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​माथे पर ठंडी पट्टी रखने से नहीं उतरता बुखार? आप भी तो नहीं करते हैं ये गलतियां

बुखार आना बदलते मौसम की आम समस्याओं में से एक है. खासकर बच्चे इसके प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं. अगर शरीर का टेम्परेचर ज्यादा बढ़ जाए तो ठंडी पट्टी की सेंक करने की सलाह दी जाती है. इससे शरीर के तापमान को कम करने में मदद मिलती है, लेकिन अगर इसमें कुछ गलतियां की जाएं तो इससे बुखार नहीं उतरता है. सबसे मुख्य गलती जो लोग करते हैं वो है सिर्फ माथे पर ठंडी पट्टी करते रहना. एक्सपर्ट कहते हैं कि आपको लगता है कि इससे बुखार कम हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं होता है. जान लेते हैं कि स्पन्जिंग में कौन सी गलतियां न करें और क्या है इसका सही तरीका.

​माथे पर ठंडी पट्टी रखने से नहीं उतरता बुखार? आप भी तो नहीं करते हैं ये गलतियां

बुखार के मुख्य कारण की बात करें तो यह होता है जब हमारे शरीर में मौजूद इम्यूनिटी किसी बाहरी संक्रमण या बीमारी से लड़ती है. दरअसल इस स्वाभाविक प्रक्रिया के दौरान शरीर का तापमान 98.6°F से ज्यादा बढ़ जाता है. जान लेते हैं कि बुखार आने पर सिंकाई करते वक्त क्या ध्यान में रखें.

सिर्फ माथे पर पट्टी करते रहना…

बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मोहित शेट्टी ने बताया है कि बुखार के दौरान किस तरह से स्पन्जिंग करनी चाहिए. वह कहते हैं कि सिर्फ माथे पर गीला कपड़ा रखने से बुखार नहीं उतरेगा. पेरेंट्स ये गलती करते हैं कि ज्यादातर बस माथे की ही सिंकाई करते रहते हैं. डॉ. मोहित शेट्टी ने इसे बॉलीवुड स्टाइल स्पन्जिंग बताया है, क्योंकि ज्यादातर फिल्मों में माथे पर ही पट्टी रखते हुए दिखाया जाता है. उनका कहना है कि बुखार आने पर शरीर का तापमान कम करने के लिए स्पन्जिंग का तरीका असल जिंदगी में बिल्कुल अलग है.

कैसा लेना चाहिए पानी?

बहुत सारे लोग स्पन्जिंग के लिए फ्रिज का ठंडा पानी ले लेते हैं. ये बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए. डॉक्टर मोहित शेट्टी का कहना है कि आप या तो हल्का गुनगुना पानी लें या फिर आपको नॉर्मल रूम टेम्परेचर वाला नलटंकी का ताजा पानी लेना चाहिए.

कैसे करें स्पन्जिंग?

आपको एक साफ कॉटन के कपड़े को लेकर सिर से पांव तक बच्चे की स्पन्जिंग करनी चाहिए. जब तक आप बच्चे की स्पन्जिंग करें उसके कपड़ों को हल्का रखना चाहिए और चाहे तो पंखा भी चला सकते हैं.

स्पन्जिंग में ये बात रखें ध्यान

आप जब कॉटन का कपड़ा बच्चे की बॉडी पर रब करते हैं तो शरीर की त्वचा गीली हो जाती है. उसे पहले पूरी तरह से सूखने दें. इसे इवैपोरेशन की प्रक्रिया यानी वाष्पीकरण कहा जाता है. इससे ही बॉडी का टेम्परेचर कम होता है, इसलिए जब शरीर सूख जाए तो उसके बाद ही दोबारा से स्पन्जिंग करें. अक्सर लोग ये गलती करते हैं कि शरीर को सूखने नहीं देते हैं और बारबार कपड़ा पानी में भिगोकर शरीर को पोंछते रहते हैं.

बुखार आने पर ये ध्यान रखें

  • बुखार के लक्षण दिख रहे हैं तो सिर्फ शरीर को छूकर अंदाजा नहीं लगाना चाहिए बल्कि थर्मामीटर से सही टेम्परेचर पता करें.
  • शरीर का टेम्परेचर ज्यादा हो रहा है तो दवा के साथ ही डॉक्टर की सलाह पर आपको स्पंजिंग करनी चाहिए.
  • बुखार में शरीर को हाइड्रेट करना जरूरी होता है. ऐसे में कोशिश करें कि पानी पिलाते रहें.
  • बच्चे हो या बड़े, बुखार आने पर अपनी मर्जी से दवा न दें, बल्कि डॉक्टर की बताई गई मेडिसिन ही देनी चाहिए.
  • बुखार आने पर रिकवर करने में आराम सबसे ज्यादा जरूरी आता है, इसलिए जितना हो सके रेस्ट करें.

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