IndiaPunjabTrending

Punjab New Rules: एक ही प्लॉट पर घर, दुकान और ऑफिस की मंजूरी, 7 दिन में पास होगा नक्शा

चंडीगढ़ 

Punjab New Rules: एक ही प्लॉट पर घर, दुकान और ऑफिस की मंजूरी, 7 दिन में पास होगा नक्शा

 पंजाब सरकार ने शहरी विकास को गति देने और एकीकृत परियोजनाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पंजाब अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट बिल्डिंग नियम, 2026 अधिसूचित कर दिए हैं।

नए नियमों में मिक्स्डयूज परियोजनाओं के लिए पहली बार विस्तृत नियामकीय ढांचा तय किया गया है। साथ ही 21 मीटर तक ऊंचाई वाले भवनों के लिए सेल्फसर्टिफिकेशन की व्यवस्था लागू की गई है, जिसके तहत निर्धारित शर्तें पूरी होने पर सात दिनों के भीतर भवन योजना को स्वीकृत माना जाएगा। सरकार का कहना है कि इन बदलावों से मंजूरी प्रक्रिया तेज होगी और नियोजित शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा।पंजाब में अब एक ही बड़े प्लॉट पर घर और कारोबार साथसाथ चलाना आसान होगा। चुनाव से पहले राज्य सरकार ने ‘पंजाब अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट बिल्डिंग रूल्स, 2026’ को मंजूरी दे दी है।

पंजाब में अब एक ही बड़े प्लॉट पर घर और कारोबार साथसाथ चलाना आसान होगा। चुनाव से पहले राज्य सरकार ने ‘पंजाब अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट बिल्डिंग रूल्स, 2026’ को मंजूरी दे दी है।

  • मिक्स्डयूज परियोजनाओं के लिए पहली बार स्पष्ट नियम लागू।
  • न्यूनतम 8,000 वर्गमीटर भूमि और 24 मीटर चौड़ी सड़क अनिवार्य।
  • 21 मीटर तक ऊंचाई वाले भवनों के लिए सेल्फसर्टिफिकेशन।
  • सात दिन में कोई आपत्ति नहीं आने पर नक्शा स्वीकृत माना जाएगा।
  • मल्टीलेवल कार पार्किंग के लिए अलग निर्माण मानक।
  • 15 प्रतिशत हरित क्षेत्र, पार्किंग और अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य।
  • बड़े अस्पताल, नियमित स्कूलकॉलेज और प्रदूषणकारी उद्योगों को अनुमति नहीं।

क्या है मिक्स्डयूज प्रोजेक्ट?
नियमों के अनुसार मिक्स्डयूज प्रोजेक्ट ऐसा एकीकृत विकास होगा, जिसमें एक ही परिसर में आवासीय, व्यावसायिक, कार्यालय, आईटी/आईटीईएस और अन्य अनुमत गतिविधियां संचालित की जा सकेंगी। इसका उद्देश्य लोगों को रहने, काम करने और आवश्यक सेवाएं एक ही परिसर में उपलब्ध कराना है। परियोजनाओं के लिए कम से कम 8,000 वर्गमीटर क्षेत्रफल व 24 मीटर चौड़ी संपर्क सड़क अनिवार्य होगी।

  • निर्माण के नए मानक क्या हैं?
  • सरकार ने मिक्स्डयूज परियोजनाओं के लिए निर्माण संबंधी स्पष्ट मानक तय किए हैं।
  • अधिकतम ग्राउंड कवरेज 45 प्रतिशत।
  • 24 मीटर सड़क पर एफएआर 2.5।
  • 30 मीटर सड़क पर एफएआर 3.0।
  • 30 मीटर से अधिक चौड़ी सड़क होने पर एयरपोर्ट और अन्य वैधानिक मंजूरियों के अधीन एफएआर की ऊपरी सीमा नहीं।
  • भवन की ऊंचाई पर सामान्य सीमा नहीं, लेकिन एयरपोर्ट और अन्य नियामकीय स्वीकृतियां अनिवार्य रहेंगी।
  • किन गतिविधियों को मिलेगी अनुमति और किन पर रोक?
  • अनुमति: आईटी और आईटीईएस इकाइयां।
  • व्हाइट कैटेगरी के गैरप्रदूषणकारी उद्योग।
  • क्रेच, प्लेस्कूल और नर्सरी।
  • अनुमति नहीं: नियमित स्कूल और कॉलेज।
  • 10 से अधिक बिस्तरों वाले अस्पताल।
  • प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग।

हरित क्षेत्र और सुरक्षा पर भी जोर
प्रत्येक परियोजना में कम से कम 15 प्रतिशत क्षेत्र हरित क्षेत्र के रूप में विकसित करना होगा। इसके अलावा न्यूनतम छह मीटर सेटबैक, पर्याप्त पार्किंग, अग्निशमन व्यवस्था और संरचनात्मक सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होगा।

आवासीय भवनों के लिए क्या बदला?
आवासीय भवनों में प्लिंथ लेवल सड़क की क्राउन लेवल से 600 मिलीमीटर तक रखने की अनुमति दी गई है। बेसमेंट वाले भवनों को निर्धारित शर्तों के तहत अतिरिक्त छूट मिलेगी। अधिकतम अनुमेय ऊंचाई 13 मीटर ही रहेगी, हालांकि ऊंचाई मापने के नियमों में कुछ तकनीकी संशोधन किए गए हैं।

  • मल्टीलेवल कार पार्किंग के लिए अलग नियम
  •     संशोधित नियमों में पहली बार स्टैंडअलोन मल्टीलेवल कार पार्किंग के लिए अलग प्रावधान किए गए हैं।
  •     न्यूनतम 4,000 वर्गमीटर भूमि।
  •     80 प्रतिशत तक ग्राउंड कवरेज।
  •     दो मंजिलों तक सीमित व्यावसायिक उपयोग की अनुमति।
  • सेल्फसर्टिफिकेशन क्या है और कैसे करेगा काम?
  • भवन निर्माण की मंजूरी प्रक्रिया को तेज करने के लिए सरकार ने 21 मीटर तक ऊंचाई वाले भवनों के लिए सेल्फसर्टिफिकेशन लागू किया है।

स्वीकृत लेआउट में आने वाले ऐसे भवनों के नक्शे पैनल में शामिल आर्किटेक्ट स्वयं प्रमाणित कर सकेंगे। यह सुविधा प्लॉट के आकार या उपयोग के प्रकार से प्रभावित नहीं होगी। स्वीकृत लेआउट में स्थित एससीओ और एससीएफ भी इसके दायरे में आएंगे, यदि वहां पहले से आर्किटेक्चरल कंट्रोल लागू हैं। आवेदन जमा होने के बाद सक्षम प्राधिकारी स्वत: रसीद जारी करेगा। यदि सात दिनों के भीतर कोई आपत्ति दर्ज नहीं होती है तो नक्शा स्वीकृत माना जाएगा। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि रैंडम निरीक्षण जारी रहेंगे। यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया तो भवन मालिक और संबंधित आर्किटेक्ट दोनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

क्या होता है मिक्सयूज प्रोजेक्ट?
नए नियमों के मुताबिक, मिक्सयूज प्रोजेक्ट ऐसे बड़े परिसर होंगे, जहां एक ही जगह पर घर, दुकानें, दफ्तर, आईटी/आईटीईएस कंपनियां और सरकार से मंजूर अन्य गतिविधियां एक साथ चल सकेंगी। इसका मकसद लोगों को रहने, काम करने और रोजमर्रा की जरूरत की सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध कराना है, ताकि अलगअलग जगह जाने की जरूरत कम पड़े। ऐसे प्रोजेक्ट के लिए कम से कम 8,000 वर्गमीटर जमीन और 24 मीटर चौड़ी संपर्क सड़क होना जरूरी होगा।

जानिए कैसे होगा निर्माण
    वर्टिकल मिक्सयूज: इस मॉडल में एक ही बहुमंजिला इमारत की अलगअलग मंजिलों का अलगअलग इस्तेमाल होगा। लोअर ग्राउंड और ग्राउंड फ्लोर पर रिटेल दुकानें, शोरूम, बड़े डिपार्टमेंटल स्टोर और रेस्टोरेंट होंगे। पहली और दूसरी मंजिल पर कॉर्पोरेट ऑफिस, बैंक, आईटी कंपनियों के वर्कस्टेशन और क्लीनिक बनाए जा सकेंगे। वहीं, ऊपरी मंजिलें पूरी तरह रहने के लिए होंगी। यहां लग्जरी अपार्टमेंट, स्टूडियो अपार्टमेंट और पेंटहाउस बनाए जा सकेंगे। इससे लोगों को लिफ्ट से नीचे उतरते ही ऑफिस, बाजार और दूसरी सुविधाएं मिल जाएंगी। इससे गाड़ियों का इस्तेमाल कम होगा और समय की भी बचत होगी।

    होरिजेंटल मिक्सयूज: अगर प्लॉट का आकार बड़ा होगा, तो एक ही परिसर में अलगअलग टावर बनाए जा सकेंगे। एक हिस्से में कमर्शियल ब्लॉक होगा, जहां दुकानें और ऑफिस होंगे। वहीं दूसरे, अपेक्षाकृत शांत हिस्से में रेजिडेंशियल ब्लॉक बनाया जाएगा, जहां सिर्फ परिवार रहेंगे। इस व्यवस्था में घर और काम की जगह अलगअलग टावर में होंगी। इससे परिवारों की प्राइवेसी और सुरक्षा बनी रहेगी, लेकिन दोनों एक ही कैंपस की सड़क, पार्किंग और दूसरी साझा सुविधाओं से जुड़े रहेंगे।

इन नियमों का संभावित असर क्या होगा?
सरकार का मानना है कि नए नियमों से भवन निर्माण की मंजूरी में लगने वाला समय कम होगा, निवेश को बढ़ावा मिलेगा और बड़े एकीकृत विकास परियोजनाओं का रास्ता आसान होगा। इससे आवासीय, व्यावसायिक और आईटी गतिविधियों को एक ही परिसर में विकसित करने की अवधारणा को बल मिलेगा। दूसरी ओर, विशेषज्ञों के अनुसार सेल्फसर्टिफिकेशन व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निरीक्षण और जवाबदेही की प्रणाली कितनी प्रभावी रहती है। यदि निगरानी मजबूत रही तो यह व्यवस्था मंजूरी प्रक्रिया को तेज करने के साथ पारदर्शिता भी बढ़ा सकती है।

पंजाब भवन नियम, 2026 केवल निर्माण संबंधी तकनीकी बदलाव नहीं हैं, बल्कि राज्य की शहरी विकास नीति में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत भी हैं। मिक्स्डयूज परियोजनाओं को प्रोत्साहन, समयबद्ध मंजूरी और जवाबदेही आधारित सेल्फसर्टिफिकेशन व्यवस्था भविष्य में पंजाब के रियल एस्टेट और शहरी नियोजन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

सेल्फसर्टिफिकेशन के बारे में जानिए
बिल्डिंग का नक्शा जल्दी मंजूर हो सके, इसके लिए सरकार ने 21 मीटर तक ऊंची इमारतों के लिए सेल्फ सर्टिफिकेशन की सुविधा शुरू की है। इस व्यवस्था में सरकार के पैनल में शामिल आर्किटेक्ट खुद ही भवन का नक्शा नियमों के मुताबिक होने का प्रमाण देंगे।

इसके बाद हर मामले में लंबी सरकारी जांच का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यह सुविधा प्लॉट कितना बड़ा है या उस पर घर, दुकान या ऑफिस बनना है, इससे प्रभावित नहीं होगी। स्वीकृत लेआउट में आने वाले एससीओ और एससीएफ भी इसके दायरे में आएंगे, अगर वहां पहले से आर्किटेक्चरल कंट्रोल लागू हैं।

आवेदन जमा करते ही संबंधित अधिकारी की ओर से रसीद जारी कर दी जाएगी। अगर 7 दिन के भीतर कोई आपत्ति नहीं आती, तो नक्शा अपने आप मंजूर माना जाएगा। हालांकि, सरकार जरूरत पड़ने पर औचक जांच करती रहेगी। अगर जांच में नियमों का उल्लंघन मिला, तो भवन मालिक और नक्शा प्रमाणित करने वाले आर्किटेक्ट, दोनों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

आवासीय भवनों के लिए क्या बदला
नए नियमों के मुताबिक, अब घर का फर्श सड़क के बीच वाले स्तर से 600 मिलीमीटर तक ऊंचा बनाया जा सकेगा। अगर मकान में बेसमेंट बनाया जाता है, तो तय शर्तें पूरी करने पर कुछ अतिरिक्त रियायतें भी मिलेंगी।

हालांकि, घर की अधिकतम ऊंचाई 13 मीटर ही रहेगी। सरकार ने सिर्फ ऊंचाई मापने के तरीके में कुछ तकनीकी बदलाव किए हैं, लेकिन इमारत की तय अधिकतम ऊंचाई में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply