आगरा के एत्मादपुर क्षेत्र में UGC के नियमों को लेकर युवाओं और प्रदर्शनकारियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और झड़प भी देखने को मिली. प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर ट्रैक्टरों पर सवार होकर आगरा कलेक्ट्रेट की तरफ कूच कर रहे थे. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पूरे आगरा जनपद में पहले से ही बीएनसी की धारा 163 लागू कर दी गई थी.

के टेडीबगिया से पहले नाई की सराय के पास पुलिस और पीएसी ने भारी बैरिकेडिंग कर सभी रास्तों को सील कर दिया और प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया.
अधिकारियों के समक्ष ज्ञापन देने के बाद जब प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़ने की कोशिश की, तो पुलिस के साथ उनकी झड़प हो गई. हालात को बिगड़ता देख पुलिस ने हल्के बल का प्रयोग किया और प्रदर्शनकारियों को खदेड़ कर आगे बढ़ने से रोक दिया.
सितंबर से अब तक हो चुके हैं तीन बड़े प्रदर्शन
आगरा के एत्मादपुर क्षेत्र में UGC के विरोध में सितंबर में अब तक तीन बड़े प्रदर्शन हुए हैं. एत्मादपुर, जहां प्रदर्शन हो रहा है, वह क्षत्रिय बाहुल्य क्षेत्र हैं. इसमें 22 गांव होने के कारण इस इलाके को क्षत्रियों की बाइसी भी कहा जाता है.
इससे पहले भी युवाओं ने 1 सितंबर को हाईवे जाम किया था. क्षत्रिय सभा के बैनर तले प्रदर्शनकारी एत्मादपुर तहसील पहुंचे थे और हाईवे जाम कर दिया था. उस समय भी पुलिस की ओर से हल्का लाठीचार्ज किया गया था. इसके खिलाफ प्रदर्शनकारियों ने धरना दिया था. इस आरोप के बाद यहां के दारोगा को निलंबित कर दिया गया था. उसके बाद सवर्ण समाज और सिस्टम सुधार संगठन ने एत्मादपुर से कलेक्ट्रेट तक ट्रैक्टर मार्च भी निकाला गया था.
UGC के नए नियमों का क्यों हो रहा विरोध?
UGC ने 13 जनवरी को ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026’ के तहत नए नियमों को नोटिफाई किया है. इसके तहत कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में जाति आधारित भेदभाव को रोकने की पहल की गई है. और इसके लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन एवं मॉनिटरिंग टीमें बनाने के निर्देश जारी किये गए हैं. ये टीमें खासतौर पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्ग के छात्रों की शिकायतों को देखेंगी.
सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता एवं जवाबदेही लाना है. हालांकि नियमों को सामान्य श्रेणी के खिलाफ बताकर विरोध और प्रदर्शन हो रहे हैं.
आलोचकों का कहना है कि इस नए नियम के तहत सवर्ण छात्रों को स्वाभाविक अपराधी बना दिया गया है. प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि नए नियम कॉलेज या विश्वविद्यालय परिसर में उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं. इससे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में अराजकता पैदा होगी.



