
लखनऊ, अमृत विचार। चीनी के बढ़ते भाव ने रक्षाबंधन के त्योहार पर कड़वाहट घोल दी है। पिछले करीब 20 दिनों में चीनी के दाम 20 रुपये बढ़कर 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं। व्यापारी त्योहार तक भाव 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की बात कह रहे हैं। कारोबारियों के मुताबिक, बढ़ते भाव का प्रमुख कारण चीनी की जमाखोरी, आपूर्ति से अधिक मांग, सट्टेबाजी, गन्ने के उत्पादन में कमी और इथेनॉल सम्मिषण नीति है। पहली अगस्त के आसपास चीनी 45 रुपये प्रति किलो बिक रही थी।
त्योहारी सीजन में 70 रुपये तक पहुंच सकता है भाव
फतेहगंज बाजार के थोक चीनी व्यापारी अमित अग्रवाल ने कहा कि इस गति से चीनी का भाव कभी नहीं बढ़ा। मेरी यादाश्त में 20 रुपये प्रति किलोग्राम की तेजी कभी नहीं आई। त्योहारी सीजन में इतने अधिक भाव बढ़ने का असर मिठाई से लेकर बेकरी कारोबार पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जिस तेजी से दाम बढ़ रहे हैं, उस पर अगर सरकार ने तत्काल संज्ञान नहीं लिया तो प्रति किलो भाव 70 रुपये तक पहुंचने में देर नहीं लगेगी। मिलों से ही चीनी महंगी आ रही है।
गन्ने की फसल प्रभावित होने की आशंका
सिटी स्टेशन के रचित सिंघल और दूसरे व्यापारी राधेश्याम ने कहा कि चीनी उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्यों में मानसून के चलते गन्ने की फसल प्रभावित हुई है। इससे चीनी का उत्पादन घटने की आशंका है। गन्ने के उत्पादन में भी कमी की सूचना मिल रही है। इसके अलावा चीनी के बढ़े दामों का कारण एथेनॉल नीति एक बड़ी वजह हो सकती है।
मिठाई और बेकरी उत्पादों पर भी पड़ेगा असर
पांडेयगंज व्यापार मंडल के अध्यक्ष राजेन्द्र अग्रवाल ने बताया कि अगर जल्द ही चीनी की बेकाबू कीमतों पर लगाम नहीं लगी तो आने वाले त्योहारी सीजन में मिठाइयों और बेकरी उत्पादों के दाम भी आसमान छूने लगेंगे।


