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SBI के शेयरधारकों की मौज! नए IPO में शेयर मिलने का चांस हुआ डबल, ऐसे लगाएं दो बार बोली

अगर आपके पास भारतीय स्टेट बैंक का एक भी शेयर है, तो आपके लिए एक बेहद शानदार खबर है. साल 2026 का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ, ‘एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट’ , सब्सक्रिप्शन के लिए 14 जुलाई से खुल गया है. 16 जुलाई तक चलने वाले इस इश्यू का प्राइस बैंड 545 रुपये से लेकर 574 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि एसबीआई के मौजूदा शेयरधारकों को आम रिटेल निवेशकों के मुकाबले एक अलग फायदा मिल रहा है. वे इस आईपीओ में एक नहीं, बल्कि दो बार बोली लगा सकते हैं, जिससे उन्हें शेयर अलॉटमेंट मिलने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है. आइए इसे विस्तार से समझते हैं कि यह पूरी प्रक्रिया कैसे काम करेगी.

SBI के शेयरधारकों की मौज! नए IPO में शेयर मिलने का चांस हुआ डबल, ऐसे लगाएं दो बार बोली

कौन उठा सकता है इस खास कोटे का फायदा?

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के इस इश्यू में पैरेंट कंपनी के शेयरधारकों के लिए एक अलग कोटा रिज़र्व किया गया है. नियमों के मुताबिक, जिस भी निवेशक के डीमैट खाते में रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस दाखिल होने की तारीख, यानी 7 जुलाई 2026 तक SBI का कम से कम एक शेयर मौजूद था, वह इस कोटे के तहत आवेदन करने के योग्य है. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के शेयरहोल्डिंग आंकड़ों पर गौर करें, तो 31 मार्च 2026 तक एसबीआई के पास लगभग 36.33 लाख रिटेल शेयरधारक थे. इन लाखों निवेशकों के पास अब इस बड़े मौके को भुनाने का सीधा अवसर है.

निवेशक कैसे लगा सकता है दो आवेदन?

शेयर बाजार में जब कोई अच्छा आईपीओ आता है, तो हर निवेशक की चाहत होती है कि उसे किसी तरह अलॉटमेंट मिल जाए. एसबीआई के शेयरधारकों के पास यह मुराद पूरी करने के दो स्वतंत्र रास्ते हैं. योग्य निवेशक इस आईपीओ में दो अलगअलग आवेदन जमा कर सकते हैं. पहला आवेदन आम ‘रिटेल कैटेगरी’ के तहत किया जा सकता है, जबकि दूसरा आवेदन विशेष ‘शेयरहोल्डर कैटेगरी’ के जरिए किया जा सकता है. चूंकि ये दोनों श्रेणियां एकदूसरे से बिल्कुल अलग हैं, इसलिए निवेशकों को शेयर मिलने के दो स्वतंत्र मौके मिल जाते हैं. आसान भाषा में कहें तो एक जगह से निराशा हाथ लगने पर भी दूसरी जगह से शेयर मिलने की उम्मीद बची रहती है.

अलॉटमेंट की प्रक्रिया कैसे करेगी काम?

रिटेल और शेयरहोल्डर कैटेगरी को शेयरों के दो अलगअलग पूल के रूप में देखा जाता है. दोनों में अलॉटमेंट का फैसला भी पूरी तरह स्वतंत्र रूप से होता है. रिटेल कैटेगरी में कोई भी निवेशक कम से कम एक लॉट के लिए आवेदन कर सकता है, जिसमें 26 शेयर शामिल हैं. अगर आप 2 लाख रुपये से ज्यादा का आवेदन करते हैं, तो वह हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल कैटेगरी में चला जाएगा. जब इश्यू ओवरसब्सक्राइब हो जाता है, तो रिटेल कोटे में शेयर आमतौर पर एक कंप्यूटराइज्ड लॉटरी सिस्टम के जरिए बांटे जाते हैं. वहीं दूसरी तरफ, शेयरहोल्डर कोटे में अलॉटमेंट आनुपातिक आधार पर किया जाता है, जो इसे रिटेल प्रक्रिया से अलग बनाता है.

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.

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