
लखनऊ, अमृत विचार : राज्य सरकार ने श्रमिकों और नियोक्ताओं दोनों को बड़ी राहत दी है। अब कामगार वेतन न देने, न्यूनतम से कम वेतन देने या सेवा शर्तें पूरी न करने जैसे मामलों में 3 साल तक पुरानी शिकायत भी दर्ज करा सकेंगे। अभी तक इसकी समय सीमा सिर्फ 6 महीने थी।
श्रम विभाग ने तमाम पुरानी नियमावलियों को खत्म कर चार नए श्रम संहिताएं लागू की हैं। इनमें से वेतन संबंधी मजदूर संहिता की नियमावली को यूपी कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है। नई व्यवस्था के तहत सिनेमा, होटल सहित 74 शेड्यूल उद्योगों के अलावा कांचचूड़ी, कालीन और बीड़ी उद्योग भी अब इसके दायरे में आ गए हैं। यानी अब कोई भी उद्योग इस नियमावली से बाहर नहीं रहेगा। सभी उद्योगों में कामगारों को उनके कौशल और काम के वर्गीकरण के आधार पर न्यूनतम वेतन देना अनिवार्य होगा।
श्रमिकों को बड़ी राहत
अब श्रमिकों को न्याय के लिए कोर्ट के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। वे सीधे विभागीय अधिकारियों के यहां अपील कर सकेंगे। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि श्रमिक 3 वर्ष तक पुराने मामलों में भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इससे लंबे समय से वेतन बकाया या शोषण के शिकार कामगारों को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
नियोक्ताओं को भी मिली छूट
नियोक्ताओं को रजिस्टर के झंझट से मुक्ति मिली है। पहले हर नियमावली के हिसाब से दर्जनों रजिस्टर बनाने पड़ते थे। अब सिर्फ 3 तरह के रजिस्टर ही रखने होंगे। इसके अलावा विभागीय दफ्तरों के चक्कर बचाने के लिए ऑनलाइन निरीक्षण की व्यवस्था भी की गई है।
श्रम प्रवर्तन अधिकारी अमित प्रकाश सिंह ने बताया कि सरकार ने आदेश जारी कर दिया है। इससे कामगारों को बहुत राहत मिलेगी। जल्द ही श्रम विभाग की ओर से भी विस्तृत निर्देश जारी किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोगों को जानकारी मिल सके।

