
लखनऊ। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर उत्तर प्रदेश में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को अपने सरकारी आवास पर पत्रकारों से बातचीत में कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निर्वाचन आयोग को लेकर बिना ठोस आधार सवाल उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने से पहले संबंधित तथ्यों को सामने रखना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि SIR को लेकर विपक्ष की ओर से भ्रम की स्थिति पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। उनके मुताबिक, मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनाव प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसका उद्देश्य मतदाता सूची को व्यवस्थित और विश्वसनीय बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक दल को निर्वाचन प्रक्रिया पर आपत्ति है तो उसे तथ्यों और निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत अपनी बात रखनी चाहिए।
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‘संवैधानिक संस्था पर सवाल से पहले तथ्य दें’
योगी आदित्यनाथ ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों पर कहा कि आयोग एक संवैधानिक संस्था है। ऐसे में उस पर आरोप लगाने से पहले संबंधित तथ्य सार्वजनिक किए जाने चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर राजनीतिक लाभ के लिए चुनावी प्रक्रिया को लेकर जनता के बीच संदेह पैदा करने का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र केवल राजनीतिक दलों की जीतहार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक के मताधिकार से जुड़ी संवैधानिक व्यवस्था है। इसलिए चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची की शुचिता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
SIR को लेकर कांग्रेस ने मांगी पारदर्शिता
मुख्यमंत्री का बयान ऐसे समय आया है जब SIR और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने 26 सितंबर को आयोग के कामकाज और SIR प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग की थी। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सवाल आयोग के SIR कराने के अधिकार को लेकर नहीं, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और संस्थागत सहमति को लेकर हैं।
इससे पहले प्रदेश कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया था और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग की थी।
निर्वाचन आयोग ने SIR पर क्या कहा?
SIR को लेकर जारी विवाद के बीच निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर को अपनी बैठक के बाद कई फैसलों की जानकारी दी। आयोग के मुताबिक, SIR के दौरान जिन मतदाताओं को ‘अनमैप्ड’ या ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के आधार पर नोटिस जारी हुए हैं, उनके घर बूथ लेवल अधिकारी जाकर आवश्यक दस्तावेज एकत्र करेंगे और उन्हें ECINet पर अपलोड करेंगे। सामान्य परिस्थितियों में ऐसे मतदाताओं को सुनवाई के लिए ERO/AERO कार्यालय बुलाने की जरूरत नहीं होगी। असाधारण स्थिति में सुनवाई होगी और उसे प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन कराने की व्यवस्था की जाएगी।
आयोग ने जरूरत के मुताबिक हेल्प डेस्क और विशेष शिविर लगाने, ECINet की समीक्षा के लिए समिति गठित करने तथा भविष्य की बैठकों के एजेंडे पहले साझा करने और बैठक का विवरण जारी करने जैसे कदमों की भी जानकारी दी है।
आयोग बोला SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से हुए
निर्वाचन आयोग ने यह भी कहा कि SIR से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों को आयोग ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी है। आयोग के अनुसार, SIR का आदेश चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया और इससे जुड़े निर्णयों पर उसका यही रुख है।
इस बीच SIR की प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की ओर से पारदर्शिता और निर्णय प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजनीतिक दलों से तथ्य और प्रमाण के आधार पर अपनी आपत्तियां रखने की अपील की है।
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