
मथुरा जिला कारागार में बंदियों के सुधार और उनके पुनर्वास के लिए अलग-अलग तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. इसी कड़ी में आगामी रक्षाबंधन पर्व को देखते हुए महिला बंदियों को इको-फ्रेंडली राखियां बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. एक सामाजिक संस्था की ओर से महिला बंदियों को यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
20 महिला बंदियों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
इस कार्यक्रम में जिला कारागार की 20 महिला बंदियां शामिल हैं. इन्हें इको-फ्रेंडली राखियां तैयार करना सिखाया जा रहा है. राखियां बनाने को लेकर महिला बंदियों में भी काफी उत्साह देखने को मिल रहा है. इस बार राखियां तैयार करने में एक खास तरह का प्रयोग भी किया जा रहा है. इनमें फूलों और सब्जियों के बीजों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे राखी रक्षाबंधन के बाद भी उपयोगी बनी रहे.
राखी से तैयार हो सकेगा पौधा
इन इको-फ्रेंडली राखियों की खासियत यह है कि त्योहार के बाद इन्हें फेंकने की जरूरत नहीं होगी. राखी में इस्तेमाल किए गए फूल और सब्जियों के बीजों को घर के गमले या गार्डन में लगा कर नया पौधा उगाया जा सकता है. ऐसा करने पर समय के साथ इन बीजों से फूल या सब्जियों का पौधा तैयार हो सकेगा. इस तरह राखी का इस्तेमाल होने के बाद भी उससे पौधा तैयार करने की कोशिश की जा रही है.
रोज बन रही हैं 200 राखियां
जिला कारागार अधीक्षक अंशुमान गर्ग के मुताबिक, इस समय महिला बंदियों को इको-फ्रेंडली राखियां बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. उन्होंने बताया कि 20 महिला बंदियां इस काम को सीख रही. फिलहाल प्रतिदिन करीब 200 राखियों का निर्माण किया जा रहा है. इस बार राखियों को पहले से अलग बनाने के लिए नया प्रयोग भी किया गया. इसमें मोतियों की मदद से आकर्षक राखियां तैयार की जा रही हैं.
जेल के बाहर लगेगा राखियों का स्टॉल
महिला बंदियों द्वारा तैयार की जा रही राखियों को आम लोगों तक पहुंचाने की भी व्यवस्था बनाई गई है. इन राखियों की बिक्री के लिए जिला कारागार के गेट के बाहर स्टॉल लगाया जाएगा. जिला कारागार अधीक्षक अंशुमान गर्ग ने बताया कि राखियों का स्टॉल मुलाकात घर के बाहर लगाया जाएगा. यहां आम जनमानस इन राखियों को खरीद सकेगा. राखियां लागत मूल्य पर बिक्री के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी.



