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रक्सौल में 12 करोड़ तो पटना में 3 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा…बिहार में बदला सर्किल रेट, जानिए बड़े जिलों में जमीन की कीमत

बिहार में अब प्रॉपर्टी खरीदना पहले की तुलना में काफी महंगा हो गया है. राज्य सरकार ने मिनिमम वैल्यू रजिस्टर यानी सर्कल रेट में बड़े बदलाव किए हैं. नई व्यवस्था के तहत शहरी क्षेत्रों में जमीन की न्यूनतम कीमतों में 100 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है, जबकि ग्रामीण और पेरिफेरल इलाकों में सर्कल रेट को 1.6 गुना तक बढ़ाया गया है. डिपार्टमेंट ऑफ प्रोहिबिशन, एक्साइज एंड रजिस्ट्रेशन ने गुरुवार को इस संशोधन को मंजूरी दी और नई दरें पूरे राज्य में लागू हो गई हैं. इस बढ़ोतरी के बाद से राज्य के बड़े शहरों से लेकर गांवों तक की जमीनों के रेट बढ़ गए हैं. रक्सौल में जो जमीन पहले 6 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा यानी करीब 44 हजार रुपये वर्ग फुट में बिक रही थी उसके भाव अब सीधे 88 हजार स्वायर फिट हो गए हैं. पटना में भी रेट दोगुना बढ़े हैं. यही नहीं, सरकार ने सर्किल रेट के साथसाथ स्टांप ड्यूटी में भी 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है.

रक्सौल में 12 करोड़ तो पटना में 3 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा…बिहार में बदला सर्किल रेट, जानिए बड़े जिलों में जमीन की कीमत

नई दरों का सीधा असर प्रॉपर्टी के रजिस्ट्रेशन खर्च पर पड़ेगा. राज्य सरकार ने स्टांप शुल्क में 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए इसे 7 प्रतिशत से बढ़ाकर 8 प्रतिशत कर दिया है. इसके अलावा खरीदारों को 2 प्रतिशत रजिस्ट्रेशन शुल्क भी देना होगा. मतलब जमीन खरीदने पर अब आपको 3 शुल्क चुकाने होंगे हालांकि, पहले भी यही तीन शुल्क होते थे मगर अब आपको अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी होगी. सरकार ने ग्रामीण इलाकों के सर्किल रेट में 2013 और शहरी इलाकों के सर्किल रेट में 2016 के बाद यह बड़ा बदलाव किया है.

ये हुए हैं बदलाव

महिलाओं को मिली है अतिरिक्त छूट

  • महिलाओं के नाम पर जमीन या मकान की रजिस्ट्री कराने पर 5% की छूट मिलेगी.
  • इस छूट का लाभ केवल महिला के नाम पर रजिस्टर्ड प्रॉपर्टी पर मिलेगा.
  • कुल छूट में 4% की राहत स्टांप ड्यूटी में दी जाएगी.
  • रजिस्ट्रेशन फीस में भी 1% की छूट मिलेगी.
  • सरकार का उद्देश्य महिलाओं को संपत्ति का मालिक बनने के लिए प्रोत्साहित करना है.

प्रमुख शहरों में इतना हुआ भाव

बिहार सरकार की ओर से लिए गए इस फैसले से पटना, रक्सौल जैसे बड़े और वीआईपी शहरों में जमीन के दाम दोगुना हो गए हैं. इसके अलावा मुजफ्फरपुर, गया, नालंदा, गया जैसे अन्य शहरों में भी रेसिडेंशियल, कमर्शियल और खेती वाली जमीन के दाम बढ़ गए हैं. मुजफ्फरपुर की बात करें तो वहां मुशहरी इलाके में जिस जमीन का MVR पहले 4.39 लाख रुपये प्रति कट्ठा यानी करीब 323 रुपये प्रति वर्ग फुट था उसका दाम सीधे 60 प्रतिशत बढ़कर 7.03 लाख रुपये प्रति कट्ठा हो गया है.

सोर्स बिहार सरकार

गया जिले का देखें तो वहां भी जो रेसिडेंशियल जमीन पहले 253 रुपये प्रति वर्ग फुट के हिसाब में थी उसके दाम अब 509 रुपये हो गए हैं. कट्ठा में देखें तो जो भाव पहले 3.45 लाख रुपये थे वह अब बढ़कर 6 लाख 93 हजार रुपये हो गए हैं. इसी तरह बक्सर और नालंदा में भी दाम बढ़े हैं.

New Property Rate

किसानों को यहां मिलेगा फायदा

सर्किल रेट बढ़ने की वजह से जहां एक ओर नई जमीन खरीदना महंगा होगा. वहीं, दूसरी ओर किसानों और भूमि मालिकों का इसका एक फायदा भी मिल सकता है. यह फायदा भूमि अधिग्रहण के तौर पर होगा. अगर सरकार चाहे वह केंद्र की हो या राज्य की. जब भी अपना कुछ प्रोजेक्ट बनाने के लिए किसानों से उनकी जमीन लेगी तो उसे ही भूमि अधिग्रहण कहते हैं. इसमें अब किसानों को फायदा होगा. क्योंकि सरकार जब किसानों की जमीन लेती है तो उसे सर्किल रेट के हिसाब से पैसा यानी मुआवजा देना होता है. राज्य में सर्किल रेट ज्यादा हुआ हो तो जाहिर सी बात है इससे किसानों को ऐसी स्थिति में ज्यादा पैसा मिलेगा.

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सरकारी अनुमान के मुताबिक, राज्य सरकार की योजनाओं के लिए अधिग्रहित जमीन पर दिया जाने वाला मुआवजा बढ़कर 14,897 करोड़ रुपये से 18,637 करोड़ रुपये हो जाएगा. वहीं, केंद्र सरकार की परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण पर मिलने वाला मुआवजा 24,629 करोड़ रुपये से बढ़कर 39,460 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है.

सर्किल रेट कैसे तय होता है?

बिहार में सर्किल रेट सरकार की ओर से तय की गई जमीन और मकान की सबसे कम सरकारी कीमत होती है. इसे तय करने के लिए हाल की जमीन खरीदबिक्री, रजिस्ट्री में दर्ज कीमतों, बाजार भाव और इलाके के विकास को देखा जाता है. साथ ही स्थानीय अधिकारियों की राय भी ली जाती है. किसी जगह की सड़क, बाजार, स्कूल, अस्पताल और आनेजाने की सुविधाओं का भी असर सर्किल रेट पर पड़ता है. सर्किल रेट हर जगह एक जैसा नहीं होता. यह इलाके, सड़क की स्थिति और जमीन के इस्तेमाल के हिसाब से अलगअलग तय किया जाता है. सरकार जरूरत पड़ने पर इसमें बदलाव भी करती है.

कुल मिलाकर अगर देखें तो बिहार सरकार की ओर से सर्किल रेट बढ़ाने का जो फैसला लिया गया है उसके सरकार के रेवेन्यू में निश्चित तौर पर बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. मगर इससे आम आदमी पर बोझ भी बढ़ेगा. सरकारी रेट में बढ़ोतरी होने के बाद से बनी बनाई प्रॉपर्टी के दाम पर भी असर देखा जाता है. रजिस्ट्रेशन और स्टांप की कास्ट जब बढ़ती है तब वह सीधे घर और जमीन खरीदने वाले की जेब पर असर डालती है.

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