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13 रुपये लेकर मुंबई पहुंचे थे प्रकाश मेहरा, किस्मत बदली तो अमिताभ बच्चन के बने ‘मसीहा’; ऐसी रही संघर्ष से सफलता तक की कहानी

मुंबई : हिंदी सिनेमा में कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो संघर्ष, जुनून और कामयाबी की मिसाल बन जाती हैं। मशहूर निर्देशक और निर्माता प्रकाश मेहरा की जिंदगी भी ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है। कभी जेब में सिर्फ 13 रुपये लेकर मायानगरी पहुंचे प्रकाश मेहरा ने अपनी मेहनत और लगन से बॉलीवुड में ऐसा मुकाम बनाया कि आगे चलकर वह सुपरस्टार अमिताभ बच्चन के करियर के सबसे अहम शख्सियतों में शामिल हो गए।

13 रुपये लेकर मुंबई पहुंचे थे प्रकाश मेहरा, किस्मत बदली तो अमिताभ बच्चन के बने ‘मसीहा’; ऐसी रही संघर्ष से सफलता तक की कहानी

13 जुलाई 1939 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर में जन्मे प्रकाश मेहरा का बचपन मुश्किलों से भरा रहा। कम उम्र में मां का निधन हो गया और पिता भी परिवार से दूर हो गए। रिश्तेदारों के बीच पलेबढ़े प्रकाश मेहरा के मन में बचपन से ही फिल्मों और संगीत के प्रति गहरी रुचि थी। यही जुनून उन्हें छोटी उम्र में मुंबई खींच लाया।

13 रुपये से शुरू हुआ सफर

कहा जाता है कि जब प्रकाश मेहरा सपनों की नगरी मुंबई पहुंचे, तब उनके पास सिर्फ 13 रुपये थे। फिल्म इंडस्ट्री में जगह बनाना आसान नहीं था। शुरुआती दिनों में उन्होंने कई छोटेमोटे काम किए। आर्थिक परेशानियों के बीच उन्होंने नाई की दुकान पर भी काम किया, लेकिन फिल्मों में कुछ बड़ा करने का सपना कभी नहीं छोड़ा।

धीरेधीरे उनकी मुलाकात फिल्म जगत के लोगों से हुई और उन्होंने प्रोडक्शन कंट्रोलर के तौर पर काम शुरू किया। इसके बाद सहायक निर्देशक के रूप में काम करते हुए उन्होंने फिल्म निर्माण की बारीकियां सीखीं और आखिरकार निर्देशन की दुनिया में कदम रखा।

पहली ही फिल्म से मिली पहचान

साल 1968 में प्रकाश मेहरा ने फिल्म हसीना मान जाएगी से बतौर निर्देशक शुरुआत की। फिल्म को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला और इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने ‘मेला’, ‘समाधि’ और ‘आनबान’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया।

लेकिन उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ साल 1973 में आया, जब उन्होंने फिल्म जंजीर बनाई।

‘जंजीर’ ने बदली अमिताभ बच्चन की किस्मत

उस दौर में अमिताभ बच्चन की कई फिल्में लगातार असफल हो रही थीं और उन्हें इंडस्ट्री में संघर्ष कर रहे अभिनेता के तौर पर देखा जा रहा था। ऐसे समय में प्रकाश मेहरा ने उन पर भरोसा जताया और उन्हें ‘जंजीर’ में मुख्य भूमिका दी।

फिल्म की जबरदस्त सफलता ने अमिताभ बच्चन को रातोंरात सुपरस्टार बना दिया। इसी फिल्म से उनका ‘एंग्री यंग मैन’ वाला अंदाज सामने आया और हिंदी सिनेमा का एक नया दौर शुरू हुआ।

अमिताभप्रकाश मेहरा की जोड़ी ने दिए कई हिट

‘जंजीर’ के बाद प्रकाश मेहरा और अमिताभ बच्चन की जोड़ी ने कई यादगार फिल्में दीं। इनमें हेरा फेरी’, ‘खून पसीना’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘लावारिस’, ‘नमक हलाल’ और ‘शराबी जैसी सुपरहिट फिल्में शामिल हैं।

इन फिल्मों ने दोनों को हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक खास पहचान दिलाई।

मिला लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान

प्रकाश मेहरा ने सिर्फ निर्देशन ही नहीं किया, बल्कि कई फिल्मों का निर्माण भी किया। ‘दलाल’, ‘जिंदगी एक जुआ’ और ‘बाल ब्रह्मचारी’ जैसी फिल्मों से उन्होंने बतौर निर्माता भी अपनी पहचान बनाई।

साल 2006 में उन्हें इंडिया मोशन पिक्चर डायरेक्टर्स एसोसिएशन की ओर से लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। निर्माता के तौर पर भी उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान मिला।

69 साल की उम्र में हुआ निधन

प्रकाश मेहरा का निधन 17 मई 2009 को मुंबई में हुआ। वह 69 वर्ष के थे। बीमारी के कारण उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी बनाई फिल्में आज भी हिंदी सिनेमा के इतिहास की अमूल्य धरोहर मानी जाती हैं।

13 रुपये से शुरू हुआ उनका सफर इस बात की मिसाल है कि बड़े सपने और लगातार मेहनत इंसान को फर्श से अर्श तक पहुंचा सकते हैं।

 

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