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स्मार्ट मीटर की जांच : रिपोर्ट में टैरिफ संरचना पर संस्तुति, उपभोक्ताओं की मूल समस्याओं पर समिति क्यों रही मौन?

लखनऊ : उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने पावर कॉरपोरेशन द्वारा स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की जांच के लिए गठित समिति की रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि समिति का मूल कार्य स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की तकनीकी गुणवत्ता, जीटीपी के अनुरूप मानकों और उनकी वास्तविक कार्यप्रणाली की जांच करना था। इसके बावजूद रिपोर्ट में प्रीपेड बिलिंग के लिए टैरिफ संरचना को सरल करने तथा मिश्रित टैरिफ की संस्तुति किया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने कहा कि टैरिफ संरचना का निर्धारण और उसमें बदलाव UPERC के अधिकार क्षेत्र का विषय है। तकनीकी जांच के लिए गठित समिति को मीटर की गुणवत्ता और तकनीकी पहलुओं तक सीमित रहना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के उपभोक्ताओं की प्रमुख शिकायतें अधिक बिल आने, मीटर तेज चलने, बिल में अचानक उछाल आने तथा कनेक्शन कटने के बाद समय से पुनः न जुड़ने को लेकर रही हैं। कनेक्शन समय से न जोड़ने के मामलों में UPERC द्वारा पावर कॉरपोरेशन पर 7 लाख रुपये से अधिक की पेनल्टी लगाया जाना भी उपभोक्ता सेवा की गंभीर स्थिति को दर्शाता है।

अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि समिति को GTP के आधार पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर के अंदर लगे प्रत्येक प्रमुख कंपोनेंट, उसके निर्माता और मूल देश की जानकारी भी स्पष्ट रूप से सामने रखनी चाहिए थी। विशेष रूप से विदेशी अथवा चीनी मूल के कंपोनेंट के संबंध में पूरी पारदर्शिता जरूरी है।

उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की मूल समस्याओं सही बिल, सही मीटरिंग और समयबद्ध विद्युत सेवा पर समिति की रिपोर्ट में अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं देती, जबकि टैरिफ संरचना के सरलीकरण को प्रमुखता दी गई है। टैरिफ को सरल करना है या नहीं, इसका निर्णय UPERC को उपभोक्ता हित और सभी संबंधित पहलुओं का परीक्षण करने के बाद करना चाहिए।

परिषद ने मांग की कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर की पूरी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और यह भी स्पष्ट किया जाए कि तकनीकी जांच के दायरे में टैरिफ संरचना से संबंधित संस्तुतियां किस आधार पर शामिल की गईं।

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