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सेंसेक्स में 722 अंकों की गिरावट, 220 मिनट में बाजार निवेशकों के डूबे 5.41 लाख करोड़

मंगलवार को कारोबारी सत्र के दौरान शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली. दोपहर करीब 2 बजे के आसपास सेंसेक्स 722 अंकों की गिरावट देखने को मिली. निफ्टी में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है. जिसकी वजह से शेयर बाजार निवेशकों को 5.41 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो गया. शेयर बाजार में गिरावट के प्रमुख कारणों की बात करें तो कोस्पी में भारी गिरावट और टेक्नोलॉजी शेयरों में जबरदस्त बिकवाली रही. अगर बात शेयरों की करें तो BSE पर सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वालों में इंफोसिस, टीसीएस, टाटा स्टील, टेक महिंद्रा और अडानी पोर्ट्स शामिल थे, जिनमें दोपहर के कारोबार में 3.5 फीसदी तक की गिरावट आई. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर शेयर बाजार में किस तरह के आंकड़े देखने को मिले हैं…

सेंसेक्स में 722 अंकों की गिरावट, 220 मिनट में बाजार निवेशकों के डूबे 5.41 लाख करोड़

शेयर बाजार में बड़ी गिरावट

बांबे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स दोपहर 2 बजकर 20 मिनट पर 546.77 अंकों की गिरावट के साथ 76,547.30 अंकों पर कारोबार कर रहा है. जबकि कारोबारी सत्र के दौरान सेंसेक्स 722 अंकों की गिरावट के साथ 76,371.70 अंकों के साथ दिन के लोअर लेवल पर आ गया. वैसे सेंसेक्स 77,086.05 अंकों के साथ फ्लैट लेवल पर ओपन हुआ था. वहीं दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक दोपहर 2 बजकर 20 मिनट पर 200 अंकों की गिरावट के साथ 23,909.45 अंकों पर कारोबार कर रहा था. जबकि कारोबारी सत्र के दौरान निफ्टी 240 अंकों की गिरावट के साथ 23,862.65 अंकों पर आ गया था. वैसे निफ्टी 24,071.30 अंकों पर ओपन हुआ था.

बाज़ार में गिरावट के मुख्य कारण

कोस्पी में गिरावट

हाल ही में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद मंगलवार को दक्षिण कोरिया के बेंचमार्क कोस्पी इंडेक्स में भारी बिकवाली देखी गई. बाजार में जबरदस्त तेजी के बाद वैल्यूएशन के बहुत ज़्यादा बढ़ने की चिंताओं के बीच निवेशकों ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र की बड़ी कंपनियों में मुनाफ़ा वसूली की. कोस्पी में 10% तक की गिरावट आई, जिसमें SK Hynix 12% से ज़्यादा और सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स लगभग 13% गिरे. मार्केटवाइड सर्किट ब्रेकर लगने के बाद कोरिया एक्सचेंज ने 20 मिनट के लिए कारोबार रोक दिया.

यह गिरावट तब आई है जब इस महीने की शुरुआत में इंडेक्स नई ऑलटाइम ऊंचाई पर पहुंच गया था और पहली बार 9,000 के स्तर को पार कर गया था. सोमवार के सत्र में अमेरिकी टेक कंपनियों के शेयरों में गिरावट के बाद टेक्नोलॉजी शेयरों को लेकर निवेशकों का मूड और कमज़ोर हुआ, और अब निवेशकों का ध्यान इस हफ़्ते आने वाले माइक्रोन टेक्नोलॉजी के तिमाही नतीजों पर है.

US फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने का डर

मिडिल ईस्ट में चल रहे टकराव की वजह से तेल की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे महंगाई को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं. इससे यह उम्मीद भी मजबूत हुई है कि ब्याज दरें ऊंची बनी रह सकती हैं. CME फेडवॉच टूल के अनुसार, ट्रेडर्स अब दिसंबर में फ़ेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना 88% मान रहे हैं, जबकि पिछले हफ्ते फेड की बैठक से पहले यह संभावना 61 फीसदी थी.

US में ब्याज दरें बढ़ने से भारतीय कैपिटल मार्केट से विदेशी पैसा बाहर जा सकता है, क्योंकि US ट्रेजरी पर ज्यादा यील्ड विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक होती है. US में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बॉन्ड का आकर्षण भी कम हो जाता है.

IT शेयरों में फिर से बिकवाली

पिछले हफ्ते हुई जबरदस्त बिकवाली के बाद सोमवार को थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन मंगलवार को IT शेयरों पर फिर से दबाव बन गया. AI की वजह से आ रहे बदलाव और टेक्नोलॉजी पर खर्च में कमी की चिंताओं के बीच TCS, Infosys, Wipro और HCLTech के शेयरों में कम से कम 3% की गिरावट आई.

बिकवाली का यह नया दौर तब शुरू हुआ जब Accenture ने अपने सालाना रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस के ऊपरी स्तर को कम कर दिया. इससे ग्लोबल कंपनियों द्वारा ‘डिस्क्रीशनरी स्पेंडिंग’ में कमी को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गईं. हालांकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में निवेश मजबूत बना हुआ है, लेकिन कंपनियां बड़े IT कंसल्टिंग और डिजिटल ट्रांसफ़ॉर्मेशन प्रोजेक्ट्स पर खर्च करने से बच रही हैं.

Accenture के बयान ने निवेशकों की इस चिंता को और बढ़ा दिया है कि डिमांड में सुधार में उम्मीद से ज्यादा समय लग सकता है. यह आउटलुक भारतीय IT कंपनियों के लिए खास तौर पर अहम है, क्योंकि वे अपना ज्यादातर रेवेन्यू नॉर्थ अमेरिका से कमाती हैं और अक्सर बड़े डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए Accenture से मुकाबला करती हैं.

रुपए में गिरावट

एशियाई शेयरों में गिरावट और इस साल फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की बढ़ती उम्मीदों के कारण ट्रेडर्स दक्षिण एशियाई करेंसी में लंबी अवधि के लिए निवेश करने से बच रहे हैं. इसी वजह से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 0.16 फीसदी गिरकर 94.8275 पर आ गया.एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि रुपए के लिए तुरंत रुकावट 94.7094.75 की रेंज में दिख रही है. अगर यह इस लेवल से ऊपर बना रहता है, तो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करेंसी और कमजोर होकर 94.8094.85 तक जा सकती है.

दूसरी ओर, अगर यह 94.50 से नीचे जाता है, तो यह 94.2094.30 ज़ोन की ओर बढ़ने का रास्ता खोल सकता है. यह जोन पहले एक अहम लॉन्गटर्म सपोर्ट लेवल के तौर पर काम कर चुका है और अभी तक इसे दोबारा टेस्ट नहीं किया गया है. निकट भविष्य के लिए नजरिया सतर्क बना हुआ है क्योंकि रुपया अहम टेक्निकल लेवल के करीब ट्रेड कर रहा है. जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम, डॉलर की मांग और घरेलू पॉलिसी फैक्टर इसकी दिशा तय कर सकते हैं.

प्रॉफिट बुकिंग

पिछले आठ ट्रेडिंग सेशन में से छह में निफ्टी बढ़त के साथ बंद हुआ है. इसकी वजह USईरान शांति समझौते पर हुई प्रगति के बाद जियोपॉलिटिकल तनाव में कमी और उसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट रही है. हालांकि, मार्केट में शामिल लोगों के बीच सावधानी बनी हुई है. एनालिस्ट का कहना है कि तेल की कीमतों में हालिया गिरावट के बावजूद, होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग को पूरी तरह से बहाल करना एक धीरेधीरे और जटिल प्रक्रिया हो सकती है. इसके लिए जहाजों की समन्वित आवाजाही, तेल उत्पादन सुविधाओं को फिर से शुरू करने, बुनियादी ढांचे की मरम्मत और डीमाइनिंग ऑपरेशन पर समझौते की जरूरत होगी. इसके अलावा, कुछ जहाज मालिक जलडमरूमध्य और व्यापक फारस की खाड़ी क्षेत्र में ऑपरेशन को पूरी तरह से फिर से शुरू करने में हिचकिचा रहे हैं. जानकारों का यह भी कहना है कि होर्मुज शिपिंग रूट में लंबे समय तक रुकावट के दौरान ग्लोबल तेल भंडार में कमी आई थी और इसे फिर से भरने में समय लग सकता है.

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