसाथ सपा और कांग्रेस को भी चुनौती देने की रणनीति पर काम कर रही है। 16 ओबीसी, 18 दलित, 10 मुस्लिम और एक सिख उम्मीदवार उतारकर पार्टी ने अपने चुनावी लक्ष्य का स्पष्ट संकेत दिया है।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक रतन मणि लाल का मानना है कि चंद्रशेखर आजाद ने इस बार अपनी चुनावी रणनीति बदलते हुए सीधे समाजवादी पार्टी के राजनीतिक आधार को चुनौती देने की कोशिश की है। शुरुआती दौर में चंद्रशेखर की राजनीति का केंद्र बसपा थी, लेकिन अब उन्होंने खुद को समाजवादी पार्टी के विकल्प के रूप में स्थापित करने की रणनीति अपनाई है।

प्रमुख राजनीतिक दलों की रणनीति

दलरणनीति / फोकस
आजाद समाज पार्टीदलित, ओबीसी, मुस्लिम और सिख वोटों पर फोकस
समाजवादी पार्टीPDA समीकरण
बहुजन समाज पार्टीपारंपरिक दलित वोट बैंक बचाने की चुनौती
भाजपाविपक्षी दलों के बीच मुकाबले पर नजर

पीडीए फॉर्मूले से मेल खाती रणनीति

रतन मणि लाल कहते हैं कि जिन सीटों पर उम्मीदवार उतारे गए हैं, वहां के सामाजिक समीकरण समाजवादी पार्टी के पीडीए फार्मूले से मेल खाते हैं। दलित, पिछड़े और मुस्लिम समुदाय पर फोकस बताता है कि चंद्रशेखर अब बसपा से ज्यादा सपा के वोट बैंक में राजनीतिक हस्तक्षेप करना चाहते हैं।

हालांकि, उनका कहना है कि फिलहाल आजाद समाज पार्टी का संगठन और चुनावी ढांचा इतना मजबूत नहीं है कि वह बड़े पैमाने पर सपा को चुनावी नुकसान पहुंचा सके। इसके बावजूद चंद्रशेखर ने के भीतर राजनीतिक असहजता जरूर पैदा कर दी है। आजाद समाज पार्टी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष सुनील चितौड़ ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी पार्टी स्वतंत्र राजनीतिक विचारधारा के साथ चुनावी मैदान में उतर रही है और किसी दल की ‘बीटीम’ नहीं है।

पार्टी अध्यक्ष के हाथों में फैसला

उन्होंने कहा कि पार्टी का लक्ष्य प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ना है और उम्मीदवारों की अगली सूची 10 से 12 दिनों के भीतर जारी की जाएगी। सुनील चितौड़ ने कहा कि राजनीति में गठबंधन की संभावनाएं हमेशा बनी रहती हैं। यदि भविष्य में किसी दल की ओर से बातचीत होती है तो इस पर अंतिम निर्णय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद करेंगे।

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सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को टिकट नहीं दिए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि पार्टी टिकट जाति नहीं, बल्कि विचारधारा और संगठन से जुड़ाव के आधार पर देती है। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा कि सपा की लड़ाई पिछड़ों, दलितों, अल्पसंख्यकों और वंचित वर्गों के अधिकारों की है।

उन्होंने कहा कि भाजपा के खिलाफ मुद्दे उठाने वाली हर राजनीतिक ताकत विपक्ष के संघर्ष को मजबूत करती है। को लेकर उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी उन्हें अपना राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नहीं मानती। उन्होंने स्पष्ट किया कि आजाद समाज पार्टी के साथ फिलहाल गठबंधन को लेकर कोई बातचीत या पहल नहीं हुई है। – एजेंसी इनपुट के साथ

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