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​जब तक सांस चली, दीदी को बचाती रही, अपने कपड़े तक पहना दिए… रुला देगी उत्तरकाशी ट्रैकिंग हादसे में जान गंवाने वाली बहनों की कहानी

Lucknow/Uttarkashi: उत्तराखंड के उत्तरकाशी में केदारताल ट्रेक के दौरान हुए भीषण हिमस्खलन में जान गंवाने वाली लखनऊ की दो सगी बहनों वर्तिका वर्मा और दीपिका वर्मा की दर्दनाक कहानी ने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं. सर्च टीम के खुलासे के मुताबिक, दोनों बहनें अंतिम सांस तक एकदूसरे और जिंदगी के लिए संघर्ष करती रहीं. जब बुधवार को सर्च टीम को दीपिका का शव मिला, तो उसके शरीर पर अतिरिक्त गर्म कपड़े लिपटे मिले. बड़ी बहन दीपिका को कड़ाके की ठंड और माइनस तापमान से बचाने के लिए छोटी बहन वर्तिका ने अपने हिस्से के कपड़े भी उसे पहना दिए थे. हालांकि, भीषण हिमपात, 15 डिग्री ठंड और सिर पर गंभीर चोटों के कारण दोनों बहनों की सांसें थम गईं.

​जब तक सांस चली, दीदी को बचाती रही, अपने कपड़े तक पहना दिए… रुला देगी उत्तरकाशी ट्रैकिंग हादसे में जान गंवाने वाली बहनों की कहानी

गुरुवार सुबह करीब 10:10 बजे एम्बुलेंस से जब दोनों बहनों के पार्थिव शरीर लखनऊ के गुड़ंबा स्थित गायत्रीपुरम आवास पहुंचे, तो पूरे इलाके में मातम छा गया. बेटियों के शवों से लिपटकर पिता श्रीनारायण वर्मा फफकफफक कर रो पड़े. उन्होंने कहा “बहुत लाड़प्यार से पाला था, आज बेटियों की विदाई हो गई… ऐसी विदाई किसी की न हो.” जब पड़ोसियों ने उन्हें संभालने के लिए कुर्सी पर बैठने को कहा, तो वे बिलखते हुए बोले “आज मेरी बेटियों की विदाई है, मैं कैसे बैठ जाऊं.” दोपहर 12:48 बजे शव वाहन से दोनों बहनों को अंतिम संस्कार के लिए भैंसाकुंड घाट ले जाया गया, जहां अश्रुपूरित आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी गई.

“इस बार मन नहीं कर रहा…”: दीपिका ने जताई थी अनहोनी की आशंका

दीपिका के एक दोस्त ने बताया कि ट्रेकिंग पर रवाना होने से पहले खरीदारी करते वक्त दीपिका ने वर्तिका से कहा था कि “इस बार कुछ अच्छा नहीं लग रहा है, अभी जाने का मन नहीं है, प्लान टालकर दिसंबर में चलते हैं.” लेकिन वर्तिका के ऑफिस के एक साथी के ऐन वक्त पर हटने के कारण दीपिका उसके साथ जाने को तैयार हो गई थी. परिजनों का आरोप है कि ‘सोल सीकर’ ट्रेकिंग कंपनी ने सुरक्षा के नाम पर भारीभरकम फीस वसूली थी, लेकिन हादसे के वक्त कंपनी ने केवल अपने 4 कर्मचारियों को एयरलिफ्ट कर सुरक्षित निकाल लिया और बाकी 12 सदस्यों की टीम को भगवान भरोसे छोड़ दिया. भाई अतुल ने बताया कि परिवार अब ट्रेकिंग कंपनी के खिलाफ FIR दर्ज कराकर कानूनी कार्रवाई करेगा.

26 अक्टूबर से 5 नवंबर: जानिए 11 दिनों की टाइमलाइन

ट्रेकिंग की अनुमति मिली 26 अक्टूबर 2026
ट्रेकिंग कंपनी को उत्तरकाशी में तीन दिवसीय केदारताल ट्रेक की आधिकारिक अनुमति मिली.

दिल्ली से गंगोत्री रवाना 27 अक्टूबर 2026

दीपिका लखनऊ से दिल्ली में वर्तिका के पास पहुंची. दोनों 12 सदस्यीय टीम के साथ गंगोत्री के लिए रवाना हुईं.

मौसम खराब का अलर्ट 28 अक्टूबर 2026

खराब मौसम और भारी हिमपात का अलर्ट जारी, टीम से संपर्क टूटना शुरू हुआ.

हिमस्खलन में फंसी टीम 2930 अक्टूबर 2026

केदारताल के पास भीषण एवलांच आया. 12 सदस्यीय दल बर्फ में फंस गया. 30 अक्टूबर को सैटेलाइट/एसओएस से मदद मांगी गई.

कंपनी ने अपनों को निकाला 31 अक्टूबर 2026

ट्रेकिंग कंपनी ने केवल अपने 4 क्रू मेंबर्स को रेस्क्यू किया, बाकी ट्रेकर्स फंसे रहे.

हेलीकॉप्टर सर्च और शवों की बरामदगी 0104 नवंबर 2026

सेना और एसडीआरएफ का सर्च ऑपरेशन शुरू. 3 नवंबर को टेंट और 2 शव मिले. 4 नवंबर को वर्तिका और दीपिका के शव बरामद हुए और पोस्टमार्टम के बाद लखनऊ रवाना किए गए.

लखनऊ पहुंचे शव, अंतिम संस्कार 05 नवंबर 2026

सुबह 10:10 बजे शव गायत्रीपुरम पहुंचे. दोपहर में भैंसाकुंड में दोनों बहनों का अंतिम संस्कार किया गया.

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