
पितृ पक्ष में सर्वपितृ अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इसे पितृ पक्ष का अंतिम दिन माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन उन पूर्वजों के निमित्त भी श्राद्ध और तर्पण किया जा सकता है, जिनकी मृत्यु तिथि याद न हो या किसी कारणवश निर्धारित तिथि पर श्राद्ध न हो पाया हो। साल 2026 में सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर, शनिवार को पड़ रही है। इस दिन लोग अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देते हैं और उनकी स्मृति में दान-पुण्य करते हैं।
सर्वपितृ अमावस्या पर क्या-क्या करना चाहिए?
1. स्नान करके करें दिन की शुरुआत
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने और स्वच्छ वस्त्र पहनने की परंपरा है। कुछ लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। नदी तक जाना संभव न हो तो घर पर ही स्नान करके श्रद्धापूर्वक पूजा कर सकते हैं।
2. पितरों का तर्पण करें
धार्मिक परंपरा के अनुसार, तर्पण में जल और काले तिल अर्पित करके पूर्वजों का स्मरण किया जाता है। श्राद्ध और तर्पण की विधि परिवार की परंपरा तथा पुरोहित के मार्गदर्शन के अनुसार की जा सकती है।
3. सात्विक भोजन तैयार करें
इस अवसर पर कई परिवार लहसुन-प्याज रहित सात्विक भोजन बनाते हैं। खीर, पूड़ी और मौसमी सब्जियों जैसे पकवान श्राद्ध के भोजन में शामिल किए जाते हैं। भोजन तैयार करते समय स्वच्छता और श्रद्धा का ध्यान रखा जाता है।
4. जरूरतमंदों को भोजन और दान दें
सर्वपितृ अमावस्या पर अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन, अनाज, वस्त्र और अन्य उपयोगी वस्तुएं दान करने की परंपरा है। कुछ परिवार ब्राह्मणों को भोजन कराते हैं और दक्षिणा भी देते हैं।
5. पशु-पक्षियों के लिए भोजन निकालें
पितृ पक्ष में कौवे, गाय और कुत्ते को भोजन कराने की परंपरा भी प्रचलित है। कई परिवार श्राद्ध के भोजन का एक हिस्सा इनके लिए निकालते हैं। इसे पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने की पारंपरिक विधि माना जाता है।
6. पिंडदान और श्राद्ध करें
जिन परिवारों में पिंडदान की परंपरा है, वे विधि-विधान के अनुसार पिंड अर्पित करते हैं और पूर्वजों का स्मरण करते हैं। सही विधि जानने के लिए परिवार के पुरोहित से सलाह ली जा सकती है।
सर्वपितृ अमावस्या पर किन कामों से बचने की मान्यता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखा जाता है:
- मांस-मदिरा और तामसिक भोजन से परहेज करना।
- घर में झगड़े और विवाद से बचना।
- जरूरतमंदों या किसी भी व्यक्ति का अपमान नहीं करना।
- श्राद्ध कर्म को जल्दबाजी के बजाय श्रद्धा और विधि के अनुसार करना।
- बाल, नाखून या दाढ़ी कटवाने से बचने की परंपरा का पालन करना, यदि आपके परिवार में ऐसा नियम माना जाता है।
नई वस्तुएं खरीदने या शुभ कार्य करने से जुड़ी मनाही भी कुछ पारंपरिक मान्यताओं में मिलती है। इन नियमों को सभी परिवारों में एक जैसा अनिवार्य नहीं माना जाता।
सर्वपितृ अमावस्या का क्या है धार्मिक महत्व?
मान्यता है कि इस दिन पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और दान करने से उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। यह अवसर परिवार को अपने पूर्वजों को याद करने, उनके प्रति कृतज्ञता जताने और जरूरतमंदों की सहायता करने की प्रेरणा भी देता है।
ध्यान दें: श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान से जुड़ी विधियां क्षेत्र और पारिवारिक परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। यहां बताई गई बातें धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं।



