DharamIndia

Shiv Bhakti और Discipline का महीना सावन, तामसिक भोजन से दूरी क्यों है जरूरी

सावन का पवित्र महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। इस पवित्र महीने में भक्त पूजा, उपवास, शिव सेवा, जलाभिषेक और भगवान शिव से संबंधित मंत्रों का जाप आदि करते हैं। वहीं सावन के महीने में लोग सात्विक जीवनशैली अपनाते हैं। इस दौरान आध्यात्मिक अनुष्ठानों के अलावा कई घरों में प्याज, लहसुन, दही, कढ़ी और दूध आदि चीजों के सेवन करने की मनाही होती है। तो ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं सावन के महीने में इन चीजों को खाने की मनाही क्यों होती है।

सावन का महीना

Shiv Bhakti और Discipline का महीना सावन, तामसिक भोजन से दूरी क्यों है जरूरी
हिंदू मान्यताओं के मुताबिक सावन का महीना शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि का समय होता है। ज्योतिष और पारंपरिक मान्यताओं के मुताबिक इस पवित्र महीने में भक्तों को सांसारिक मोहमाया और विकर्षणों आदि से दूर रहकर शिव भक्ति पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इस महीने में भोजन का बेहद योगदान होता है। क्योंकि माना जाता है कि यह आपके विचारों और भावनाओं पर असर डालता है। इसलिए कहा जाता है कि सादा और सात्विक खाना मानसिक स्पष्टता, भावनात्मक संतुलन और एकाग्रता को बनाए रखने में मदद करता है।

प्याज और लहसुन परहेज क्यों

आयुर्वेद और योग दर्शन के मुताबिक लहसुनप्याज को तामसिक या फिर राजसिक खाद्य पदार्थों में शामिल किया जाता है। जोकि इंद्रियों को उत्तेजित करने के अलावा बेचैनी बढ़ाता है और मानसिक शांति कम कर सकते हैं।
सावन का महीना ध्यान, मंत्रजाप और आत्म अनुशासन के लिए समर्पित होता है। इस कारण भक्तों को तामसिक और राजसिक खाने की जगह दूध, फल, मेव और साधारण सब्जियों जैसे सात्विक खानों का चयन करना चाहिए। लहसुन और प्याज से परहेज करने से विचारों की शुद्धता बढ़ती है।

जानें दही खाना सही या नहीं

आयुर्वेद के मुताबिक सावन का महीना बारिश वाला होता है। जिस कारण से पाचन प्रोसेस स्वाभाविक रूप से कमजोर हो जाती है। दही पौष्टिक तो है, लेकिन कुछ लोगों को खासकर रात में दही खाने से पेट भारी लगने के अलावा बलगम की समस्या को पैदा कर सकता है। यह महीना मानसून के दौरान पड़ता है। जिस कारण कई परिवारों में मौसमी खानपान के तहत दही खाने से बचा जाता है।

जानें कढ़ी के सेवन से जुड़े नियम

सावन के महीने में कई लोग कढ़ीदही और बेसन से बनी चीजों को खाने से परहेज करते हैं। आध्यात्मिक नजरिए से कई लोग सावन व्रत के दौरान खट्टे खाने की चीजों का कम सेवन करते हैं। जोकि सादगी और अनुशासन का प्रतीक है। यह लोग हैवी खाने की बजाय उबले आलू, साबूदाना, फल, दूध और मक्खन जैसे हल्के व्यंजन करना पसंद करते हैं।
भारत का हर परिवार अपनेअपने तरीकों से सावन की परंपराओं को निभाता है। अलगअलग हिस्सों में यह रीतिरिवाज अलग हो सकते हैं। कुछ लोग सावन के महीने में मांसमछली, प्याजलहसुन, दही और कढ़ी आदि का सेवन नहीं करते हैं। वहीं कुछ लोग सिर्फ सोमवार या खास व्रत में ऐसा करते हैं। सावन महीने का संदेश कृतज्ञता, पवित्रता और अनुशासन के साथ जीना है।

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply