Agra Cantt Railway Station: भारतीय रेलवे देश की जीवनरेखा मानी जाती है। हर दिन करोड़ों यात्री सुरक्षित सफर कर अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं। यात्रियों की सुरक्षा और रेल नेटवर्क को सुरक्षित रखने के लिए रेलवे लगातार नई तकनीक और सुरक्षा व्यवस्था विकसित कर रहा है। इसके बावजूद मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोह रेलवे को अब भी सबसे आसान ट्रांजिट रूट के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।

रेल मार्ग से हो रहा मादक पदार्थों की तस्करी
उड़ीसा और भुवनेश्वर से गांजा तथा अन्य मादक पदार्थों की खेप देश के विभिन्न राज्यों तक पहुंचाने के लिए तस्कर लंबे समय से रेल मार्ग का सहारा लेते रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती के कारण तस्करी में पहले की तुलना में कमी जरूर आई है, लेकिन यह पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि तस्कर खुद सामने आने के बजाय गरीब और जरूरतमंद लोगों को लालच देकर वाहक बना देते हैं।
कार्रवाई के दौरान अक्सर यही छोटे कैरियर पुलिस के हत्थे चढ़ते हैं, जबकि पूरे नेटवर्क को संचालित करने वाले बड़े माफिया कानून की पकड़ से दूर रह जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक इन गिरोहों के सरगनाओं तक जांच नहीं पहुंचेगी, तब तक मादक पदार्थों की तस्करी पर पूरी तरह लगाम लगाना मुश्किल रहेगा।
जीआरपी ने दो तस्करों को किया गिरफ्तार
इसी कड़ी में शनिवार को पर जीआरपी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो तस्करों को गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से करीब 29 किलोग्राम अवैध गांजा बरामद किया गया, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत लगभग छह लाख रुपये बताई जा रही है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 45 वर्षीय साधूराम पुत्र पालाराम तथा 19 वर्षीय रामफल पुत्र साधूराम के रूप में हुई है। दोनों पंजाब के संगरूर जिले के थाना मुनक क्षेत्र के निवासी हैं। जीआरपी दोनों आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गांजे की खेप कहां से लाई गई थी, इसे किसे सौंपा जाना था और इसके पीछे सक्रिय में कौनकौन लोग शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि पूछताछ से इस पूरे गिरोह से जुड़े अहम सुराग मिल सकते हैं।



