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रामलला चढ़ावा चोरी मामला : टिन्नू यादव का नाम लेने पर नहीं होती थी चेकिंग, SIT जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे

अयोध्या : रामलला के चढ़ावे में कथित चोरी के मामले की जांच में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। सूत्रों के मुताबिक, दान की गणना में शामिल कर्मचारी बेहद सुनियोजित तरीके से काम करते थे और उनका व्यवहार ऐसा होता था कि किसी को उन पर संदेह न हो। जांच में सामने आया है कि वे गणना कक्ष में न तो आपस में बातचीत करते थे और न ही एकदूसरे की ओर देखते थे। बाहर भी वे ऐसा व्यवहार करते थे, मानो एकदूसरे को जानते ही न हों।

रामलला चढ़ावा चोरी मामला : टिन्नू यादव का नाम लेने पर नहीं होती थी चेकिंग, SIT जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे

सूत्रों के अनुसार, चोरी की पूरी प्रक्रिया पहले से तय रहती थी। कथित तौर पर नकदी निकालकर उसे बाथरूम या अन्य स्थानों पर छिपाया जाता था और बाद में सुरक्षाकर्मियों की नजर से बचाकर बाहर ले जाया जाता था। केवल कभीकभार साथ में पार्टी करने के दौरान ही उनके बीच घनिष्ठता दिखाई देती थी।

जांच कर रही एसआईटी को पूर्व में गणना कार्य में शामिल रहे एक बैंक कैशियर ने बताया कि पहले सुरक्षा व्यवस्था काफी सख्त थी। गणनाकर्मियों की गहन तलाशी ली जाती थी और उन्हें विशेष ड्रेस पहनाकर ही गणना कक्ष में प्रवेश दिया जाता था। हालांकि बाद में किसी के निर्देश पर इन व्यवस्थाओं में बदलाव कर दिया गया।

सूत्रों के मुताबिक, कैशियर ने यह भी दावा किया कि मंदिर परिसर में चार लोगों का विशेष प्रभाव था। इनमें ट्रस्टी चंपत राय, अनिल मिश्र, व्यवस्थापक गोपाल राव और टिन्नू यादव का नाम शामिल बताया गया है। उसके अनुसार, टिन्नू यादव का नाम लेने पर परिसर में कहीं भी आनेजाने में कोई रोकटोक नहीं होती थी। वॉकीटॉकी होने के कारण वह कई बार लोगों की मदद भी करता था।

करीब 10×15 फीट के गणना कक्ष में 10 सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में दानपात्रों से नकदी और सिक्के निकाले जाते थे। इस दौरान ट्रस्ट और बैंक के कर्मचारी मौजूद रहते थे। पहले नकदी की छंटनी होती थी, फिर गिनती और बंडलिंग की जाती थी, जबकि सिक्कों को अलग झोलों में रखा जाता था।

गणना कक्ष तक पहुंचने के लिए कर्मचारियों को कई स्तर की सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ता था। मुख्य द्वार पर पुलिस द्वारा तलाशी, हुंडी कार्यालय में दोबारा जांच, उपस्थिति दर्ज कराना, मोबाइल और निजी सामान लॉकर में जमा करना तथा विशेष ड्रेस पहनना अनिवार्य था। इसके बाद एसआईएस के सुरक्षाकर्मी पहचान का मिलान कर प्रवेश देते थे। पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में होती थी। गिनती पूरी होने के बाद नकदी का रिकॉर्ड रजिस्टर में दर्ज कर वाउचर तैयार किया जाता था और फिर लोहे के कंटेनर में बैंक भेजा जाता था।

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